मधेपुरा: 11 साल तक घर बैठकर लेते रहे सैलरी, खबर दिखाने के बाद शुरू हुआ OPD

प्रशासन के आदेश के बाद करीब 69 चिकित्सकों ने सदर अस्पताल में अपना योगदान दिया. इस दौरान युवाओं ने चिकित्सकों को गुलाब भेंट कर उनका स्वागत किया.

मधेपुरा: 11 साल तक घर बैठकर लेते रहे सैलरी, खबर दिखाने के बाद शुरू हुआ OPD
मधेपुरा सदर अस्पताल में ओपीडी सेवा की शुरुआत.

शंकर कुमार, मधेपुरा: बिहार के मधेपुरा में 11 वर्षों के बाद मेडिकल कॉलेज (Madhepura Medical College) से संबद्ध रखने वाले सदर अस्पताल में ओपीडी की शुरुआत हुई है. अब तक बीते 11 वर्षों से बिना इलाज के ही घर बैठे मेडिकल कॉलेज में पदस्थापित चिकित्सकों को वेतन के मद में लगभग आठ करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया है. इस मामले में जी मीडिया (Zee Bihar Jharkhand) की खबर का असर हुआ है. खबर पर संज्ञान लेचे हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने 24 घंटे के अंदर सभी चिकित्सकों को सदर अस्पताल में योगदान का सख्त आदेश जारी किया है. 

प्रशासन के आदेश के बाद करीब 69 चिकित्सकों ने सदर अस्पताल में अपना योगदान दिया. इस दौरान युवाओं ने चिकित्सकों को गुलाब भेंट कर उनका स्वागत किया. जनअधिकार छात्र परिषद के नेताओं ने कहा कि मीडिया के दबाव में ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन हरकत में आया. आज चिकित्सक अपना-अपना योगदान दे रहे हैं.

वहीं, इस दौरान मेडिकल कॉलेज में पदस्थापित चिकित्सक डॉ. एचपी दुबे ने कहा कि कुछ टेक्निकल कारणों से अब तक जननायक मेडिकल कॉलेज का ओपीडी शुरू नहीं हो सका था, लेकिन अब ओपीडी शुरू होने के बाद मेडिकल कॉलेज की स्थिति में सुधार होगा. 

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2007 में मधेपुरा में जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की थई. घोषणा के बाद इसका निर्माण कार्य एलएनटी कंपनी को सौंपा गया था. 2014 में काम प्रारंभ भी हुआ. हालांकि वर्ष 2016 तक इसे पूरा करना था, लेकिन आज तक यह अधूरा ही है. जबकि एक साथ हुई घोषणा के बाद बेतिया के पावापुरी मेडिकल कॉलेज शुरू हो गया. पहला बैच भी पासआउट हो गया.

काफी जद्दोजहद के बाद 11 साल बाद मेडिकल कॉलेज के संबद्ध सदर अस्पताल ओपीडी की शुरुआत हुई है. बता दें कि अब तक पिछले 11 वर्षों से बिना इलाज किये ही घर बैठे मेडिकल कॉलेज में पदस्थापित चिकित्सकों के वेतन के मद में लगभग आठ करोड़ से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है. 

इस खबर को जी मीडिया ने प्रमुखता से सात नवंबर को अपने चैनल पर दिखाया था. खबर का बड़ा असर हुआ. हरकत में आये मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने 24 घंटों के अंदर सभी चिकित्सकों को संबद्ध सदर अस्पताल मधेपुरा में योगदान हेतु सख्त आदेश दिया. आदेश के बाद करीब 69 चिकित्सकों ने सदर अस्पताल में अपना योगदान दिया.