Komal Singh on Rohini Acharya Controversy: रोहिणी आचार्य की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है. जेडीयू विधायक कोमल सिंह ने कहा कि किसी भी महिला का अपमान अस्वीकार्य है और बेटा-बेटी दोनों को समान सम्मान मिलना चाहिए. उन्होंने एनडीए सरकार को महिला सशक्तिकरण का वाहक बताया. वहीं, रोहिणी ने पिता को किडनी देने के बाद हुए तिरस्कार का दर्द भी सार्वजनिक कर दिया है.
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बिहार की सियासत में रोहिणी आचार्य विवाद लगातार चर्चा में है. इस मुद्दे पर एनडीए के नेता राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर लगातार बयान दे रहे हैं. गायघाट से जेडीयू विधायक कोमल सिंह ने इस प्रकरण पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिलाओं को कमतर समझने की मानसिकता गलत है. उन्होंने कहा कि महिलाएं स्वभाव से कोमल होती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे कमजोर हैं.
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कोमल सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि बिहार में बेटियों को आज अधिक अधिकार और अवसर मिले हैं. उनके अनुसार, महिलाओं के लिए रोजगार, सुरक्षा और घर से बाहर निकलकर आगे बढ़ने का माहौल एनडीए सरकार की वजह से बना है. उन्होंने कहा कि बिहार की महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है और सरकार की नीतियों ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है.
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लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए खुलासों को लेकर कोमल सिंह ने कहा कि किसी भी महिला का अपमान नहीं होना चाहिए. उन्होंने याद किया कि चुनाव लड़ते समय उन्हें भी कई तरह के कटाक्ष झेलने पड़े थे. उन्होंने कहा कि बेटा और बेटी दोनों को समान सम्मान मिलना चाहिए और बिहार की जनता बेटियों का सम्मान करना जानती है. उन्होंने कहा कि रोहिणी की जीत इस बात का प्रमाण है कि राज्य की जनता बेटियों पर भरोसा करती है.
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विधायक ने बिहार में एनडीए की भारी जीत को जनता के समझदार फैसले का परिणाम बताया. उन्होंने कहा कि बिहार विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है और लोग जात-पात से ऊपर उठकर वोट कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार पर जनता का भरोसा दिखाता है कि राज्य में काम हुआ है और आने वाले दिनों में यह रफ्तार और तेज होगी.
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चुनाव नतीजों के बाद रोहिणी आचार्य ने 'एक्स' पर लिखा कि उन्हें गालियां दी गईं और उनके द्वारा पिता को किडनी देने पर तिरस्कार किया गया. उन्होंने कहा कि उन्हें कहा गया कि उन्होंने अपने पिता को "गंदी किडनी" दी और इसके बदले करोड़ों रुपये लिए.
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उन्होंने लिखा कि किसी भी शादीशुदा बेटी को अपने पिता के लिए बलिदान नहीं देना चाहिए, क्योंकि बाद में यही त्याग अपमान में बदल जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने बिना पति और ससुराल की अनुमति के अपने पिता को बचाने का फैसला लिया, लेकिन आज उसी को गलत बताया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि किसी घर में उनके जैसी बेटी न हो जिसे अपने ही त्याग का अपमान सहना पड़े.
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