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नीतीश कुमार और अब्दुलबारी सिद्दिकी की मुलाकात पर RJD बोली, 'खाने पर बुलाना गलत नहीं'

नीतीश कुमार बाढ़ प्रभावित दरभंगा जिले के अलीनगर प्रखंड का दौरा कर रहे थे. इसी दौरान वो अब्दुल बारी सिद्धिकी के घर रूपसपुर गए और वहां करीब 10 मिनट ठहरे थे.

नीतीश कुमार और अब्दुलबारी सिद्दिकी की मुलाकात पर RJD बोली, 'खाने पर बुलाना गलत नहीं'
नीतीश कुमार ने अब्दुलबारी सिद्दिकी से मुलाकात की थी.

पटनाः राष्ट्रीय जनता दल के बड़े नेताओं में शामिल और राज्य के पूर्व वित्त मंत्री अब्दुलबारी सिद्दिकी के घर पर नीतीश कुमार का जाना सियासी चर्चा का विषय बन गया है. हालांकि, राज्य की तीन बड़ी पार्टियां राजद, जदयू और बीजेपी ने इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया है.

दरअसल नीतीश कुमार बाढ़ प्रभावित दरभंगा जिले के अलीनगर प्रखंड का दौरा कर रहे थे. इसी दौरान वो अब्दुल बारी सिद्धिकी के घर रूपसपुर गए और वहां करीब 10 मिनट ठहरे, दोनों नेताओं की इस मुलाकात के क्या सियासी संदर्भ होंगे. इस पर राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग ढंग से सोच सकते हैं, लेकिन राजद ने इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया है. 

राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी के मुताबिक बिहार के 12 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं और नीतीश कुमार ने इन जिलों का दौरा किया. इसी दौरान वो अब्दुलबारी सिद्धिकी के घर पर गए. संभव है कि अब्दुलबारी सिद्दिकी ने उन्हें खाने पर बुलाया हो. कोई भी नेता किसी भी दल के नेता से मिल सकता है. इसका कोई दूसरा अर्थ नहीं है. 

जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी शिवानंद तिवारी के सुर में सुर मिलाया है. राजीव रंजन ने भी कहा है कि नीतीश कुमार पहले भी पार्टी लाइन से ऊपर उठकर बिहार के विकास के लिए दूसरे दलों के नेताओं से राय लेते रहे हैं और इसी क्रम में अब्दुलबारी सिद्दिकी के घर पहुंचे. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि राजद और जदयू में कुछ चल रहा है. जदयू का बीजेपी के साथ गठबंधन अटूट है. लेकिन राजनीतिक शिष्टाचार जारी रहना चाहिए और बिहार की राजनीति में अब्दुलबारी सिद्दिकी की अलग छवि है. 

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता अजीत चौधरी ने भी कुछ इसी तरह की प्रतिक्रिया दी है. अजीत चौधऱी के मुताबिक, बाढ़ जैसे मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. नीतीश कुमार एक अलग तरह के नेता हैं. वो अच्छे लोगों से राय लेने में पीछे नहीं हटते हैं. दरभंगा दौरे पर थे नीतीश कुमार थे और इसी दौरान दोनों की मुलाकात हुई. लेकिन कोई दूसरा अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए.

बतौर अजीत चौधरी, दोनों दलों का गठबंधन अटूट है और राजद को गलतफहमी नहीं पालना चाहिए. मिथिलाचंल में अब्दुलबारी सिद्धिकी का मजबूत वजूद है. कुछ दिन पहले पूर्व केन्द्रीय मंत्री अली अशरफ फातमी भी राजद छोड़ चुके हैं. हालांकि नीतीश कुमार का अब्दुलबारी सिद्दिकी के घर जाना एक राजनीतिक संयोग है लेकिन अगर अब्दुलबारी सिद्दिकी का मन भी अली अशरफ फातमी की तरह डोला तो मिथिलांचल में राजद को झटका लगना तय है.