पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव की सरगर्मी तेज, जेडीयू की जीत के लिए प्रशांत किशोर करेंगे बैठक

पटना यूनिवर्सिटी में एक बार फिर से छात्र संघ चुनाव के लिए सरगर्मियां तेज हो गई है. इस बार का चुनाव कई मायनों में अहम है. 

पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव की सरगर्मी तेज, जेडीयू की जीत के लिए प्रशांत किशोर करेंगे बैठक
पटना यूर्निवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव होनेवाला है. (प्रतीकात्मक फोटो)

पटनाः पटना यूनिवर्सिटी में एक बार फिर से छात्र संघ चुनाव के लिए सरगर्मियां तेज हो गई है. इस बार का चुनाव कई मायनों में अहम है. क्योंकि लोकसभा चुनाव नजदीक है जिसमें छात्र नेताओं की भूमिका प्रमुख हो सकती है. इसलिए लोकसभा चुनाव से पहले छात्र संघ चुनाव काफी महत्वपूर्ण है. लिहाजा हर संगठन अपने-अपने तरीके से चुनाव की तैयारियों में लगा है.

छात्र संघ चुनाव इस बार काफी अहम है यह इससे भी प्रतीत होता है कि इसके लिए बड़े नेता भी रणनीति बनाने में लगे हैं. छात्र संघ चुनाव को लेकर जेडीयू की ओर से भी काफी अहमीयत दी जा रही है. जेडीयू उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर शनिवार शाम को छात्र संघ चुनाव को लेकर बैठक कर चर्चा करने वाले हैं. माना जा रहा है कि जेडीयू पूरी रणनीति के साथ इस बार छात्र संघ चुनाव में उतरेगी.

प्रशांत किशोर पहले से ही चुनाव के अच्छे रणनीतिकार माने जाते हैं. और जब से उन्होंने जेडीयू में शामिल होकर काम शुरू किया है तब से उनकी सबसे पहली नजर छात्रों पर है. प्रशांत काम शुरू करते ही सबसे पहले छात्रों के साथ एक बैठक की थी. जिसमें सभी छात्र नेताओं को आमंत्रित किया गया था. माना जा रहा है कि प्रशांत युवा ब्रिगेड बना रहे हैं. इससे उन्हें छात्र संघ चुनाव में फायदा मिलेगा.

बताया जाता है कि प्रशांत किशोर छात्रों की ताकत को पहचानते हैं. इसलिए वह छात्रों पर काफी नजर बनाए हुए हैं. वहीं, इस बार चुनाव में बिहार में सबसे बड़ा युवा नेता के रूप में तेजस्वी यादव को देखा जा रहा है. इसलिए उनके काट के लिए प्रशांत किशोर पहले से युवा छात्रों के साथ काम कर रहे हैं.

पटना यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव 5 दिसंबर को होने जा रहे हैं. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, आइसा ,एआइएसएफ, छात्र राजद, छात्र जदयू, छात्र जन अधिकार परिषद सहित बड़े संगठनों ने चुनाव जीतने के लिए जोर लगा दिया है. नौबत ये है कि छुट्टियों के दिन भी छात्र संगठनों के नेता और संभावित उम्मीदवार हॉस्टल जाकर प्रचार में लग गए हैं.

दरअसल, फरवरी 2018 के मुकाबले दिसंबर में होने वाला छात्र संघ चुनाव कई मायनों में अलग हैं. पटना यूनिवर्सिटी में बिहार के दूसरे जिलों और दूसरे राज्यों से भी छात्र पढ़ने आते हैं. इस बार 20 हजार 368 मतदाता हैं, जो बिहार के विभिन्न जिलों से अपना संबंध रखते हैं. कुछ महीनों बाद देश के साथ बिहार में लोकसभा चुनाव भी होंगे. लिहाजा जो संगठन इस चुनाव को जीतेगा वो एक हद तक युवाओं में ये संदेश देने में सफल होगा कि छात्रों की पहली पसंद कौन सा संगठन या पार्टी है.

पिछली बार के चुनाव में सेंट्रल पैनल के पांच पदों यानि महासचिव, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी. जबकि संयुक्त सचिव पर छात्र जनअधिकार परिषद समर्थित और अध्यक्ष पद पर निर्दलीय दिव्यांशु भारद्वाज जीते थे. छात्र जदयू.छात्र राजद,एनएसयूआई सहित दूसरे छात्र संगठन मुकाबले में नहीं थे. लेकिन इस बार के चुनाव में छात्र जदयू रेस में आ गया है. 

छात्रों के बीच बिहार में वामपंथी छात्र संगठनों की अच्छी पकड़ है. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और वामपंथी छात्र संगठन जैसे आइसा और एएआएसएफ काडर बेस संगठन माने जाते हैं. पिछले चुनाव से सबक लेते हुए इस बार आइसा और एआईएसएफ और छात्र राजद मिलकर चुनाव लड़ेंगे ताकि वोटों का बंटवारा न हो. समझौते के मुताबिक, अध्यक्ष पर एआईएसएफ, उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष पर छात्र राजद जबकि संयुक्त सचिव और महासचिव पर आइसा चुनाव लड़ेगा.