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Udit Narayan Birthday: जिनका नाम सुनते ही लोगों के मन में उनकी मधुर आवाज गूंजने लगती है, जो किसी परिचय के मोहताज नहीं—जी हां, हम बात कर रहे हैं 90 के दशक के मशहूर गायक उदित नारायण की. बॉलीवुड के यह दिग्गज गायक आज अपना 70वां जन्मदिन मना रहे हैं. 1 दिसंबर 1955 को जन्मे उदित नारायण झा का जीवन संघर्ष, मेहनत और प्रतिभा का अद्भुत संगम है. उदित नारायण ने बॉलीवुड में कई सुपरहिट गाने दिए हैं. उन्होंने फिल्म कयामत से कयामत तक से अपने करियर की शुरुआत की और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. एक के बाद एक हिट गीतों ने उन्हें बॉलीवुड के सबसे सफल गायकों में शामिल कर दिया. भारत सरकार ने उनकी प्रतिभा और योगदान को सम्मानित करते हुए वर्ष 2009 में पद्म श्री और 2016 में पद्म भूषण से नवाजा. इसके अलावा उदित नारायण को 5 बार फिल्मफेयर अवार्ड भी मिल चुका है.
शिक्षा के साथ-साथ उनका झुकाव संगीत की ओर
बिहार के सुपौल जिले के बसई में 1 दिसंबर 1955 को उदित नारायण का जन्म हुआ था. मैथिल ब्राह्मण परिवार में जन्मे उदित नारायण के पिता का नाम हरेकृष्ण झा और माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था. उनके पिता पेशे से किसान थे, जबकि उनकी माता एक लोक गायिका थीं. मां की यही कला उदित नारायण के लिए प्रारंभिक प्रेरणा बनी. उदित नारायण की शुरुआती शिक्षा सुपौल जिले के जागेश्वर हाई स्कूल में हुई. हाई स्कूल पूरा करने के बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए नेपाल चले गए और काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय से इंटर की पढ़ाई पूरी की. शिक्षा के साथ-साथ उनका झुकाव संगीत की ओर और अधिक बढ़ता गया, क्योंकि घर में बचपन से ही संगीत का माहौल मिला था. संगीत में गहरी रुचि होने के कारण उदित नारायण ने पढ़ाई के साथ छोटे-छोटे मंचों पर गाना शुरू कर दिया. यही शुरुआती मंच उनके भविष्य के बड़े सफर की नींव बने.
लोगों ने रेडियो पर गाने की सलाह दी
नेपाल में एक कार्यक्रम के दैरान उदित नारायण ने एक मैथिली गाना गाया. लोगों को उनकी आवाज इतनी पसंद आई की लोगों ने उन्हें रेडियो पर गाने की सलाह दी. साल 1971 में पहली बार काठमांडू रेडियो पर 'सुन-सुन-सुन पनभरनी गे तनी घुरियो के ताक' गाने का मौका मिला. यह गाना उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. उनकी आवाज लोगों को इतनी पसंद आई कि वे नेपाल के संगीत जगत में धीरे-धीरे पहचान बनाने लगे. सपने बड़े होने के कारण उदित नारायण नेपाल छोड़कर मुंबई आए. मुंबई में उस टाइम संघर्ष इतना थी कि उदित नारायण को एक होटल में मात्र 100 रुपये महीने की नौकरी करनी पड़ी थी. मेहनत कर के उन्होने भारतीय विद्या भवन से संगीत की औपचारिक शिक्षा शुरू की. इसी बीच साल 1980 में उन्हें मोहम्मद रफी के साथ फिल्म 'उन्नीस बीस' का गाना गाने को मौका मिला.
उदित नारायण का संघर्ष
उदित नारायण का संघर्ष चलता रहा और साल 1989 में कयामत से कयामत तक में उन्हें पहला ब्रेक थ्रू मिला. इस फिल्म का गाना 'पापा कहते है' बहुत ही हिट गाना साबित हुआ और उसके बाद उदित नारायण कभी पिछे मुड़ कर नहीं देखे और एक के बाद एक हिट गाना देने लगे. उदित नारायण ने सौदागर, त्रिदेव, दिल तो पागल है, कुछ-कुछ होता है, करन-अर्जुन, हम साथ साथ हैं, धड़कन, लगान, वीर जारा जैसी फिल्मों में अपनी आवाज देकर बॉलीवुड को कई सदाबहार और हिट गाने दिए है. आज उदित नारायण किसी परिचय को मोहताज नहीं है.