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बिहार: 'टिश्यू कल्चर' से तैयार अननास की उगाई जाएगी फसल, अच्छे पौधे किए जाएंगे तैयार

भागलपुर के बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने दो साल के प्रयास के बाद पौधे तैयार कर लिए हैं.

बिहार: 'टिश्यू कल्चर' से तैयार अननास की उगाई जाएगी फसल, अच्छे पौधे किए जाएंगे तैयार
किशनगंज में अब टिश्यू कल्चर लैब से तैयार अननास के पौधे उगाए जाएंगे. (फाइल फोटो)

किशनगंज: बिहार में अननास उत्पादन में अलग पहचान बना चुके किशनगंज में अब टिश्यू कल्चर लैब से तैयार अननास के पौधे उगाए जाएंगे. भागलपुर के बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने दो साल के प्रयास के बाद पौधे तैयार कर लिए हैं. बिहार कृषि विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी और प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ आर के सोहाने ने मीडिया को बताया कि बिहार में किशनंगज के कई क्षेत्रों में अननास की खेती बड़ी मात्रा में हो रही है, जिसमें उत्पादन बढ़ाने के लिए टिश्यू कल्चर से पौधे तैयार किए गए हैं. 

उन्होंने कहा कि टिश्यू कल्चर लैब में अननास के कंद में पाए जाने वाले ऊतक से इन पौधों को तैयार किया गया है. उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा गुणवत्ता वाले पौधों को तैयार करना है. 

 

वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल अनानास की फसल तैयार होने में 16 से 18 महीने का समय लगता है. इन पौधों में 12 महीने में ही फल तैयार हो जाएंगे. अभी सीमांचल के किशनगंज के अलावा अररिया में ही थोड़ी बहुत अननास की खेती होती है. कोसी क्षेत्र के सहरसा, सुपौल व मधेपुरा में अननास का उत्पादन नहीं होता है. टिश्यू कल्चर पौधे से कोसी और सीमांचल के किसानों को काफी फायदा होगा. 

आसानी से पौधों की उपलब्धता, समय और लागत में बचत से क्षेत्र में अननास की खेती के क्षेत्रफल में बढ़ोतरी होगी. अननास की खेती किशनगंज से निकलकर पूरे कोसी और सीमांचल सहित अन्य इलाके में लाभकारी हो सकेगी.

टिश्यू कल्चर लैब के एक वैज्ञानिक बताते हैं कि फिलहाल पौधों की दो वेरायटी तैयार की गई है. उन्होंने कहा कि प्रत्येक पौधे पर करीब पांच रुपये की लागत आती है. उल्लेखनीय है कि यहां पिछले पांच वषरें से केले के भी पौधे तैयार किए जा रहे हैं. 

किशनगंज जिले के ठाकुरगंज एवं पोठिया प्रखण्डों में अननास की व्यवसायिक खेती की जाती है. किशनगंज जिले की मिट्टी एवं जलवायु अननास की खेती के लिए बहुत ही उपयुक्त मानी जाती है. (इनपुट: IANS से भी)