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रांची: विधानसभा भवन के उद्घाटन में नहीं बुलाए जाने से विपक्ष नाराज, सियासत शुरू

भारतीय जनता पार्टी संसदीय लोकतंत्र को मानती नहीं है क्योंकि बिना विपक्ष के लोकतंत्र नहीं हो सकता. जब नेता प्रतिपक्ष है और मान्यता प्राप्त नेता प्रतिपक्ष है तो आप उनके साथ क्या व्यवहार कर रहे हैं. यह जो नीती हो रही है वह संसदीय जनतंत्र के लिए खतरा है और यह गंभीर विषय है. 

रांची: विधानसभा भवन के उद्घाटन में नहीं बुलाए जाने से विपक्ष नाराज, सियासत शुरू
कार्यक्रम के इनविटेशन कार्ड में नेता प्रतिपक्ष का नाम नहीं छापे जाने को लेकर सियासत शुरू हो गई है.

रांची: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड के नए विधानसभा भवन का उद्घाटन कर राज्य की जनता को एक तोहफा दिया है. लेकिन वहीं, कार्यक्रम के इनविटेशन कार्ड में नेता प्रतिपक्ष का नाम नहीं छापे जाने को लेकर सियासत शुरू हो गई है.

नेता प्रतिपक्ष का नाम इनविटेशन में नहीं होने की वजह से जेएमएम के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए संसदीय लोकतंत्र को नहीं मानने का आरोप लगाया है. सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि बीजेपी ने यह जो मजाक किया है वह संसदीय लोकतंत्र के लिए खतरा है और प्रधानमंत्री ने यहां आकर संसदीय लोकतंत्र के साथ उपहास किया है. वही स्पेशल सत्र पर सुप्रियो भट्टाचार्य का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी ही नही और जब वे इसके हिस्सेदार ही नही तो क्या स्तर?

 

भारतीय जनता पार्टी संसदीय लोकतंत्र को मानती नहीं है क्योंकि बिना विपक्ष के लोकतंत्र नहीं हो सकता. जब नेता प्रतिपक्ष है और मान्यता प्राप्त नेता प्रतिपक्ष है तो आप उनके साथ क्या व्यवहार कर रहे हैं. यह जो नीती हो रही है वह संसदीय जनतंत्र के लिए खतरा है और यह गंभीर विषय है. प्रधानमंत्री ने आकर उपहास किया है. संसदीय लोकतंत्र के साथ मुझे मालूम ही नहीं है कि विधानसभा का गठन हो रहा है. जब हम वहां के हिस्सेदार ही नहीं है तो ऐसा करके प्रहासन नहीं करना चाहिए था.

वहीं, विधानसभा के उद्घाटन पर कांग्रेस ने सरकार की तारीफ तो की लेकिन इनविटेशन कार्ड में नेता प्रतिपक्ष का नाम नहीं होने पर बीजेपी को घेरा भी. उन्होंने इससे बीजेपी की जानबूझकर की गई गलती बताया है. कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने चाहे आप कितना भी बड़ा काम कर ले लेकिन आपकी मानसिकता छोटी होगी तो काम सफल नहीं हो सकता.

सदन से जुड़े किसी भी काम में नेता प्रतिपक्ष का नाम होना जरूरी था. यह गलती सरकार की तरफ से जानबूझकर की गई होगी. सदन के अंदर कोई बात होगी तो नेता प्रतिपक्ष का उसमें जिक्र होना चाहिए कहीं ना कहीं सरकार से यह जानबूझकर की गई गलती है क्योंकि तमाम लोगों का नाम इनविटेशन कार्ड में है जिनका योगदान नहीं भी रहा है लेकिन नेता प्रतिपक्ष का नाम नहीं होना जानबूझकर की गई एक गलती है.

मामले पर बीजेपी का साफ तौर पर कहना है कि जेएमएम इस मामले पर झूठ बोल रही है .क्योंकि कई बार नेता प्रतिपक्ष से संपर्क साधने की कोशिश की गई लेकिन कोई प्रतिक्रिया नही आई और ऐसे में अगर उनका नाम आमंत्रण पत्र में दे दिया जाता और वो नहीं आते तो शर्मिंदगी उठानी पड़ती. वहीं, प्रतुल शाहदेव ने कहा कि इस वजह से जेएमएम के विधायकों में भी अंदरखाने नाराजगी है कि उन्हें इस ऐतेहासिक पल का गवाह नही बनने दिया गया.