बिहार में टीका पर भ्रम: ग्रामीण बोले-हम सांप, गोह, चूहा-कुत्ता खाते हैं, हमें नहीं होगा कोरोना

Bihar News: छपरा के एक गांव के लोगों ने कोरोना वैक्सीन ना लगवाने को लेकर अजीबोगरीब तर्क दिए.  

बिहार में टीका पर भ्रम: ग्रामीण  बोले-हम सांप, गोह, चूहा-कुत्ता खाते हैं, हमें नहीं होगा कोरोना
कोरोना वैक्सीनेशन के प्रति लोगों में डर (सांकेतिक फोटो)

Chapra: बिहार समेत देश भर में कोरोना का खतरा बना हुआ है. रोजाना तीन हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है. एक लाख के आसपास केस सामने आ रहे हैं. तीसरी लहर की चेतावनी दी जा रही है लेकिन वैक्सीन को लेकर अभी भी कई लोग भ्रम में जी रहे हैं. 
 
ग्रामीण इलाकों में ये समस्या ज्यादा है. जी मीडिया की टीम बिहार के छपरा के ग्रामीण इलाकों में पहुंची. तो वहां के लोगों ने वैक्सीन ना लगवाने के अजीबोगरीब तर्क दिए. छपरा के सिसवां रसूलपुर गांव के ज्यादातर लोग वैक्सीन लगाने से डर रहे हैं. गांव में महादलित टोला है, जहां करीब 1000 की आबादी है. 
 
यहां लोगों को वैक्सीन लगाने के लिए अधिकारी आते हैं तो ग्रामीण अधिकारी को भगा देते हैं. गांव की इस बस्ती में वार्ड मेंबर को छोड़कर किसी ने वैक्सीन नहीं लगाई है. गांव के लोगों से बात की तो पता चला कि बस्ती में अफवाह फैली हुई है कि वैक्सीन लेने से इंसान की मौत हो जाती है. इसलिए वैक्सीन लगाने वाली टीम को ये अपनी बस्ती में आने ही नहीं देते. 
 
एक महिला ने कहा कि ऐसे ही मर जाएंगे लेकिन सुई-वुई नहीं लेंगे. गांव के ही एक लड़के ने कहा लोग कहते हैं कि वैक्सीन लेने के 6 महीने में इंसान मर जाता है इसलिए नहीं लेते. गांव के ज्यादातर लोगों ने वैक्सीन से जान जाने वाली अफवाह को सच मान लिया है.

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गांव की दूसरी महिला ने कहा कि हमने वैक्सीन इसलिए नहीं लिया क्योंकि हम अभी तक AC की हवा नहीं खाते हैं, जो लोग AC की हवा खाते हैं वो लोग बीमार पड़ते हैं, जो कमाता-खाता है उसको बीमारी नहीं होती है.

महिला ने कहा कि हम तो सांप खाते हैं, गोह खाते हैं..मूस खाते हैं, सियार खाते हैं, हमको बीमारी नहीं होती है. महिला की बात से लगा कि मेहनत-मजदूरी और अपने खान-पान पर इन्हें पूरा भरोसा है. इन्हें लगता है कि ये सांप-चूहा खाते हैं इसलिए इनको बीमारी नहीं होती है.

कई ऐसे भी हैं जिनका मानना है कि उन्हें कोरोना हो ही नहीं सकता है. कई ग्रामीण तो शराब को भी कोरोना से बचने की दवा समझते हैं. गांव के एक युवक ने कहा कि हम कुत्ता-सियार खाते हैं, हमको कोरोना नहीं होगा, दारू भी पीते हैं.

शख्स ने कहा कि अभी कंधे पर कुदाल उठाकर जाएंगे सीना तानके और गोह को पकड़ेंगे फिर पकाकर खाएंगे. हमलोगों को कोरोना नहीं होगा. बिहार में शराबबंदी के बावजूद छपरा के इस गांव में शराब पीने वाले तो बहुत मिल जाएंगे लेकिन वैक्सीन लगवाने वाले नहीं मिलते हैं.

पंचायत के मुखिया भी समझा-समझाकर थक चुके हैं. मुखिया ने वैक्सीन ना लगवाने वाले लोगों के सामने कहा कि सरकार ने जब सुई की व्यवस्था की तो सुई क्यों नहीं लेती हो. मुखिया ने कहा कि मेरे गांव में 60 प्रतिशत लोगों ने सुई ले ली. मेरे घर में सबने सुई ले ली. कहां कोई मरा है.

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इसके बावजूद वैक्सीन को लेकर अफवाह इतना हावी है कि मुखिया की बात भी ये लोग नहीं मानते हैं. गांव के मुखिया अरविंद कुमार सिंह का कहना है कि इस गांव में पहले से ही बहुत अशिक्षा है. लोग पढ़े लिखे नहीं हैं. कहीं से हवा उड़ गई कि वैक्सीन से लोग मर रहे हैं. 
 
उन्होंने कहा कि लोगों को जागरूक किया जा रहा है लेकिन लोग समझ नहीं पा रहे हैं. इस बस्ती के पास ही वैक्सीनेशन कैंप लगा है. टीम निर्धारित समय तक इंतज़ार करती रहती है लेकिन लोग नहीं आते हैं. 

(इनपुट- अभिजीत)