रांची: विधानसभा चुनाव को लेकर बढ़ा सियासी पारा, सभी जनता को अपने पक्ष में करने में जुटे

राज्यसभा सदस्य और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा है कि झारखंड गठन के बाद यहां मजबूत बहुमत की सरकार न होने के कारण विकास कार्य करना सहज नहीं था.

रांची: विधानसभा चुनाव को लेकर बढ़ा सियासी पारा, सभी जनता को अपने पक्ष में करने में जुटे
विपक्षी दल भी पूरे रणनीति के साथ अपनी पूरी ताकत लगा रहा है.

रांची: झारखंड में विधानसभा चुनाव होने में महज कुछ हीं दिन बचे हैं लेकिन सूबे का सियासी पारा काफी चढ़ चुका है. एक तरफ जहां बीजेपी मिशन 65 प्लस के सहारे दुबारा सत्ता हांसिल करने में जुटी है वहीं, विपक्षी दल भी पूरे रणनीति के साथ अपनी पूरी ताकत लगा रहा है.

झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों कमर कसकर मैदान में उतर चुकी है. एक तरफ जहां बीजेपी मुख्यमंत्री जन आशीर्वाद यात्रा के सहारे सूबे की जनता तक सरकार की उपलब्धियों को पहुंचाने की कोशिश में जुटा है. वहीं, दूसरी तरफ विपक्षी दल अलग-अलग यात्रा और रैलियों के सहारे जनता को अपने पक्ष में करने में जुटी है.

बीजेपी के कई बड़े नेताओं का दौरा लगातार जारी है. राज्यसभा सदस्य और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा है कि झारखंड गठन के बाद यहां मजबूत बहुमत की सरकार न होने के कारण विकास कार्य करना सहज नहीं था.

उन्होंने कहा कि चाहे हमारी भी सरकार रही हो. झारखंड यूएनडीपी रिपोर्ट में तेजी से गरीबी उन्मूलन करने वाले राज्य में तेजी से ऊपर आया है. विपक्षियों, खास कर जेएमएम पर निशाना साधते हुए कहा कि इस राज्य को बेचने का काम जेएमएम ने किया जो कि इतिहास में दर्ज है. परिवारवाद का भी जिक्र करते हुए कहा कुछ राजनीतिक दल अपना जागीर समझ लिए हैं. इस बार फिर बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है इसका भी दावा किया. 

वहीं, सांसद जयंत सिन्हा ने कहा है कि अर्थ व्यवस्था को बेहतर करने के लिए हमलोगों ने जो ठोस कदम उठाए हैं  उससे जल्दी ही एक बार फिर 7 से 8 फीसदी विकास दर देखने को मिलेगा.

वहीं, विपक्षी दलों ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि अब झारखंड की जनता इनके जुमलों में नहीं आने वाली क्योंकि इनके 5 वर्षों के झूठे वादों को जनता ने देख और समझ लिया है फिर से मुख्यमंत्री उसी झूठी दावा के सहारे जनता को बरगलाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन विपक्षी दल एकजुट होकर उनके मंसूबे पर पानी फिरने को तैयार हैं. चाहे जेएमएम कि बदलाव यात्रा हो या महारैली हो या कांग्रेस की जन आक्रोश रैली तमाम विपक्षी दल रणनीति के तहत बीजेपी को इस बार धूल चटाएगी. मिशन 65 के सपने धरे के धरे रह जाएंगे.