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पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश पहुंचे लखीसराय, किया जिला न्यायालय का निरीक्षण

पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अमरेश्वर प्रताप साही ने लखीसराय व्यवहार न्यायालय का निरीक्षण किया.

पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश पहुंचे लखीसराय, किया जिला न्यायालय का निरीक्षण
पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश लखीसराय पहुंचे थे.

लखीसरायः पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अमरेश्वर प्रताप साही ने लखीसराय व्यवहार न्यायालय का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने अधिवक्ताओं की मांगों को सुना. लखीसराय पहुंचने के बाद सबसे पहले चीफ जस्टिस को गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी दी गई. उसके बाद उनके साथ चल रहे जिलाधिकारी शोभेंद्र कुमार चौधरी, एसपी कार्तिकेय के शर्मा, जिला जज मदन मोहन कौशिक एवं व्यवहार न्यायालय के न्यायाधीशों के साथ बैठक की. 

बैठक के बाद उन्होंने बार एसोसिएशन भवन का निरीक्षण किया. इस दौरान अधिवक्ताओं द्वारा गुलदस्ता एवं मोमेंटो देकर स्वागत किया गया. इसके बाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीनिवास सिंह ने उनका स्वागत बुके व अंग वस्त्र देकर किया. साथ ही लखीसराय की पहचान अशोकधाम मंदिर एवं जगदम्बा मंदिर पेंटिंग भेट स्वरूप दिया. 

इस दौरान मंच संचालन जिला विधि संघ के अध्यक्ष श्रीनिवास सिंह कर रहे थे. अधिवक्ताओं ने चीफ जस्टिस को व्यवहार न्यायालय में जरूरी कार्यों की सूची दी. जिसमें पार्किंग, कैंटीन, सुलह केंद्र, पोस्ट ऑफिस, एटीएम, शुद्ध पेयजल व बार असोसिएसन की भूमि हस्तांतरण की बात कही. चीफ जस्टिस ने अधिवक्ताओं को भरोसा दिलाते हुए कहा कि जल्दी पार्किंग, कैंटीन, पोस्ट ऑफिस, एटीएम और शुद्ध पेयजल सहित भूमि हस्तांतरण को लेकर कार्य किया जाएगा.

जिला विधि संघ में अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि लखीसराय न्यायालय में इतने भवन बन गए हैं, यहां की व्यवस्था काफी अच्छी है. इसके अलावा उन्होंने अधिवक्ताओं की मांगे एवं समस्याओं को गंभीरता पूर्वक सुना एवं स्थायी समिति के पास रखकर यथा संभव समाधान करने का आश्वासन अधिवक्ताओं एवं व्यवहार न्यायालय के अधिकारियों को कहा. 

अधिवक्ताओं, न्यायाधीशों से चीफ जस्टिस ने कहा कि बीसवीं सदी के मामलों का त्वरित निपटारा किया जाय. उन्होंने कहा दो-तीने जगह आदमी अपनी मजबूरी में जाता है. अस्पताल, पुलिस स्टेशन और न्यायालय यह तीनों ऐसी जगह है जहां लोग मजबूरी में जाते हैं.

उन्होंने कहा आप उन मजबूर व्यक्तियों की सेवा करते हैं, इसलिए सभ्यता और संस्कृति का विशिष्ट अंग जो न्याय का होता है उसके प्रतिपालक हैं. इसलिए आपकी अहमियत समाज में उस प्रतिष्ठा और गौरव का पात्र है जो समाज को दिशा बोध कराता है.