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नए अवतार में दिखेगा पटना का गांधी सेतु पुल, दिसंबर में होगा नए पुल का उद्घाटन

इंदिरा गांधी ने पटना के जिस महात्मा गांधी सेतु पुल का उद्घाटन किया था अब उसकी जगह नया पुल बनकर तैयार हो चुका है.

नए अवतार में दिखेगा पटना का गांधी सेतु पुल, दिसंबर में होगा नए पुल का उद्घाटन
गांधी सेतु के पास नया पुल बनकर तैयार है.

पटनाः पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने पटना के जिस महात्मा गांधी सेतु पुल का उद्घाटन किया था अब उसकी जगह नया पुल बनकर तैयार हो चुका है. पीएम नरेन्द्र मोदी के विशेष पैकेज के सहयोग से बनने वाले पुल का एक लेन अगले पांच महीनों में आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा. नये पुल के अस्तित्व में आने के बाद उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच आने जाने का रास्ता बेहद सुगम हो जाएगा. 

कभी एशिया का सबसे लंबा पुल माना जानेवाले गांधी सेतु अपने नये अवतार में तैयार हो चुका है. बिहार सरकार 2019 दिसंबर में पुल का एक लेन चालू करने की तैयारी कर रही है. जिसके लिए जोर सोर से काम चल रहा है. पुराने पुल के 46 स्पैन को बदलने का काम करना है. ज्यादातर स्पैन बदले जा चुके हैं. सुपर स्ट्रक्चर भी बनकर तैयार हो चुका है. जो थोडे बहुत काम बचे हैं वो अगले पांच महीनों में हर हाल में पूरे कर लिये जाएंगे. पुल के निर्माण में लगने वाले स्पैनों के गार्डर और लोहे के प्लेट कोलकाता, चेन्नई, गाजियाबाद और अहमदाबाद से मंगवाए गये हैं.

पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव कहते हैं कि 1742 करोड की राशि से बनने वाला ये पुल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पैकेज की घोषणा का बड़ा हिस्सा है. पुल के जल्द निर्माण में सहुलियत इसलिए हुई क्योंकि केन्द्र सरकार की ओर से राशी दिये जाने में कोई भी विलंब नहीं हुई. 2014 में पीएम बिहार को विशेष पैकेज दिये जाने की घोषणा की थी. 2019 में पुल का एक लेन चालू होने जा रहा है. पुल का दूसरा लेन 2020 तक बनकर तैयार हो जाएगा.

दरअसल, गांधी सेतु पुल का उद्घाटन 1982 में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने किया था. जिसके निर्माण में 87 करोड रुपये खर्च हुए थे. पुल दस सालों में बनकर तैयार हुआ था. लेकिन उद्घाटन के अगले दस सालों का समय भी यह पुल सही से पूरा नहीं कर सका. 1992 के बाद से लगातार पुल की स्थिती जर्जर होती चली गयी. एक अनुमान के मुताबित 87 करोड़ से निर्मित इस पुल के मेनटेनेंस में लगभग 400 करोड़ के वारे न्यारे हो गये. 

एक वक्त ऐसा भी आया जब लोगों को साढ़े 5 किलोमीटर लंबे इस पुल को पार करने में 6 घंटे तक लग जाया करते थे. कभी कभी तो पुल में आयी खराबी की वजह से जाम के कारण लोगों को रात रात भर पुल पर ही गुजारनी पडती थी. पुल के लगातार क्षतिग्रस्त होने की वजह से वाहनों की स्पीड भी काफी कम कर दी गयी थी. उत्तर बिहार जानेवाले लोगों को थोडी राहत तब मिली जब फरवरी 2016 में दीघा सेतु की शुरुआत हुई. लेकिन राहत छोटे वाहनों को ही मिली . इस सेतु से भारी वाहनों के आने जाने को लेकर हमेशा समस्या बनी रही क्योंकि सेतु की दूसरी तरफ सारण की ओर एनएच से जोडने का काम अधूरा था. जिसे अब पूरा किया जा रहा है. 

गांधी सेतु पुल की समस्या इतनी बडी है कि लोगों को अभी भी यकीन नहीं हो रहा कि वाकई दिसंबर में ये पुल चालू हो जाएगा. स्थानीय लोग कहते हैं कि पुल वाकई बन गया तो इससे ज्यादा खुशी की बात कुछ नहीं हो सकती.  

नये गांधी सेतु के निर्माण के बाद न केवल भारी वाहन भी फर्राटे से दूरी तय कर सकेंगे. बल्कि जेपी सेतु पर ट्रैफिक का लोड भी कम हो जाएगा और उत्तर बिहार से दक्षिण बिहार आना जाना बेहद आसान हो जाएगा.