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जो लोग आज नितिन नबीन को बीजेपी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने से हैरत में हैं, उनको शायद 2010 का वो वाकया याद नहीं है. तब नितिन नबीन ने पटना के प्रमुख समाचार पत्रों में एक विज्ञापन दिया था. इस विज्ञापन ने भारतीय जनता पार्टी और जेडीयू के बीच तनाव पैदा कर दिया था. उसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के सम्मान में दिए जाने वाले भोज को कैंसिल कर दिया था. वह घटना बिहार के राजनैतिक इतिहास की चर्चित घटना बन गई थी.
दरअसल, विज्ञापन में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हाथ पकड़े दिखाया गया था. विज्ञापन में बिहार में बाढ़ राहत में की गई मदद के लिए गुजरात की सरकार का आभार जताया गया था. नितिन नबीन की ओर से दिए गए इस विज्ञापन को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नाराज हो गए थे.
उनकी नाराजगी इस बात को लेकर थी कि विज्ञापन प्रकाशित किए जाने को लेकर उनको विश्वास में नहीं लिया गया था. नाराजगी के चलते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा नेताओं के साथ पहले से तय डिनर को कैंसिल कर दिया था. कहा तो यह भी जाता है कि नीतीश कुमार ने गुजरात सरकार से बाढ़ राहत के नाम पर मिले 5 करोड़ रुपये के चेक को भी वापस कर दिया था.
तब नीतीश कुमार ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था, आपदा के समय दी गई मदद को इस तरह जताना भारतीय संस्कृति और नैतिकता के खिलाफ है. तब बताया गया था कि नीतीश कुमार अपने अल्पसंख्यक वोटबैंक को लेकर सतर्क थे और उन्हें डर था कि बिहार में अगर नरेंद्र मोदी को महिमामंडित किया गया तो अल्पसंख्यक समुदाय उनसे दूर जा सकता है.
फिर भी भाजपा के साथ गठबंधन की सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा था. नीतीश कुमार ने तब यह भी कहा था कि भाजपा से उन्हें कोई शिकायत नहीं है और बिहार की सरकार अच्छे से चल रही है.
वो विज्ञापन नितिन नबीन ने दिया था. नितिन नबीन ने 2010 में वो कर दिखाया था, जो उस समय भाजपा के बड़े बड़े नेता करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे. नितिन नबीन ने तब अपनी दूरदर्शिता का परिचय दिया था और आज उनको इसी बात का इनाम मिला है. इससे एक बात और साबित होती है कि पीएम मोदी के लिए अगर किसी ने कुछ किया है तो उसका उसको इनाम भी मिला है. चाहे देर हो या सबेर.