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बिहार में पैकेट बंद दूध गुणवत्ता के पैमाने पर हुए फेल, जांच में हुआ खुलासा

फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट्स की ओर से पूरे बिहार से पाउच वाले दूध के सैंपल लिए गए थे. इन दूध की जांच दो तरह से की गई. एक केमिकली और दूसरी माइक्रो बायोलॉजिकली. 

बिहार में पैकेट बंद दूध गुणवत्ता के पैमाने पर हुए फेल, जांच में हुआ खुलासा
दूध की गुणवत्ता के जांच के क्रम में इस बात का खुलासा हुआ

पटना: अगर आप बिहार में पाउच वाले दूध का इस्तेमाल करते हैं, तो जरा संभल जाईए, क्योंकि हाल ही फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट की ओर से की गई पड़ताल में ब्रांडेड कंपनियों के पाउच वाले दूध माइक्रो बायोलॉजिकल फेल पाए गए हैं.

दूध की गुणवत्ता के जांच के क्रम में इस बात का खुलासा हुआ है. जिसके बाद लोगों की सेहत पर मंडरा रहे खतरे को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
  
असल में फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट्स की ओर से पूरे बिहार से पाउच वाले दूध के सैंपल लिए गए थे. इन दूध की जांच दो तरह से की गई. एक केमिकली और दूसरी माइक्रो बायोलॉजिकली. 

केमिकल के टेस्ट में सभी दूध पास हो गए, यानी दूध में केमिकल नहीं मिला. लेकिन माइक्रो बायोलॉजिकल टेस्ट में सभी पाउच वाले दूध फेल हो गए, यानी दूध में बैक्टीरियल और वायरल जीवाणु पाए गए. जबकि पाश्चराइज्ड दूध में इस तरह की गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए थी.
 
पटना और भोजपुर जिले के फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर अजय कुमार की मानें तो, दो ही ब्रांडेड कंपनियों के दूध सही पाए गए हैं, जो टेट्रा पैक में बाजार में उपलब्ध हैं. लेकिन पाउच में आने वाले सभी दूध माइक्रो बायोलॉजिकल रुप से गड़बड़ पाए गए.

उन्होंने कहा कि ऐसी तमाम कंपनियों को गुणवत्ता में सुधार के लिए नोटिस भी दिया गया है. फूड इंस्पेक्टर ने बताया कि कई बार जांच के क्रम में उन्हें दूध में डिटर्जेंट के अंश मिले हैं.

इतना ही नहीं दूध में हायड्रोजन पेरॉक्साईड के भी अंश पाए गए हैं, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक है. साथ ही दूध की जांच में अफलाटॉक्सिन एम जीवाणु भी पाए गए हैं. जो आमतौर पर जानवर को खराब चारा खिलाने के कारण दूध में आ जाता है.   
 
पटना में पैकेट दूध का इस्तेमाल करने वाले आम लोग भी मानते हैं कि पैकेट वाले दूध का स्वाद बेहद अलग होता है. इतना ही नहीं, एक पैकेट वाले दूध का स्वाद दूसरे ब्रांड की कंपनियों से भी अलग पाया जाता है. जबकि दूध दूध होता है और उसके स्वाद में अतंर की बात बिलकुल सही नहीं है.

इधर बिहार सरकार के कृषि एवं पशुपालन मंत्री डॉ प्रेम कुमार सरकारी एजेंसी कॉम्फेड के माध्यम से चलने वाली संस्था सुधा के दूध में गड़बड़ी की बात से साफ इनकार किया हैं. प्रेम कुमार की मानें तो, कम्फेड ग्रामीण स्तर पर दूध संकलन के समय ही मशीन के जरिए दूध की गुणवत्ता की जांच कर लेती है.

इसके अलावा बाजार में आने से पहले दूध का तीन बार जांच किया जाता है. हलांकि फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट के अधिकारियों की ओर से किए गए जांच में गडबडी पर कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में कुछ प्राईवेट कंपनियां भी पैकेट बंद दूध बेच रही हैं. वहां होने वाली गड़बड़ी को माना जा सकता है. लेकिन ऐसी कंपनियों को बिजनेस के नाम पर गड़बड़ी की इजाजत नहीं दी जा सकती है.

उन्होंने कहा कि लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ का अधिकार किसी को नहीं है, ऐसी कंपनियों पर कार्रवाई होनी चाहिए.