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बिहार : वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व में बढ़ी बाघों की तादाद, पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा

2010 से विश्व में हर वर्ष 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के रूप में मनाया जाता है. बिहार में इस वर्ष इसका आयोजन पटना स्थित संजय गांधी जैविक उद्यान में किया गया. 

बिहार : वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व में बढ़ी बाघों की तादाद, पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा
बिहार में बढ़ी बाघों की संख्या. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पटना : अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टेटस ऑफ टाइगर इन इंडिया रिपोर्ट देश के सामने रखी. बिहार में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया गया. राज्य में बाघों की बढ़ती संख्या से वन एवं पर्यावरण मंत्री और बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी काफी खुश दिखे. आने वाले दिनों में बाघों का आंकड़ा और बेहतर होने की उम्मीद भी उन्होंने जगायी. 

2010 से विश्व में हर वर्ष 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के रूप में मनाया जाता है. बिहार में इस वर्ष इसका आयोजन पटना स्थित संजय गांधी जैविक उद्यान में किया गया. जैविक उद्यान में फिलहाल छह बाघ हैं, लेकिन इन बाघों को छोड़कर बिहार के वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में 2018 की गणना के अनुसार 31 बाघ मौजूद हैं.

2008 में वीटीआर में बाघों की संख्या मात्र आठ रह गई थी. 2014 में इसकी संख्या 25 से 31 के बीच, यानी औसत 28 आंकी गई. 2018 में इसकी संख्या बढ़कर 26 से 37 हो गई, यानी औसत 31.

अब बाघों की गणना आधुनिक तकनीक से की जाती है. इसके लिए कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का भी उपयोग किया जाता है. इसलिए गणना सही आता है. बिहार को देश में बाघों के संरक्षण को लेकर पांचवा स्थान मिला है, तय मानक के अनुसार बिहार को 75.78 फीसदी अंक मिले. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने इसको लेकर संतोष जताया है.

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के मौके पर सुशील कुमार मोदी ने वीटीआर के लिए नया लोगो जारी किया है. पर्यटन के लिहाज से वीटीआर घूमने आने वाले पर्यटकों की संख्या पर संतोष जताते हुए आने वाले वर्षों के लिए नया लक्ष्य तय किया गया है.   

2017-18 में बाल्मीकि नगर टाइगर रिज़र्व में मात्र 10467 पर्यटक आये थे. 2018-19 में इसकी संख्या 45425 पहुंच गई. 2019-20 में इसका लख्या एक लाख रखा गया है. इसके लिए कई प्रयास किये जा रहे है. सुशील कुमार मोदी ने कहा कि 2022 तक बाघों की संख्या का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन भारत ने यह लक्ष्य तय समय से चार वर्ष पहले ही पूरा कर लिया. उन्हेंने उम्मीद जताई है कि 2022 की गणना में बाघों की संख्या में बेहतर वृद्धि दर्ज होगी. अभी जो आंकड़े उपलब्ध हुए हैं इसमें शिशु बाघ की संख्या को नहीं जोड़ा गया है.

सुशील कुमार मोदी ने उम्मीद जताई है कि देश में बिहार को बाघों के संरक्षण के मामले में पांचवा स्थान तब हासिल हुआ है जब वीटीआर में गार्ड और अन्य सुविधाएं पर्याप्त मात्रा में नहीं थे. अब सुविधा और साधन बढ़ाए गए हैं. इसके बेहतर परिणाम की उम्मीद की जा रही है. साथ ही लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है.

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