बिहार चुनाव के बीच महागठबंधन में मतभेद की नई खबरों ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है. VIP प्रमुख मुकेश सहनी के नाराज होने की अटकलें हैं, वहीं बीजेपी ने कहा कि महागठबंधन में सहनी का अपमान हुआ है. हालांकि मुकेश सहनी ने खुद पोस्ट जारी कर अफवाहों का खंडन किया.
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बिहार विधानसभा चुनाव के बीच, महागठबंधन को लेकर राजनीतिक गलियारों में मतभेद की खबरें फिर से आ रही हैं और इसकी वजह सत्तारूढ़ भाजपा के सोशल मीडिया हैंडल से एक पोस्ट और मुकेश सहनी की जितौरा में निर्धारित रैली का रद्द होना है. सूत्रों के अनुसार, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख और गठबंधन के उपमुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार मुकेश सहनी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि वह महागठबंधन से नाराज हैं और इसीलिए उन्होंने हाल ही में जितौरा में हुई महागठबंधन की रैली में हिस्सा नहीं लिया.
राजनीतिक गलियारों में तो यहां तक चर्चा है कि मुकेश सहनी एनडीए के एक वरिष्ठ नेता के संपर्क में हैं और नतीजे घोषित होने से पहले कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं. यह अटकलें ऐसे समय में तेज हो गई हैं जब दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होना है और नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे. लेकिन मुकेश सहनी ने इस संबंध में सोशल मीडिया पोस्ट में जो कहा, उससे एनडीए गठबंधन को निराशा हुई होगी.
दरअसल बिहार बीजेपी ने आरोप लगाया कि महागठबंधन में मुकेश सहनी का लगातार अपमान हुआ है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि पहले उन्हें चुनाव लड़ने का मौका नहीं दिया गया और फिर उनके भाई पर गौरा बौराम सीट से नामांकन वापस लेने का दबाव बनाया गया. बीजेपी का कहना है कि "मल्लाह समाज की नाराजगी जायज है क्योंकि आरजेडी और कांग्रेस ने सहनी को नजरअंदाज किया."
इन तमाम अटकलों पर मुकेश सहनी ने सोशल मीडिया पोस्ट जारी कर स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा, "अरे ओ दिलजलों! पहले राउंड के मतदान में जब हवा टाइट हो गई, तो अब ख्याली पुलाव पकाने बैठे हो! कुछ लोग चुनाव में हार देखकर अफवाहें फैला रहे हैं. मैं अपना वादा निभाऊंगा, जब तक तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री नहीं बना देता और बीजेपी को मात नहीं दे देता, तब तक चैन से नहीं बैठूंगा." मुकेश सहनी ने समर्थकों से अपील की कि वे महागठबंधन उम्मीदवारों को वोट दें और भ्रमित न हों.
मुकेश सहनी बिहार के अतिपिछड़ा वर्ग (EBC) में गहरी पैठ रखते हैं, जो राज्य की लगभग 30% आबादी है. इसमें निषाद, केवट, तेली, लोहार जैसे समुदाय शामिल हैं. महागठबंधन ने इस वर्ग को आकर्षित करने के लिए "अतिपिछड़ा न्याय संकल्प" अभियान शुरू किया है. ऐसे में मुकेश सहनी का रुख राजनीतिक रूप से काफी मायने रखता है.
पहले चरण से पहले खबरें थीं कि मुकेश सहनी गौरा बौराम सीट से नामांकन दाखिल करेंगे, लेकिन उसी सीट से आरजेडी के अफजल अली ने टिकट ले लिया. इसके बाद मुकेश सहनी ने चुनाव न लड़ने का फैसला किया और महागठबंधन के प्रचार में जुट गए. उन्होंने कहा था कि वे उपमुख्यमंत्री पद के लिए काम करेंगे और गठबंधन को जीत दिलाएंगे.
यह पहली बार नहीं है जब महागठबंधन में असहमति की खबरें सामने आई हैं. इससे पहले भी कांग्रेस और आरजेडी के बीच कई सीटों पर "फ्रेंडली फाइट" देखी गई थी. वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) भी गठबंधन से अलग होकर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला कर चुका है.
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