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जयप्रकाश नारायण की जयंती पर नीतीश कुमार ने दी श्रद्धांजलि, PM मोदी ने भी किया ट्वीट

पटना के आयकर गोलंबर पर आयोजित समारोह में नीतीश कुमार के साथ बिहार के उपमुख्मंत्री सुशील मोदी सहित कई नेता शामिल हुए. इस दौरान लोकनायक की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई. 

जयप्रकाश नारायण की जयंती पर नीतीश कुमार ने दी श्रद्धांजलि, PM मोदी ने भी किया ट्वीट
जयप्रकाश नारायम की जयंती पर राज्यकीय कार्यक्रम का आयोजन.

पटना: लोकनायक जयप्रकाश नारायण (Jaiprakash Naryana) की जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) सहित कई नेताओं ने ट्वीट कर श्रद्धांजलि अर्पित की है. बिहार में इस मौके पर राज्यकीय समारोह का आयोजन किया गया. पटना के आयकर गोलंबर पर आयोजित समारोह में राज्यपाल फागू चौहान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ बिहार के उपमुख्मंत्री सुशील मोदी सहित कई नेता शामिल हुए. इस दौरान लोकनायक की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई.

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जयप्रकाश नारायण को याद करते हुए अपने ट्वीट में लिखा, 'मां भारती के सच्चे सपूत लोकनायक जयप्रकाश नारायण को उनकी जन्म-जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि उन्होंने स्वतंत्रता संघर्ष में अपना बहुमूल्य योगदान तो दिया ही, आजादी के बाद लोकतंत्र की रक्षा में भी अतुलनीय भूमिका निभाई. उनका त्याग और समर्पण हम सबके लिए सदा प्रेरणास्रोत रहेगा.'

वहीं, नीतीश कुमार ने अपने ट्वीट में लिखा, 'लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी समाज के पिछड़े एवं वंचित वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए समर्पित रहे. जयप्रकाश नारायण जी की जयंती के अवसर पर उन्हें सादर नमन एवं श्रद्धांजलि.'

जयप्रकाश नारायण का जीवन
लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को बिहार के सारण के सिताब दियारा में हुआ था. छपरा के रिविलगंज प्रखंड के सिताब दियारा के लाला टोला में जेपी का बचपन बीता. बचपन से ही जयप्रकाश नारायण मेधावी छात्र थे. महज 18 साल की उम्र में जेपी का विवाह बिहार के बड़े गांधीवादी नेता बृजकिशोर बाबू की पुत्री प्रभावती देवी से हुआ. 1922 में उच्च शिक्षा के लिए जयप्रकाश नारायण अमेरिका चले गए. 1922-1929 के बीच जेपी ने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में समाज-शास्त्र का गहन अध्ययन किया.

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1929 में जब जेपी अमेरिका से लौटे तो उस वक्त गांधीजी की अगुवाई में बिहार में स्वाधीनता संग्राम अपने परवान पर था. भारत लौटने पर जयप्रकाश नारायण का संपर्क पंडित जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी से हुआ. 1932 में देश के अलग-अलग हिस्सों में आंदोलन की अगुवाई जयप्रकाश नारायण ने की. जेपी को 1932 में मद्रास से गिरफ्तार कर लिया गया. 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब कांग्रेस के सभी बड़े नेता जेल में डाल दिए गए तो जंग-ए-आजादी में नेतृत्व का संकट पैदा हो गया. उस वक्त जयप्रकाश नारायण हजारीबाग की सेंट्रल जेल से फरार हो गए और आंदोलन में नई जान आ गई.

1975 में जब देश में आपातकाल की घोषणा हुई तब जयप्रकाश नारायण के साथ देश के करीब 600 बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया. गांधी शांति प्रतिष्ठान के कमरे से लोकनायक जयप्रकाश नारायण को गिरफ्तार कर लिया गया. उस वक्त जेपी के साथ मौजूद थे चंद्रशेखर जो AICC के सदस्य थे बाद में देश के प्रधानमंत्री बने. जेल में जेपी की तबीयत खराब हो गई और उन्हें सात महीने बाद रिहा कर दिया गया. आखिरकार लोकतंत्र पर आपातकाल की मंडराती काली छाया को जयप्रकाश नारायण ने करारी शिकस्त दी.