कोरोना संक्रमण रोकने के लिए 'नाइट कर्फ्यू' बना हथियार! Lockdown को 'राजी' नहीं बिहार सरकार

Bihar Samachar: बैठकों के बाद सरकार ने कई बड़े और अहम फैसले किए है.   

कोरोना संक्रमण रोकने के लिए 'नाइट कर्फ्यू' बना हथियार! Lockdown को 'राजी' नहीं बिहार सरकार
Lockdown को 'राजी' नहीं बिहार सरकार. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Patna: बिहार में कोरोना (Corona) संक्रमण लगातार अपना दायरा फैलाता जा रहा है. हर दिन मरीजों की संख्या नया रिकॉर्ड बना रही है और यह ऑकड़ा कभी भी 10 हजार मरीज प्रति दिन तक पहुंच सकता है. ऐसे में यहां सरकार के हाथ-पांव फूल गए हैं. वहीं, लोगों में भी इसे लेकर दहशत है.

हालांकि, लोगों की लापरवाही भी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. लेकिन ऑक्सीजन की कमी, बेड की कमी, दवाओं की कमी, वैक्सीन की कमी जैसी खबरें देखने और सुनने के बाद लोग खौफ में हैं. 

'नाइट कर्फ्यू' बना हथियार 
पूरे देश में जब कोरोना अपने चरम पर है. तब सभी प्रदेश सरकारें बैठकों और मंथन के दौर में हैं. बिहार भी इससे अछूता नहीं है. साथ हीं, शनिवार और रविवार को दो दिनों तक बिहार में हाईप्रोफाइल बैठकें हुईं. शनिवार को यहां चिर-प्रतिक्षित सर्वदलीय बैठक राज्यपाल की अध्यक्षता में संपन्न हुई. वहीं, रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish kumar) की अध्यक्षता में सभी जिलों के डीएम और स्वास्थ विभाग से जुड़े तमाम बड़े अधिकारियों की बैठक हुई.

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इन बैठकों में यह तय किया गया कि वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए किस तरह की रणनीति पर काम करना चाहिए और कैसे कदम उठाए जाने चाहिए. बैठकों के बाद सरकार ने कई बड़े और अहम फैसले किए है.

संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए बड़े फैसले 

1. प्रदेश में 15 मई तक नाइट कर्फ्यू लगाने का फैसला हुआ. जो रात 9 बजे से सुबह 5 बजे तक लागू रहेगा. हालांकि, बस-हवाई-रेल यात्रा पर यह लागू नहीं है. 
2. सभी स्कूल-कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान 15 मई तक बंद रहेंगे.
3 सभी धार्मिक स्थानों को 15 मई तक बंद रखने का आदेश दिया गया है.
4. सभी दुकानें और मीडिया अब शाम 6 बजे तक ही खुलेंगी.
5 सिनेमा हॉल, शापिंग मॉल, क्लब, जिम, स्टेडियम, पार्क और स्विमिंग पूल बंद रहेंगे.
6 सरकारी और निजी कार्यालय शाम 5 बजे तक ही खुलेंगे.
7 सार्वजनिक जगहों पर सभी तरह के सरकारी-निजी आयोजनों पर प्रतिबंध रहेगा.
8 शादी-विवाह कार्यक्रम में अधिकतम 100 लोगों को ही अनुमति होगी.
9 अंतिम संस्कार में अधिकतम 25 लोग ही शामिल होंगे.
10 रेस्तरां, भोजनालय, ढाबे में बैठकर खाना प्रतिबंधित रहेगा. वहीं, होम डिलीवरी रात 9 बजे तक हो सकेगी.

इसके अलावा सरकार ने दिन में भीड़ को नियंत्रित करने का अधिकार सभी जिलों के डीएम को दिया है. जिस जिले में जरूरत होगी, वहां के डीएम धारा 144 लगाने के लिए स्वतंत्र होंगे.

फैसले पर शुरु हुई सियासत 
बिहार की नीतीश सरकार ने जो फैसला किया है. उसे लेकर प्रदेश में खूब राजनीति हो रही है. सरकार के फैसले पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरु हो गया है. वहीं, विपक्ष ने बिहार में नाइट कर्फ्यू के फैसले को लेकर सरकार की खूब खिल्ली उड़ाई. साथ हीं, विपक्ष ने कहा कि 'बिहार में कभी भी दिल्ली, मुंबई जैसा कल्चर नहीं रहा. यहां के लोगों ने नाइट कल्चर या लेट नाइट आउटिंग को कभी नहीं अपनाया है. फिर यहां नाइट कर्फ्यू किसके लिए? जब लोग रात में बाहर निकलते ही नहीं, तो सरकार ने किस पर पाबंदी लगाई है?'

वहीं, सत्तापक्ष सरकार के फैसले का बचाव कर रहा है. सत्ता पक्ष का कहना है कि 'विपक्ष को सिर्फ खामियां निकालने की आदत है. सरकार ने कई फैसले किए हैं और अलग-अलग तरह से सरकार कोरोना की चेन तोड़ने के प्रयास में लगी है. अभी धीरे-धीरे और भी फैसले किए जाएंगे इसलिए बेवजह का आरोप लगाना सही नहीं है.' हालांकि सच यह भी है कि सत्ता में भागीदार BJP के प्रदेश अध्यक्ष ने भी नाइट कर्फ्यू को लेकर सवाल उठाए हैं.

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एक्सपर्ट्स की सलाह, 'कड़े फैसले करने से सरकार पीछे न हटे' 
सियासी दल भले ही अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगे हों. लेकिन एक्सपर्ट्स सरकार को लगातार आगाह कर रहे हैं. वहीं, एक्सपर्ट्स का अब भी मानना है कि सरकार की तरफ से उठाए गए कदम काफी नहीं हैं और सरकार को बड़े कदम उठाने में संकोच नहीं करना चाहिए.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक 'अगर सरकार कड़े फैसले करने से पीछे हटती है, तो कोरोना की वजह से होने वाले नुकसान का सरकार के सिर ही फूटेगा. जिन लोगों की जान जाएगीऔर जो हालात होंगे. उसमें सरकार को जवाब देना मुश्किल हो जाएगा इसलिए सरकार को सख्त कदम उठाने ही होंगे. तभी बिहार को इस जानलेवा वायरस से बचाया जा सकेगा.'