कैमूर: CM नीतीश का बड़ा ऐलान, कहा- बारिश से बर्बाद हुए धान का मुआवजा देगी सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि आकलन के बाद हर किसान को मदद दी जाएगी. उन्होंने कहा कि यही जो जलवायु परिवर्तन का असली असर है, जब बारिश होनी चाहिए, तब नहीं होती है और जब नहीं होनी चाहिए, तब बारिश होती है.

कैमूर: CM नीतीश का बड़ा ऐलान, कहा- बारिश से बर्बाद हुए धान का मुआवजा देगी सरकार
सीएम ने कहा कि आकलन के बाद हर किसान को मदद दी जाएगी.. (तस्वीर साभार-@IPRD_Bihar)

कैमूर: तीन दिनों में हुई बेमौसम बारिश से धान की फसल को हुए नकुसान का मुआवजा सरकार किसानों को देगी. इसकी घोषणा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने की है. जल जीवन हरियाली यात्रा के तहत मुंडेश्वरी धाम परिसर में हुई जागरूकता सभा मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा की. उन्होंने कहा कि आपदा विभाग आकलन करके नुकसान की भरपाई करेगा.

दरअसल, पिछले 5 दिनों में जिस तरह से बेमौसम बारिश हुई है. उससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है. खेतों और खलिहानों में पड़ी धान की फसल नष्ट हुई है. इसका मुद्दा खान एवं भूतत्व मंत्री बृज किशोर बिंद ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने उठाया. मंत्री ने कहा कि किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है, तो मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद आपदा प्रबंधन विभाग के आयुक्त संजय अग्रवाल को बारिश से खराब हुई फसल का आकलन करवाने का निर्देश दिया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि आकलन के बाद हर किसान को मदद दी जाएगी. उन्होंने कहा कि यही जो जलवायु परिवर्तन का असली असर है, जब बारिश होनी चाहिए, तब नहीं होती है और जब नहीं होनी चाहिए, तब बारिश होती है.

सीएम नीतीश ने कहा है कि राज्य सरकार ने इस साल आपदा पीड़ितों के बीच 2230 करोड़ की राशि अब तक बांटी है, जो सीधे 41.50 लाख लोगों के खातों में गई है. इसके अलावा कृषि इनपुट सब्सिडी अलग से दी जाएगी और बारिश से जो नुकसान हुआ है, उसकी मरम्मत में जो लागत आएगी, वो अलग है.

उनेहोंने कहा कि जब से हम लोगों ने काम संभाला है, तब ही कहा था कि राज्य के खजाने पर आपदा पीड़ितों का पहला हक है और उसी के तहत 2007 और 2008 में जिस तरह से त्रासदी आयी थी, उसमें मदद की. लोगों को सरकार की ओर से मदद मिलने लगी. इससे पहले सरकारी मदद कहां मिलती है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का मकसद है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हो रही समस्याओं का कम से कम असर बिहार में पड़े. उसी को देखते हुए जल जीवन हरियाली अभियान शुरू किया गया है, जिसे तीन साल में पूरा किया जाएगा.