एक महीना बाद भी नहीं मिला अपहृत बच्चे का सुराग, डर से बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ा

इस घटना आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर घंटों बबाल काटा था. पुलिस ने दो दिनों के अंदर बच्चे की बरामदगी का दावा किया था, लेकिन अब महीना बीतने को है, लेकिन पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं.

एक महीना बाद भी नहीं मिला अपहृत बच्चे का सुराग, डर से बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ा
अपहृत बच्चे का नहीं मलिा सुराग. (फाइल फोटो)

समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर (Samastipur) के मुसरीघरारी से 28 अक्टूबर से अपहृत 3 वर्षीय मासूम का लगभग एक महीना के बाद भी सुराग नहीं मिला है. पीड़ित परिवार इकलौते बेटे के सकुशल बरामदगी को लेकर जहां प्रशासन से गुहार लगा रहा है वहीं, घटना के बाद दहशत से गांव के दूसरे बच्चे भी स्कूल नहीं जा रहे हैं. पुलिस की कार्यशैली से ग्रामीणों में आक्रोश है. वहीं, पुलिस बच्चे की जल्द बरामदगी का सिर्फ दावा कर रही है.

आंखों में आंसू और हाथ जोड़कर एक मां अपने एकलौते चिराग की बरामदगी के लिए गुहार कर रही है. आपको बता दें कि 28 अक्टूबर को मुसरीघरारी थाना क्षेत्र के हुणडहिया गांव में बसवाड़ी में कुछ बच्चों के साथ खेल रहे तीन वर्ष के रंजन का बाइक सवार दो की संख्या में अपराधियों ने अपहरण (Kidnapping) कर लिया था.

इस घटना आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर घंटों बबाल काटा था. पुलिस ने दो दिनों के अंदर बच्चे की बरामदगी का दावा किया था, लेकिन अब महीना बीतने को है, लेकिन पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं. पुलिस से फरियाद कर रही मां का कहना है कि पुलिस अब तक कुछ नहीं कर पा रही है. अगर पैसे वाले होते तो शायद बच्चा अब तक घर लौट आया होता.

वहीं, अपहृत बच्चे के चाचा का कहना है कि एक महीने बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है .पुलिस उनसे सुराग मांग रही है. अगर उन्हें कोई जानकारी होती तो वो खुद बच्चे को ढूंढ लेते. तभी तो कानून का सहारा खोज रहे हैं. शायद गरीब होना अभिशाप है.

तीन साल के बच्चे के अपहरण होने के एक महीना बाद भी कोई सुराग नहीं मिलने से परिवार के साथ-साथ अब इलाके के लोग भी किसी अनहोनी की आशंका से डरे सहमे हैं. गांव के बच्चे डर से स्कूल नहीं जा रहे हैं. इलाके के लोगों का तो अब पुलिस पर से भरोसा ही खत्म हो गया है.

इस मामले पर दरभंगा प्रक्षेत्र के आईजी पंकज दराद का कहना है कि यह काफी गंभीर मामला है. इस तरह की घटना जिले में पहले सामने नहीं आई थी. वो खुद इस मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. घटना के बाद पुलिस के द्वारा उस क्षेत्र के सीसीटीवी को खंगालने की कोशिश की, लेकिन किसी में भी कोई साक्ष्य नहीं मिला. आसपास के दूसरे जिलों में इस तरह के पुराने इतिहास नहीं मिले हैं. फिर भी प्रयास जारी है. बच्चे के माता-पिता काफी निर्धन हैं, ऐसे में किसी को इस अपहरण से कोई फायदा नहीं मिल सकता है. ऐसा प्रतीत होता है कि बच्चे को बाल तस्करी या फिर मानव अंग के अवैध व्यपार के गिरोह के द्वारा भी अपहरण किया गया हो. पुलिस सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है.