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झारखंड: डिजिटल युग में भी बिना नेटवर्क का है यह गांव, बात करने पहाड़ी पर जाना पड़ता

सरकार देश के सभी गांवों को डिजिटल करने का सपना देख रही है, लेकिन परसोडीह के लोगों को जब मोबाइल पर बात करने की इच्छा होती है तो उन्हें गांव की पहाड़ी पर चढ़ना होता है, फिर नेटवर्क काम करता है.

झारखंड: डिजिटल युग में भी बिना नेटवर्क का है यह गांव, बात करने पहाड़ी पर जाना पड़ता
पहाड़ी पर जाकर मिलता है सिग्नल.

चंदन कश्यप, गढ़वा: आज के युग में मोबाइल के बिना जिंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती. गांव हो या गरीब, शहर हो या साधन संपन्न, सब के हाथ में मोबाइल नजर आ जाता है. लोग पल-पल दिन-दुनिया से जुड़ने के लिए मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं. अब तो मोबाइल पर इंटरनेट का इस्तेमाल भी हर जगह धड़ल्ले से होता है. मतलब, मोबाइल के बिना आज की जिंदगी अधूरी है. लेकिन, इस डिजिटल युग में झारखंड के गढ़वा जिले में एक ऐसा भी गांव है, जहां लोगों के हाथों में मोबाइल तो दिखता है, लेकिन गांव में मोबाइल का नेटवर्क नहीं पहुंचता है.

यह अनूठे गांव का नाम है परसोडीह, जो विधायक भानु प्रताप शाही का गृह पंचायत भी है. सरकार देश के सभी गांवों को डिजिटल करने का सपना देख रही है, लेकिन परसोडीह के लोगों को जब मोबाइल पर बात करने की इच्छा होती है तो उन्हें गांव की पहाड़ी पर चढ़ना होता है, फिर नेटवर्क काम करता है.

आलम यह है कि इस गांव को पिछड़ा मानकर लोग अपने बच्चों की रिश्तेदारी परसोडीह गांव में करने से मुंह मोड़ते हैं. अपना दर्द बयां करते हुए वार्ड पार्षद धर्मेन्द्र कहते हैं कि आज पूरे पंचायत का मोबाइल नेटवर्क से कटा होना, मुसीबत का सबब बन गया है. गांव के लड़के और लड़कियों की शादी नहीं हो रही है. कोई पंचायत में शादी नहीं करना चाहता. लोग कहते हैं कि गांव जब मोबाइल नेटवर्क से ही नहीं जुड़ा तो हम भला रिश्ता क्यों जोड़ें. 

गांव के इस पिछड़ेपन के लिए लोग जन प्रतिनिधियों को भी जिम्मेदार मानते हैं. उनका कहना है कि चुनाव में हर नेता परसोडीह को मोबाइल नेटवर्क से युक्त करने की बात तो करता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वादे भुला दिए जाते हैं और गांव मोबाइल नेटवर्क विहीन रह जाता है. अपनी इस मुसीबत से परेशान लोगों ने अगले विधानसभा चुनाव में वोट बहिष्कार का फैसला किया है.

एक स्थानीय युवक का कहना है कि अपने विधायक-सांसद से ग्रामीण बार-बार इस समस्या से निजात दिलाने की गुहार लगाते हैं. लेकिन अबतक किसी जनप्रतिनिधि ने इस समस्या का समाधान करना तो दूर इस ओर देखना भी मुनासिब नहीं समझा. दशकों से मोबाइल नेटवर्क से बाहर चल रहा यह इलाका नेटवर्क क्षेत्र में आने की आस देख रहा है. लोगों को उस घड़ी का इंतजार है, जब इलाके में मोबाइल नेटवर्क काम करना शुरू करे ताकि एक तरफ नेटवर्क के लिए ऊंचे पहाड़ पर चढ़ने से छुटकारा मिले, साथ ही गांव में शादियों की शहनाई भी बज सके. 

-- Dharmendra Mani Rajesh, News Desk