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पटना में स्थित ऐतिहासिक राज भवन का नाम अब आधिकारिक रूप से बदल दिया गया है. राज्यपाल के प्रधान सचिव आर. एल. चोंग्थु द्वारा जारी अधिसूचना के बाद यह भवन अब नए नाम ‘बिहार लोक भवन’ के रूप में जाना जाएगा. यह निर्णय केंद्र सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसमें राज्यपाल आवासों के नाम अधिक जनसरोकार वाले स्वरूप में परिवर्तित किए जा रहे हैं. अधिसूचना लागू होते ही सभी विभागों में पुराने नाम का उपयोग बंद कर दिया गया है.
केंद्र की ओर से 25 नवंबर 2025 को जारी आदेश के अनुसार सभी राज्यों के राज भवनों का नाम बदलकर ‘लोक भवन’ और केंद्र शासित प्रदेशों के राज निवास का नाम ‘लोक निवास’ करने का निर्देश दिया गया था. इसके बाद बिहार सरकार ने भी इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया. यह कदम शासन व्यवस्था को अधिक लोकतांत्रिक स्वरूप देने के उद्देश्य से उठाया गया माना जा रहा है.
नए नाम के लागू होते ही विभागों में रिकॉर्ड अपडेट करने का काम शुरू हो गया है. भवन परिसर के साइन बोर्ड, नेम प्लेट, गेट के बोर्ड और सभी आधिकारिक संकेतकों को बदला जा रहा है. राज्यपाल सचिवालय की वेबसाइट पर भी नया नाम अपडेट कर दिया गया है. अब सार्वजनिक पत्राचार, सरकारी नोट शीट, आदेशों और प्रेस विज्ञप्तियों में केवल ‘बिहार लोक भवन’ का ही उपयोग होगा.
राज भवन का इतिहास करीब सौ साल से अधिक पुराना है. इसकी नींव वर्ष 1913 में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग ने रखी थी और 1916 में इसका उद्घाटन किया गया था. ब्रिटिश शासन के दौरान इसे प्रशासकों के आवास के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. नाम बदलने की प्रक्रिया को केंद्र सरकार के उस प्रयास से जोड़ा जा रहा है, जिसके तहत औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाकर भारतीयता और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ी पहचान को बढ़ावा दिया जा रहा है.
बिहार लोक भवन नामकरण के बाद इस परिसर की छवि भी एक नए रूप में उभर रही है. सरकारी स्तर पर यह कदम सिर्फ नाम परिवर्तन नहीं माना जा रहा, बल्कि प्रतीकात्मक रूप से इसे जनता से जुड़ी शासन सोच का हिस्सा बताया जा रहा है. इससे संबंधित सभी औपचारिक व्यवस्थाएं आने वाले दिनों में पूरी तरह अपडेट कर दी जाएंगी.