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PMCH में एक ही कंपनी की दवा लिखने को लेकर जूनियर डॉक्टरों ने किया हड़ताल

जूनियर डॉक्टर को जबरन मेटालाइफ कंपनी की दवा मरीजों को लिखने का दबाव बनाते हैं और जो डॉक्टर इस दवा को नहीं लिखते हैं उनपर करवाई कर परीक्षा में फेल कर दिए जाते हैं.

PMCH में एक ही कंपनी की दवा लिखने को लेकर जूनियर डॉक्टरों ने किया हड़ताल
पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल कर दी है.

पटनाः सूबे के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच अस्पताल के जूनियर डॉक्टर के हड़ताल पर जाने से मरीजों की परेशानी बढ़ने लगी है. जिन मरीजों को आज ऑपरेशन करने का समय दिया गया था उन्हें ऑपरेशन थियेटर से निकाल दिया गया, जिससे मरीज अब पीएमसीएच से पलायन करने की सोच रहे है. 

दरअसल, यह पूरा मामला ऑर्थोपेडिक्स के एचओडी विजय कुमार से जुड़ा है जो जूनियर डॉक्टर को जबरन मेटालाइफ कंपनी की दवा मरीजों को लिखने का दबाव बनाते हैं और जो डॉक्टर इस दवा को नहीं लिखते हैं उनपर करवाई कर परीक्षा में फेल कर दिए जाते हैं. जिसे लेकर पीएमसीएच के डॉक्टरो ने काम काज ठप्प कर हड़ताल पर जाने का फैसला लिया और ऑर्थोपेडिक्स के एचओडी विजय कुमार हटाने की मांग की है.

वहीं, डॉक्टरो ने बताया की जितने भी गरीब मरीज भर्ती होने आते है उन सभी मरीजों को एक ही कंपनी की दवा लिखी जाती है जो कि काफी महंगी होती है. मरीज के परिजन मेटलाइफ कंपनी की दवाइयां नहीं लाते हैं उनका इलाज बंद कर दिया जाता है. इसे देखते हुए जूनियर डॉक्टरो ने पुरजोर तरीके से विरोध कर जल्द से जल्द ऑर्थो के एचओडी को हटाने की मांग कर दिया है. 
 
वार्ड में भर्ती मरीज का जब पुर्जा देखा गया तो पाया गया कि सभी के पुर्जों पर एक ही कंपनी की दवाइयां लिखी गई है. इसका प्रमाण पुर्जा पर भरे पड़े हैं. जब मरीज के परिजनों से बात की गई उन्होंने बताया की जब डॉक्टरो का हांगमा शुरू हुआ तब पुर्जा को ही बदल दिया गया. इस बाबत मौजूदा नर्स से बात की गई तो कुछ भी बताने से इंकार कर दिया.

हड़ताल की बात सुनकर मरीज के परिजन अब सकते में आ गए हैं. इलाज बंद हो गया जिसे देखते हुए कई लोग मरीज के इलाज के लिए दूसरे अस्पताल की राह देखना शुरू कर दिया है. 

पीएमसीएच के डॉक्टरो के हरताल पर जाने कारण साफ हो गया की धरातल पर कुछ नहीं है. मीडिया के संज्ञान में आने के बाद डॉक्टरो की नींद खुलती है तब तक मरीज की समस्या सुनने वाला कोई नहीं है. अब सवाल यह है डॉक्टर की समस्या को लेकर मरीज की परेशानी बढ़ने लगी. फिहलाल न तो इस मामले में अधीक्षक कुछ बोल रहे हैं और न ही प्राचार्य बोल रहे हैं.