close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

ZEE Exclusive: हाईप्रोफाइल मुजरिमों का ऐसे 'अतिथि सत्कार' करती है पुलिस!

पुलिस टीम में शामिल दारोगा भी आरोपियों के साथ कंबल ओढ़ कर सोते हुए नजर आते हैं.

ZEE Exclusive: हाईप्रोफाइल मुजरिमों का ऐसे 'अतिथि सत्कार' करती है पुलिस!
पुलिस मुजरिम को अतिथि मानकर हवालात की जगह रेस्टोरेंट और रेस्ट हाउस में उनका सत्कार कर रही है

बाढ़: भारत में अतिथि को भगवान माना जाता है. हालात यह है कि इसका असर पुलिस पर भी दिखने लगा है. पुलिस भी मुजरिम को अतिथि मानकर हवालात की जगह रेस्टोरेंट और रेस्ट हाउस में उनका सत्कार कर रहे हैं. पुलिस का यह खास 'अतिथि सत्कार' इन दिनों सुर्खियों में है. खबर में दिखाई जा रही तस्वीरों से ही आप समझ जाएंगे कि पुलिस पर कितना दबाव है. जिस वजह से पुलिस अपराधिक घटना में गिरफ्तार किए हुए मुजरिम को किस ढंग से रेस्ट हाउस में ठहराते हैं और उनके साथ खुद सोते हैं साथ ही उनकी सुरक्षा के लिए दो पुलिस के जवान भी लगा दिए गए हैं.

इस केस में हुई थी गिरफ्तारी
जानकारी के मुताबिक मोकामा थाना में केस संख्या 195/17 दर्ज कराया गया था. जिसमें 4 साल पहले 9 दिसंबर 2012 को मोकामा थाना क्षेत्र के मोर गांव निवासी स्वर्गीय मुकेश सिंह की पुत्री राखी कुमारी की शादी पाटलिपुत्र कॉलोनी के वीरेंद्र सिंह के सुपुत्र सुमित सिंह के साथ हुई थी. शादी में अपनी हैसियत के मुताबिक दहेज भी दिया गया था. लेकिन, ससुराल में संबंध अच्छा नहीं रहा और पारिवारिक तनाव के कारण एक दूसरे पर मुकदमे का दौर शुरू हो गया. लड़का बिजनेसमैन है जो इन दिनों दिल्ली में है.

पुलिस पर बना दबाव तो शुरू हुआ अतिथि सत्कार
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस गिरफ्तारी के लिए पाटलिपुत्र थाना पहुंची और सुमित सिंह के दो भाई को गिरफ्तार कर मोकामा थाना लौट रही थी. इसी दौरान लड़का पक्ष का हाईप्रोफाइल नेटवर्क एक्टिव हो गया और पुलिस टीम के पास उच्चअधिकारियों का फोन आना शुरू हो गया. जिसके बाद पुलिस मोकामा थाना से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर शिवनगर गांव के पास एक होटल पर रुकती है और मुजरिमों के साथ चाय-नाश्ता करती है और फिर वाहन को घुमा कर बाढ़ ले आती है.

बाढ़ में आराम से सोते नजर आए मुजरिम
पुलिस टीम मुजरिमों को साथ लेकर बाढ़ शहर के प्रसिद्ध अनामिका रेस्ट हाउस में कमरा संख्या 25 में आकर ठहर जाती है. दोनों आरोपी आराम से कंबल ओढ़ कर VIP बनकर सोते हैं और पुलिस वाले उसकी रखवाली में राइफल लेकर ड्यूटी बजाते हैं. पुलिस टीम में शामिल दारोगा भी आरोपियों के साथ कंबल ओढ़ कर सोते हुए नजर आते हैं.

पुलिस टीम पर दबाव बनाने को होटल पहुंचे थे पैरवीकार
जब जी मीडिया की टीम ने घटना को लेकर होटल में दस्तक दी तो पुलिसवाले हक्के-बक्के हो गए. पुलिस वालों ने बताया कि वे दोनों की गिरफ्तारी करके मोकामा लौट रहे हैं लेकिन रात में रास्ते में ही ठहर गए. वहीं उसी दौरान लड़का पक्ष के अधिवक्ता और दो हाईप्रोफाइल पैरवीकार जो कि खुद को पुलिस वाले बता रहे थे होटल में पहुंचकर आरोपियों को छुड़वाने की कवायद में जुट गए थे. इस दौरान जब बाहर से आए लोगों का वीडियो बनाने का प्रयास किया गया तो पटना से आए लोगों ने मीडिया का कैमरा भी रोका और तरह-तरह की बात करने लगे. जब पूरे मामले को लेकर बाढ़ के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मनोज कुमार तिवारी से बात की गई तो मनोज कुमार तिवारी ने मोबाइल पर बताया कि गिरफ्तारी तो हुई है लेकिन अभी इसे ग्राउंड रख आगे की प्रक्रिया चल रही है.

सवाल कई हैं जिनके जवाब पुलिस को देने हैं
- गिरफ्तार किए हुए आकाश उर्फ डंपी और जयमीत सिंह को मोकामा हवालात में क्यों नहीं रखा गया. ये कितने वीआईपी हैं कि उनके लिए रेस्टोरेंट की व्यवस्था की गई
- महिला प्रताड़ना और दहेज अधिनियम के अभियुक्त को जब गिरफ्तार किया गया तो उसे मोकामा थाना क्यों नहीं लाया गया. किन-किन लोगों का फोन आया, कितने बड़े अधिकारियों ने मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया
- इसी तरह की आपराधिक धारा वाले केस में साधारण परिवार के लोगों को जानवर की तरह घसीटते हुए पुलिसवाले हवालात से जेल का सफर करवाते हैं तो फिर जयमीत और आकाश के साथ अतिथि सत्कार क्यों किया जा रहा है

लड़की पक्ष ने लगया है पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप
बहरहाल, पुलिस का गिरेबान एक बार फिर शक के दायरे में है. पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल उठाया जा रहा है. आखिर इस तरह पुलिस एक आरोपी का  VIP सत्कार करने में क्यों जुटी हुई है. पुलिस ने जब गिरफ्तार की तो उसे जेल क्यों नहीं भेजा जा रहा है. जवाब पुलिस को देना है क्योंकि लड़की पक्ष के भाई ने इस बात का आरोप लगया है कि यूपी कैडर के आईपीएस पदाधिकारी लगातार लड़के को बचाने का प्रयास कर रहे हैं.