बिहार: सोनिया गांधी की बैठक में शामिल हुए तेजस्वी, कहा- विपक्ष केंद्र पर बनाए दबाव

तेजस्वी ने कहा कि, यूपीए की मनरेगा और भोजन के अधिकार जैसी योजनाओं को हमें आक्रामक तरीके से प्रचारित करना होगा.

बिहार: सोनिया गांधी की बैठक में शामिल हुए तेजस्वी, कहा- विपक्ष केंद्र पर बनाए दबाव
बिहार: सोनिया गांधी की बैठक में शामिल हुए तेजस्वी, कहा- विपक्ष केंद्र पर बनाए दबाव.

पटना: कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने शुक्रवार को 22 विपक्षी दलों की मीटिंग बुलाई थी. इस मीटिंग में बिहार विधानसभा (Bihar Vidhansabha) में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए. इस दौरान तेजस्वी यादव ने कई बिंदुओं को उठाया.

'विपक्ष केंद्र पर दबाव बनाए'
तेजस्वी ने कहा, 'केंद्र सरकार द्वारा घोषित राशि या योजनाओं में गरीबों को तात्कालिक राहत की कोई व्यवस्था नहीं है. इस सिलसिले में विपक्षी दलों को मिलकर सरकार पर दवाब बनाना चाहिए कि, गैर-आयकर वर्ग के सभी परिवारों को आगामी छह महीने तक 7500-8000 की दर से सीधे कैश ट्रांसफर किया जाए. इससे आपदा की मार से लड़ने में इन परिवारों को थोड़ी वास्तविक राहत का अहसास हो.'

'रघुराम राजन की बात केंद्र को मानना चाहिए'
उन्होंने कहा कि, अगर सरकार चंद पूंजीपतियों के 68000 करोड़ माफ कर सकती है तो, आरबीआई (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) कि गरीबों को 65000 करोड़ के जरिए मदद करने की बात क्यों नहीं मान सकती है.

'प्रवासियों को घर पहुंचाने की व्यवस्था लचर'
आरजेडी नेता ने कहा, 'राशनकार्ड हो या ना हो तमाम गरीब परिवारों को 25 किलो चावल/आटा, दाल आने वाले छह महीनों तक मुफ्त मुहैय्या कराया जाए. इससे भोजन के संकट को खत्म करने में सहायता होगी.' इसके साथ ही, प्रवासी मजदूरों के घर तक पहुचाने की व्यवस्था अब तक लचर रही है.

'मजदूरों की स्थिति के लिए BJP जिम्मेदार'
उन्होंने कहा कि, विपक्ष सरकार से साझा आग्रह करें कि, देश के अलग-अलग राज्यों में फंसे मजदूरों को नीयत समय में उनके घरों तक पहुंचाया जाए. चूंकि अभी रेलवे ट्रैक लगभग खाली हैं तो अधिक क्षमता में ट्रेनें चलाईं जाएं. तेजस्वी ने कहा कि, बिहार के प्रवासी मजदूरों की खास तौर पर भयावह स्थिति है. प्रवासी मज़दूरों के दयनीय हालात के लिए एनडीए (NDA) ज़िम्मेदार है्. गरीब विरोधी बीजेपी सरकार द्वारा प्रवासी मज़दूरों को दोयम दर्जे का नागरिक समझा गया है.

'श्रमिकों को रोटी की जगह लाठी मिली'
आरजेडी नेता ने कहा कि, बिहारी मजदूरों के साथ दुर्व्यवहार हुआ है. जहां उन्हें रोटी मिलनी चाहिए थी, वहां उन्हें लाठी मिली. अगर बिहारी श्रमवीर बिहार से बाहर नहीं निकलेंगे तो, देश की अर्थव्यवस्था ठप्प हो जाएगी. हमें बिहार में इंडस्ट्री-उद्योग धंधे लगाने होंगे. यह हमारा प्रमुख एजेंडा होगा.

'बिहार को कुछ नहीं मिला'
उन्होंने कहा कि, नोटबंदी की तरह कोरोना काल में भी इस सरकार के सभी निर्णय गलत हुए हैं. बिहार को कुछ नहीं मिला. यूपीए एक में लालू यादव के सहयोग से कोसी बाढ़ में बिहार के 4-5 ज़िलों को ही 1100 करोड़ मिला था. अभी विगत 4-5 वर्ष से बाढ़ आ रहा है, लेकिन बिहार को मुश्किल से 200 करोड़ ही मिला है. केवल घोषणा होती है मिलता कुछ नहीं हैं.

MNREGA का आक्रमक तरीके से करें प्रचार
तेजस्वी यादव ने कहा कि, यूपीए सरकार में बाढ़ के दौरान लालू जी ने नागरिकों के लिए मुफ़्त रेल चलाई थी. लेकिन महामारी में अब किराया वसूला जा रहा है. यूपीए की मनरेगा (MNREGA) और भोजन के अधिकार जैसी योजनाओं को हमें आक्रामक तरीके से प्रचारित करना होगा. विपक्ष को सरकार से ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों रोजगार सृजन की पुरजोर मांग करनी होगी.

'श्रम कानून में बदलाव की कोशिश'
उन्होंने कहा कि, इसी महामारी के बीच श्रम कानूनों में बदलाव की कोशिशे भी की जा रही हैं. मैं अपने दल की और से आप सबसे अपील करता हूं कि, हम सबको मिलकर इसका हर स्तर पर विरोध करना चाहिए. श्रम कानूनों में बदलाव श्रमिकों की सुरक्षा, उनकी गरिमा और उनके अधिकारों पर हमला है. बिना संसद में चर्चा के इस तरह का कोई भी बदलाव संविधान के मर्म के साथ छेड़छाड़ है और हमें इसका पुरजोर विरोध करना चाहिए.