पटना नगर निगम पर टूटा वित्तीय संकट का कहर! अधर में कई योजनाएं

पटना नगर निगम के स्थाई समिति के सदस्यों और पार्षदों के मुताबिक, निगम की आर्थिक स्थिति बेहद ही खराब है और पिछले तीन वित्तीय वर्षों में बकाया की करोड़ों राशि नहीं मिली है.

पटना नगर निगम पर टूटा वित्तीय संकट का कहर! अधर में कई योजनाएं
वित्तीय संकट से जूझ रहा है पटना नगर निगम.

पटना: पटना नगर निगम इन दिनों भारी वित्तीय संकट का सामना कर रहा है. नगर निगम की कई सरकारी योजनाओं का काम महज पैसे के अभाव में अटका पड़ा हुआ है. नगर निगम ने राज्य वित्त आयोग की इसकी जानकारी दी है.

इसके साथ ही निगम ने राज्य वित्त आयोग को ये भी बताया है कि किन-किन मदों में कितनी राशि बकाया है. इस बाबत पटना नगर निगम की मेयर सीता साहू और स्थाई समिति के सदस्यों ने खुद नगर विकास के प्रधान सचिव से मुलाकात और उन्हें वित्तीय स्थिति की जानकारी दी.

पटना नगर निगम के स्थाई समिति के सदस्यों और पार्षदों के मुताबिक, निगम की आर्थिक स्थिति बेहद ही खराब है और पिछले तीन वित्तीय वर्षों में बकाया की करोड़ों राशि नहीं मिली है.

दरअसल पटना नगर निगम ने छठे वित्तीय आयोग को अपनी आर्थिक स्थिति की पूरी जानकारी दी है. निगम को मुख्यमंत्री नाली गली योजना, स्वच्छता अनुदान, प्रोफेशनल टैक्स, पार्षद भत्ता सहित दूसरे मदों के लिए 459.56 करोड़ रूपए स्वीकृत किए गए थे, लेकिन अभी निगम का 373.97 करोड़ रूपए का बकाया है. निगम ने वित्त आयोग को बताया है कि साल 2016-17 में स्वच्छता अनुदान के लिए 26 करोड़ की राशि तय थी. लेकिन निगम को सिर्फ 13 करोड़ मिले हैं.

वहीं, साल 2017-18 और 2018-19 में भी स्वच्छता अनुदान की यही हालत रही. इसके साथ ही नाला गली योजना के लिए 2018-19 में 335 करोड़ की राशि तय की गई थी लेकिन निगम को सिर्फ 40 करोड़ की राशि मिली.

बता दें कि नाला गली योजना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की एक महत्वपूर्ण योजना है जिसके तहत हर गलियों में सड़क बनवाने का टार्गेट है. प्रोफेशन्ल टैक्स के लिए निगम को 2018-19 में 6.69 करोड़ की राशि मंजूरी की गई थी. लेकिन निगम को इस मद में एक भी रकम नहीं मिली है.

वहीं, काउंसलर अलाउंस के लिए 2018-19 में निगम के लिए 30 लाख की राशि तय की गई थी. लेकिन उसमें एक भी पैसे नहीं मिले हैं. छठ पूजा के लिए वित्तीय वर्ष 2018-19 में पटना नगर निगम के लिए 16 करोड़ 8 लाख की राशि तय की गई थी. लेकिन निगम को सिर्फ 5 करोड़ 60 लाख रूपए ही मिले.

इसके साथ ही सिटी मैनेजर की सैलेरी के तौर पर 20 लाख की रकम तय की गई थी. लेकिन निगम को एक पैसे नहीं मिले. जबकि स्वच्छता अनुदान के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 में 26.66 करोड़ की राशि तय की गई थी, लेकिन उसे 13.33 करोड़ ही मिले.

वहीं, छठ पूजा के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 में 8 करोड़ 56 लाख की राशि तय की गई थी, लेकिन उसे अब तक एक रूपए भी नहीं मिले हैं. काउंसलर अलाउंस के लिए भी आवंटित 30 लाख की रकम में एक पैसे भी नहीं मिले हैं.

इससे समझ सकते हैं कि जिस नाला गली योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित दूसरे मंत्री कर रहे हैं, अगर उसके लिए आवंटित राशि निगम को नहीं मिली है तो दूसरी योजनाओं की हालत कितनी खराब होगी. वहीं, बिहार सरकार में नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा ने कहा है कि जो भी राशि बकाया है उसके भुगतान जल्द किया जाएगा.