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पटना नगर निगम का बजट जानकर दंग रह जाएंगे आप, लेकिन मेयर ने जलजमाव पर कहा कुछ ऐसा

 शहर के अधिकतर हिस्सों से पानी उतर चुका है लेकिन पाटलिपुत्र, राजेन्द्रनगर में जलजमाव हैं. इसी बीच पटना की मेयर ने अपना बचाव किया है और जलजमाव की जिम्मेदारी बुडको पर डाल दी है.

पटना नगर निगम का बजट जानकर दंग रह जाएंगे आप, लेकिन मेयर ने जलजमाव पर कहा कुछ ऐसा
पटना की मेयर ने अपना बचाव किया है और जलजमाव की जिम्मेदारी बुडको पर डाल दी है.

पटना: बिहार की राजधानी पटना में बारिश खत्म हुए दस दिन बीत चुके हैं लेकिन बारिश के बाद हुए पैदा हुए हालात लोगों के लिए मुश्किल खड़ी करने वाली हैं. हालांकि शहर के अधिकतर हिस्सों से पानी उतर चुका है लेकिन पाटलिपुत्र, राजेन्द्रनगर में जलजमाव हैं. इसी बीच पटना की मेयर ने अपना बचाव किया है और जलजमाव की जिम्मेदारी बुडको पर डाल दी है.

जिस पटना नगर निगम का बजट 4 हजार करोड़ से ज्यादा का है. आज वहीं के लोग परेशानी का सामना कर रहे हैं. 75 वार्डों में बंटे पटना नगर निगम में जब जलजमाव हुआ तो इसके काम करने के तरीके पर सवाल खड़े होने लगे हैं. ढ़ाई साल से पटना की पहली नागरिक यानि मेयर सीता साहू के पास सवालों के जवाब नहीं हैं. बातचीत में मेयर सीता साहू ने जलजमाव की जिम्मेदारी बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड यानि बुडको के ऊपर डाल दी है.

सीता साहू ने कहा है कि, जलजमाव के हालात संप हाइस के काम नहीं करने की वजह से है. और संप हाउस चलाने और रखरखाव की जिम्मेदारी बुडको पर है. सीता साहू के मुताबिक, संप हाउस की मरम्मती के लिए कई बार पत्राचार बुडको से किया गया लेकिन जवाब नहीं मिला.

दूसरी तरफ पटना के पॉस कॉलोनी में शामिल पाटलिपुत्र कॉलोनी के कई हिस्से पानी में डूबे हैं. बेसमेंट और घरों में भी पानी है. जिससे लोगों को डेंगू और मलेरिया का खतरा होने लगा है. आज बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पटन देवी दर्शन करने पहुंचे. यहां उन्होंने काफी वक्त बिताया लेकिन उन्होंने डेंगू के सवालों का जवाब देना जायज नहीं समझा. 

दूसरी ओर पाटलिपुत्र कॉलोनी में अल्पना मार्केट से पॉलटेक्निक कॉलेज के बीच के हिस्सों में अब भी पानी है. इसी कॉलोनी के अंदर के हिस्सों में अब भी पानी है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, जलजमाव कुछ कम हुआ है लेकिन फॉगिंग और एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं हुआ है. 

ये पटना का दुर्भाग्य कहा जा सकता है कि जिस शहर में सरकार के मंत्री और खुद सरकार रहती है. जहां विकास के नाम पर करोड़ों रूपए खर्च हो रहे हैं लेकिन जिस तरह के हालात हैं उसकी जिम्मेदारी लेने के लिए कोई तैयार नहीं है. गैरजिम्मेदारियों के आलम के बीच अब लोगों को डेंगू और मलेरिया का खतरा डराने लगा है.