पटना HC का पंचायती राज संस्थानों को निर्देश, अपने क्षेत्र में मौत का आंकड़ा 24 घंटे में दें

Bihar News: पटना हाई कोर्ट ने बिहार सरकार के पंचायती राज को राज्य में कोरोना से हुई मौत का सटीक आंकड़ा 24 घंटे में देने के लिए कहा है.   

पटना HC का पंचायती राज संस्थानों को निर्देश, अपने क्षेत्र में मौत का आंकड़ा 24 घंटे में दें
पटना हाई कोर्ट ने सरकार से कोरोना से मौत का आंकड़ा मांगा है

Patna: बिहार में कोरोना के कहर से निपटने के लिए हाई कोर्ट ने  एक बार फिर से जरूरी दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं. हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के पंचायती राज विभाग को सूबे में कोरोना से हुई मौतों की सटीक व सही जानकारी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण आदेश दिया है.

हाई कोर्ट ने कोरोना मौतों को लेकर कहा कि पंचायती विभाग के सभी संस्थाएं महामारी के दौरान हो रही मौतों की जानकारी नजदीकी निबंधन अधिकारी को 24 घंटे के अंदर दें. चीफ जस्टिस संजय करोल व जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने सूबे के तमाम मुखिया/ उप मुखिया, प्रमुख / उप प्रमुख और जिला परिषद के अध्यक्ष /उपाध्यक्ष को निर्देश दिया है कि उनके क्षेत्रों में जितनी भी मौतें हुईं और होती हैं, उन सबों की जानकारी नजदीकी जन्म व मृत्यु निबंधक को 24 घण्टे के अंदर दें.

ऐसा इसलिए ताकि सरकार को यह  पता लगाने में सहूलियत हो कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में हुई मौतों में कितने लोगों की कोरोना के कारण मौत हुई है. मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने यह निर्देश शिवानी कौशिक व अन्य  की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है.

राज्य मेडिकल इमरजेंसी के दौर से गुजर रहा है
चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने आदेश में कहा है कि पूरा राज्य मेडिकल इमरजेंसी के दौर से गुजर रहा है और यहां लॉकडाउन भी लगा हुआ है. 2011 की जनगणना के हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस राज्य की 90 फीसदी जनता ग्रामीण इलाकों में बसती है और ऐसी बात नहीं है कि कोरोना सिर्फ शहरी लोगों को ही होता है.  

दूसरी लहर से राज्य में त्राहिमाम, तीसरी लहर आने वाली है
हाई कोर्ट ने कहा कि इस महामारी के दूसरी लहर ने पूरे राज्य में त्राहिमाम मचा दी है और राष्ट्रीय स्तर पर कोरोना की तीसरी लहर भी आने वाली है.  कोविड के पहले लहर के कारण करीब 40 लाख प्रवासी, बिहार वापस आये थे. उनमें कितने रह गए या दूसरी लहर में और कितने माइग्रेंट बिहार वापस आये? उनमें कितनों को कोरोना संक्रमण हुआ? कितने ग्रामीणों की कोरोना से मौत हुई? यह आंकड़ा कोर्ट के समक्ष रखा जाए.

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हर गांव में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर हो
कोर्ट ने कहा कि इन तमाम आंकड़ों को एकत्र कर के ही राज्य के हर गांव में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा सकता है ताकि पूरा राज्य तीसरे लहर से लड़ने के लिए तैयार रहे. बिहार के गांव-गांव में कोरोना टेस्टिंग से लेकर, आइसोलेशन, दवा वगैरह की व्यवस्था हो. ऐसा तभी संभव होगा जब पंचायती राज प्रतिनिधियों को कोरोना से लड़ने की मुहिम में शामिल किया जाए. 

अगली सुनवाई 17 मई को
हाईकोर्ट ने कहा कि यही पंचायती प्रतिनिधि अपने क्षेत्र के भूगोल से वाकिफ होते हैं. उन्हें अपने इलाके के लोगों व परिवार की सबसे अच्छी जानकारी होती है. इसलिए पंचायती राज कानून के तहत निर्दिष्ट तमाम ड्यूटी में इलाकों के आंकड़े इकट्ठा करना भी शामिल है. इसलिए सभी मुखिया, प्रमुख व अध्यक्ष को इस मेडिकल इमरजेंसी में अपना कर्तव्य निर्वहन करने का आदेश हुआ है. इस मामले पर अगली सुनवाई 17 मई को होगी.