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लोकसभा चुनाव हारने के बाद पप्पू यादव ने सरकारी बंगले को किया खाली, चला रहे थे सेवा आश्रम

 पप्पू यादव लोकसभा चुनाव 2019 में बिहार का मधेपुरा सीट से हार जाने के बाद पप्पू यादव को नई दिल्ली का सरकारी बंगला खाली करना पड़ा. 

 लोकसभा चुनाव हारने के बाद पप्पू यादव ने सरकारी बंगले को किया खाली, चला रहे थे सेवा आश्रम
पप्पू यादव ने कहा कि ये पल मेरे लिए बहुत पीड़ादायक है.

विकास चौधरी, नई दिल्ली: जन अधिकार पार्टी के संयोजक पप्पू यादव पिछले पांच साल से दिल्ली स्थित अपने सरकारी बंगले में एक सुभाष चंद्र बोस नाम से सेवा आश्रम चला रहे थे. जिसमें बिहार समेत पूरे देश के गरीब और जरूरतमंद लोग आकर फ्री में रहते थे और साथ ही उनका इलाज, खाना पीना, दवा सभी तरह की जिम्मेदारी पप्पू यादव उठाते थे. लेकिन पप्पू यादव लोकसभा चुनाव 2019 में बिहार का मधेपुरा सीट से हार जाने के बाद पप्पू यादव को नई दिल्ली का सरकारी बंगला खाली करना पड़ा. 

पप्पू यादव ने कहा कि ये पल मेरे लिए बहुत पीड़ादायक है कि दिल्ली में सेवाश्रम में रह रहे सभी मरीजों का आशियाना छीन गया. इसे मैंने और रंजीत रंजन जी ने बड़े जतन से बनाया था, जहां बिहार समेत पूरे देश के गरीब और जरूरतमंद लोग आसरा पाते थे. दिल्ली में मेरी हर सुबह और शाम सेवाश्रम में रह रहे मरीजों और उनके परिजनों के साथ गुजरती थी, लेकिन अब यह संभव नहीं हो सकेगा. पप्पू यादव ने कहा जब मैंने यहां रह रहे लोगों से सेवाश्रम खाली करने की बात से अवगत कराया तो सभी मायूस हो गए थे, लेकिन उससे ज्यादा गहरा दुख मुझे हो रहा है. मैं ये बता नहीं सकता कि सेवाश्रम का बिखरना कितना मुश्किल है. 

 

आपको बता दें कि पप्पू यादव ने आश्रम में रह रहें लोगों से वादा किया कि वो सेवा आश्रम फिर से स्थापित करेंगे. उन्होंने कहा कि बस वक़्त चाहिए. जिनका इलाज अभी भी चल रहा था. उनका ठिकाना क्‍या होगा और हम कहां रहेंगे. अभी तक कुछ नहीं पता. दिल रो रहा है. समझ में नहीं आ रहा मैं क्‍या करूं. संख्‍या बहुत ज्‍यादा है. सेवाश्रम में रहे लोगों को अभी तक हमारी सेवा औऱ समर्पण में अगर कोई शिकायत रही हो तो मैं हाथ जोड़ कर आप सभी से क्षमा मांगता हूं. 

उन्होंने कहा कि सेवाश्रम, आपका था. मैं तो बस सेवक की तरह रंजीत रंजन जी के साथ मिलकर हर वक़्त आपकी सेवा में लगा रहता था. मेरे खुद के लिए भी कोई आशियाना नहीं है. यह दोनों मेरे लिए आज सबसे ज्यादा जरूरी है. दोनों मेरी जिंदगी में सबसे महत्वपूर्ण है. अब मुझे अपने लिए भी छत तलाश करनी है और सेवाश्रम के लिए.