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मेडिकल कॉलेज में हो सभी सुविधाएं, इलाज के लिए किसी को बाहर ना जाना पड़े- नीतीश कुमार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि हमारी सरकार ऐसी व्यवस्था कर रही है, जिसमें सभी बीमारियों का इलाज राज्य में ही हो सके. मुख्यमंत्री ने कहा कि अब पीएचसी स्तर पर हर माह 10 हजार से ज्यादा मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं.

मेडिकल कॉलेज में हो सभी सुविधाएं, इलाज के लिए किसी को बाहर ना जाना पड़े- नीतीश कुमार
हार के सभी मेडिकल कॉलेजों में इलाज के लिए जरूरी सभी सुविधाएं और मशीनें लगाई जाएगी.

पटना: बिहार के पटना के अधिवेशन भवन में स्वास्थ्य विभाग 182 योजनाओं के शिलान्यास और उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बिहार के सभी मेडिकल कॉलेजों में इलाज के लिए जरूरी सभी सुविधाएं और मशीनें लगा दें, ताकि किसी व्यक्ति को मजबूरी में बिहार के बाहर इलाज के लिए नहीं जाना पड़े. 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि हमारी सरकार ऐसी व्यवस्था कर रही है, जिसमें सभी बीमारियों का इलाज राज्य में ही हो सके. मुख्यमंत्री ने कहा कि अब पीएचसी स्तर पर हर माह 10 हजार से ज्यादा मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं. 2005 में ये संख्या सिर्फ 39 थी. 2006 में सरकार की ओर से मुफ्त दवाएं देने की योजना शुरू की गयी थी, जिसका लाभ राज्य की बडी आबादी को मिला है.

 

सीएम ने कहा कि सिर्फ इलाज से काम नहीं होगा, इसके साथ स्वस्थ्य समाज के लिए और कई काम करने होंगे, जिसमें जनसंख्या नियंत्रण मुख्य है. अगर शिक्षा का प्रसार हो जाए, तो जनसंख्या पर अपने आप लगाम लग जायेगी. मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों से निजी प्रेक्टिस के साथ सरकारी काम करने का भी अनुरोध किया.

साथ ही नीतीश कुमार ने निजी प्रैक्टिस पर कहा, 'डॉक्टर लोग निजी प्रेक्टिस करें, इसमें हमें किसी तरह की समस्या नहीं है, लेकिन सरकारी काम में किसी तरह की कोताही नहीं करें. हम मीडिया के साथियों से अनुरोध करेंगे, आप हमारे खिलाफ जितना मन हो चलाइये, लेकिन हम जो समाज सुधार के काम कर रहे हैं, इनको भी दिखाइये, ताकि लोगों में जागरूकता फैले.

मुख्यमंत्री ने आम लोगों के साथ मीडिया से भी समाज सुधार के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार में सहयोग मांगा और कहा कि आप लोग मेरे खिलाफ चाहे, जितना हो दिखाइये, लेकिन समाज के हित के काम को भी जगह दीजिए. वहीं, डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने कहा कि कालाजार की बीमारी 2020 तक बिहार से खत्म हो जायेगी, तो टीबी के खात्मे का लक्ष्य 2025 रखा गया है.

साछ दुनिया में कालाजार के जितने रोगी हैं, उसके 80 फीसदी रोगी भारत में हैं और भारत में जितने रोगी हैं, उनके 80 फीसदी बिहार में हैं. बिहार में 2015 के बाद से अब तक किसी की मौत कालाजार से नहीं हुई है. पहले 205 प्रखंडों में इसका प्रकोप था, अब 35 प्रखंडों में इसका असर रह गया है. कालाजार के मरीज को 6 हजार रुपये इलाज के लिए दिये जाते हैं. उसके अटेंडेंट को 600 रुपये की मदद सरकार की ओर से दी जा रही है. 2020 तक बिहार से कालाजार का उन्मूलन हो जाए, इसका लक्ष्य रखा गया है.

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने स्वास्थ्य विभाग की ओर से किए जा रहे कामों की जानकारी दी और कहा कि हम लगातार सुधार की ओर बढ़ रहे हैं. पीएमसीएच को वर्डक्लास बनाने के लिए अगले दो-तीन में टेंडर हो जाएगा.