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बिहार: ओवैसी की पार्टी की जीत से सीमांचल में नए समीकण के संकेत!

किशनगंज विधनसभा क्षेत्र में एआईएमआईएम ने बिहार विधानसभा में अपना खाता खोल लिया है. किशनंगज विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में एआईएमआईएम ने कांग्रेस से यह सीट छीन ली है. इस उपचुनाव में एमआईएमआईएम के कमरुल होदा ने 10 हजार से अधिक मतों से भाजपा की प्रत्याशी स्वीटी सिंह को पराजित किया. 

बिहार: ओवैसी की पार्टी की जीत से सीमांचल में नए समीकण के संकेत!
किशनगंज के इस परिणाम से सीमांचल में नया सियासी समीकरण बनने की संभवना बन रही है.

पटना: बिहार में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने किशनंगज विधानसभा के लिए हुए उपचुनाव में जीत दर्ज कर इस बात के संकेत दे दिए हैं कि उनकी बिहार की राजनीति में पैठ बढ़ी है. 

शुरुआत में यहां के लोग एआईएमआईएम को गंभीरता से नहीं ले रहे थे, लेकिन उपचुनाव के परिणाम ने यह साबित किया है कि अब ओवैसी के भाषणों को लोग पसंद करने लगे हैं. वैसे, किशनगंज के इस परिणाम से सीमांचल में नया सियासी समीकरण बनने की संभवना बलवती हो गई है. 

किशनगंज विधनसभा क्षेत्र में एआईएमआईएम ने बिहार विधानसभा में अपना खाता खोल लिया है. किशनंगज विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में एआईएमआईएम ने कांग्रेस से यह सीट छीन ली है. इस उपचुनाव में एमआईएमआईएम के कमरुल होदा ने 10 हजार से अधिक मतों से भाजपा की प्रत्याशी स्वीटी सिंह को पराजित किया. 

साल 2015 के विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने छह सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे, लेकिन किसी को जीत हासिल नहीं हुई थी. इस पार्टी को मगर एक लाख से ज्यादा मत मिले थे. इनमें कोचाधामन विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी को 34 हजार से अधिक मत मिले थे. 

इसी तरह, इस वर्ष हुए लोकसभा चुनाव में किशनंगज लोकसभा क्षेत्र से एआईएमआईएम की हार जरूर हुई, लेकिन विजयी प्रत्याशी के मुकाबले एआईएमआईएम के प्रत्याशी को मात्र 35 हजार मत ही कम मिले थे. लोकसभा चुनाव के बाद एआईएमआईएम ने अपने संगठन को विस्तार देना शुरू किया था और अब उपचुनाव के परिणाम ने उसकी मजबूती के संकेत दे दिए हैं. 

ओवैसी की पार्टी को बिहार में एक ही सीट पर फतह मिली है. इससे कोई बड़ा उलट-फेर भले न हो, पर सीमांचल के अंदर इसे नई किस्म की मुस्लिम राजनीति की आहट मानी जा सकती है.

राजनीतिक समीक्षक और बीबीसी के संवाददाता रहे मणिकांत ठाकुर कहते हैं कि उपचुनाव के नतीजे से सीमांचल में राजनीतिक समीकरण अवश्य बदलेंगे.

उन्होंने कहा कि बिहार में राजद का 'माई' (मुस्लिम-यादव) समीकरण बेहद मजबूत माना जाता है. जद (यू) और कांग्रेस भी इस वोटबैंक पर अपना दावा जताते रहे हैं. इन सबके बीच सीमांचल की सियासत में किशनगंज से ओवैसी की पार्टी का प्रवेश हुआ है. इसके मद्देनजर महागठबंधन, खासकर राजद को अपने आधार वोटबैंक को लेकर नए सिरे से रणनीति बनानी होगी. 

ठाकुर यह भी कहते हैं कि इस परिणाम से स्पष्ट है कि समाज में तीखापन बढ़ा है और कट्टरता की ओर रुख दिख रहा है. उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समाज पहले राजद को भाजपा के विकल्प के तौर देखती थी, लेकिन राजद के कमजोर पड़ने के बाद इस समाज का रुख ओवैसी की पार्टी की ओर हुआ है. 

किशनगंज में कांग्रेस ने विधायक से सांसद बने मोहम्मद जावेद की मां सईदा बानो को उम्मीदवार बनाया था. सीमांचल के कई विधानसभा क्षेत्र अल्पसंख्यक मतदाता बहुल हैं. 

एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान कहते हैं कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम बिहार की सभी 243 सीटों पर लड़ेगी. 

उन्होंने कहा, "फिलहाल यह पार्टी के लिए जनाधार का पता लगाने और उसका विस्तार करने का समय है. जैसा कि आमतौर पर माना जाता है, हम सिर्फ मुसलमानों की पार्टी हैं, मगर यह सही नहीं है. हम दलितों और गरीबों का भी प्रतिनिधित्व करते हैं."

वैसे, भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह एआईएमआईएम की जीत को बिहार के लिए सही नहीं मानते हैं. 

अपने बयानों से चर्चा में रहने वाले सिंह ने शुक्रवार को बिहार के लोगों को सचेत करते हुए ट्वीट किया, 'बिहार के उपचुनाव में सबसे खतरनाक परिणाम किशनगंज से उभरकर आया है. ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम जिन्ना की सोच वाले हैं, ये वंदे मातरम से नफरत करते हैं. इनसे बिहार की सामाजिक समरसता को खतरा है. बिहारवासियों को अपने भविष्य के बारे में सोचना चाहिए.' (इनपुट IANS से भी)