CAG की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, Bihar में 2014-19 में मनरेगा के तहत 3 फीसदी मजदूरों को मिली नौकरी

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि बिहार में 2014 से 2019 के बीच महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत मजदूरों को सिर्फ 3 फीसदी रोजगार दिया गया है.

CAG की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, Bihar में 2014-19 में मनरेगा के तहत 3 फीसदी मजदूरों को मिली नौकरी
मनरेगा के तहत 3 फीसदी मजदूरों को मिली नौकरी (फाइल फोटो)

Patna: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि बिहार में 2014 से 2019 के बीच महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत मजदूरों को सिर्फ 3 फीसदी रोजगार दिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में 26 से 36 फीसदी ऐसे लोग थे, जिन्होंने मनरेगा के तहत 100 दिनों की गारंटी वाले रोजगार के लिए आवेदन किया था, लेकिन केवल 3 फीसदी को ही काम मिला है. 

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि बिहार में 86.61 फीसदी मजदूरों के पास जमीन नहीं है और वे पूरी तरह से योजना पर निर्भर हैं. इसने रिपोर्ट तैयार करने से पहले 60.88 लाख मजदूरों के बीच एक सर्वेक्षण किया.  सीएजी ने नीतीश कुमार सरकार (Nitish Kumar Government) की महत्वाकांक्षी परियोजना लोहिया पथ चक्र, पटना में राजभवन के पास बेली रोड पर बहुउद्देश्यीय ग्रेड डिवाइडर लोहिया पथ चक्र में भी वित्तीय अनियमितताएं पाई हैं. 

सरकारी लेखापरीक्षक ने कहा कि निर्माण कंपनी बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड (BRPNNL) ने योजना बनाने, विस्तार परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने और निर्माण के दौरान कुछ गलत निर्णय लिए है. जिस वजह से काफी नुकसान हुआ है. जिसमे गलत तरीके से डिजाइन में 6.04 करोड़ रुपये, विशेषज्ञ पर्यवेक्षकों पर 10.86 करोड़ रुपये और अन्य खर्चों पर 1.52 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च किये हैं. जिस वजह से राज्य के खजाने को 18.42 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

 

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