मैथिली लिपि को बढ़ावा देने प्रकाश जावड़ेकर जल्द बुला सकते हैं एक्सपर्ट्स की बैठक

केंद्रीय मानवसंसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर जल्द ही मैथिली लिपि के प्रचार-प्रसार के लिए जल्द ही उससे जुड़े विद्वानों की एक बैठक बुला सकते हैं.

मैथिली लिपि को बढ़ावा देने प्रकाश जावड़ेकर जल्द बुला सकते हैं एक्सपर्ट्स की बैठक
प्रकाश जावड़ेकर को ज्ञापन सौंपते संजय झा. तस्वीर साभार- फेसबुक

नई दिल्ली: केंद्रीय मानवसंसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर जल्द ही मैथिली लिपि के प्रचार-प्रसार के लिए जल्द ही उससे जुड़े विद्वानों की एक बैठक बुला सकते हैं. बिहार योजना परिषद के सदस्य और जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय महासचिव संजय झा ने सोमवार को दिल्ली में जावड़ेकर से मुलाकात के बाद यह जानकारी दी.

बिहार और झारखंड के विभिन्न हिस्सों में बोली जाने वाली मैथिली भाषा की लिपि के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार प्रसार के लिए जेडीयू नेता संजय झा दिल्ली में शिक्षा मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मिले. संजय झा ने बताया कि इस मुलाकात के दौरान उन्होंने मंत्री को एक ज्ञापन सौंपा जिसमें मैथिली भाषा के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने और उसके लिए जरूरी फंड जारी करने का अनुरोध किया.

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संजय झा ने बताया कि बैठक में मंत्री ने उनकी मांगों पर सहमति जताते हुए जल्द ही इसके लिए मैथिल विद्वानों से मुलाकात कर एक लिपि के प्रचार-प्रसार के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने पर अपनी सहमति दी.

वाजपेयी सराकर ने मैथिली को अष्टम अनुसूची में शामिल किया
जेडीयू नेता ने बताया कि केंद्र में जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार बनी थी उसी दौरान मैथिली भाषा को अष्टम अनुसूची में स्थान मिला. अब केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दोबारा एनडीए की सरकार है और मैथिली लिपि से प्रचार-प्रसार के लिए मजबूत पहल की जाएगी.

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नीतीश राज में बीपीएससी में दोबारा शामिल किया गया
उन्होंने राजद और कांग्रेस पर मैथिली की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन लोगों ने ही बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के सिलेबस मैथिली को अलग कर दिया था. बिहार में जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में जेडीयू-बीजेपी गठबंधन की सरकार बनी तो 2005 में पुन: मैथिली को बीपीएससी के सिलेबस में शामिल किया गया.