झारखंड में नेता प्रतिपक्ष को लेकर उलझा पेंच, बजट सत्र में खाली रह सकती है कुर्सी

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र की तैयारी को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने सभी विधायक दल नेताओं की बैठक बुलाई. बैठक में बीजेपी शामिल नहीं हुआ. इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि हमने सभी दलों को पत्र भेजा था. बीजेपी के दल में कुछ घटनाक्रम हुआ है. 

झारखंड में नेता प्रतिपक्ष को लेकर उलझा पेंच, बजट सत्र में खाली रह सकती है कुर्सी
झारखंड में नेता प्रतिपक्ष को लेकर उलझा पेंच, बजट सत्र में खाली रह सकती है कुर्सी. (फाइल फोटो)

रांची: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष को लेकर पेंच उलझ गया है. बजट सत्र में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी खाली रहने तक के आसार नजर आने लगे हैं. यह सारा पेंच झारखंड विकास मोर्चा पर अधिकार को लेकर पनपे विवाद के बाद उलझा है. 

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र की तैयारी को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने सभी विधायक दल नेताओं की बैठक बुलाई. बैठक में बीजेपी शामिल नहीं हुआ. इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि हमने सभी दलों को पत्र भेजा था. बीजेपी के दल में कुछ घटनाक्रम हुआ है. उनकी तरफ से सीपी सिंह का भी पत्र मिला है, कि वह बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे.

जब विधानसभा से चिठ्ठी गई, तब उनके यहां विधायक दल के नेता का चयन नहीं हुआ था. अब कुछ घटनाक्रम के कारण सीपी सिंह ने बैठक में आने में असमर्थता जताई है. ऐसे में गलती हमारी कैसे. 

नेता प्रतिपक्ष के सवाल पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा, संविधान में नियम कानून है. तमाम चीजों का अध्ययन होगा. अध्ययन के बाद ही उचित निर्णय होगा. अध्ययन में थोड़ा वक्त तो लगेगा. जो भी विषय है उस पर बिना कानूनी पहलू के अध्ययन किए, कुछ भी नहीं बोलूंगा

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा अध्यक्ष के पास तो पत्र कोई भी भेज सकता है, पर क्या अध्यक्ष पत्र के आधार पर ही निर्णय लेगा या विषय वस्तु का अध्य्यन करेगा. दरअसल, झारखंड में जेवीएम प्रमुख बाबूलाल मरांडी के बीजेपी में विलय के बाद उन्हें विधायक दल का नेता भी चुन लिया गया. इसके बाद यह लगभग तय हो गया था कि उन्हें सदन में विपक्ष का नेता बनाया जाएगा. 

लेकिन समस्या की जड़ जेवीएम पर हक को लेकर प्रदीप यादव और बंधु तिर्की के दावे तक पहुंच जाता है. प्रदीप यादव और बंधु तिर्की ने कांग्रेस के साथ विलय का फैसला ले लिया है. अब इस बात पर विवाद शुरू हो गया है कि जेवीएम का विलय मरांडी के साथ-साथ बीजेपी में मानी जाए या फिर प्रदीप-बंधु तिर्की के साथ कांग्रेस में ?