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बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि बिहार में जितने भी सिविल संसाधन उपलब्ध थे, उन्हीं के आधार पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विकास कार्य किए. आज राज्य की जनता इन कामों से संतुष्ट है. उन्होंने कहा कि गठबंधन की राजनीति में जेडीयू की भूमिका हमेशा की तरह ही रहेगी. सीट बंटवारे को लेकर भी कोई समस्या नहीं है. उन्होंने साफ किया कि एनडीए में "बड़े भाई-छोटे भाई" का सवाल नहीं है, बल्कि सब "जुड़वा भाई" की तरह काम कर रहे हैं.
अशोक चौधरी ने बताया कि जब नीतीश कुमार ने बिहार की बागडोर संभाली थी, तब राज्य का प्रति व्यक्ति आय बहुत कम था और लगभग 40% लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन बिता रहे थे. आज यह आंकड़ा घटकर 16% रह गया है. यानी करीब 30% लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठ चुके हैं. उन्होंने कहा कि अभी बिहार की प्रति व्यक्ति आय 66 हजार रुपये है, और सरकार का लक्ष्य इसे एक लाख रुपये तक पहुंचाना है. उन्होंने यह भी बताया कि अब तक 3 लाख करोड़ रुपये का एमओयू उद्योग विभाग ने साइन किया है, जिसके जरिए आने वाले समय में बड़े पैमाने पर उद्योग लगेंगे.
उन्होंने कहा कि पहले बिहार में बिजली की स्थिति बेहद खराब थी. लोग मोबाइल चार्ज करने के लिए 10 किलोमीटर दूर जाते थे और जेनरेटर से चार्जिंग के लिए 10 रुपये तक देने पड़ते थे. लेकिन आज गांव-गांव में 22 से 23 घंटे बिजली उपलब्ध है. उन्होंने बताया कि जब नीतीश कुमार ने काम संभाला था, तब प्रतिदिन बिजली खपत सिर्फ 700 मेगावॉट थी, जबकि आज यह बढ़कर 8800 मेगावॉट हो चुकी है. यह बदलाव बिहार में बुनियादी ढांचे के विकास का प्रमाण है.
अशोक चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार ने "हर घर नल का जल", "पोशाक योजना", "हर घर बिजली", "हर घर नाली-गली", "स्वच्छ शौचालय मिशन" और "जीविका योजना" जैसी योजनाएं शुरू कीं. इन योजनाओं से लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आया. उन्होंने दावा किया कि आज 96% घरों में शौचालय हैं, जबकि पहले यह संख्या सिर्फ 3% थी.
अशोक चौधरी ने कहा कि बिहार सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दे रही है. "मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना" के तहत महिलाओं को सीधा आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सिर्फ 2-6 महीने में लाखों महिलाओं को इसका लाभ मिलेगा. यह देश की पहली ऐसी योजना है, जिसे किसी राज्य सरकार ने लागू किया है.
तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए अशोक चौधरी ने कहा कि वे केवल यह कहते हैं कि हमारी योजनाएं कॉपी की जा रही हैं, जबकि सच यह है कि योजनाओं के मास्टर नीतीश कुमार हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि लालू-राबड़ी के शासन में विकास की कोई तस्वीर नहीं थी. उस समय मुख्यमंत्री आवास में "लौंडा नाच" होता था और "लाठी-घुमावन-तेल पिलावन रैली" निकलती थी. जबकि नीतीश कुमार ने IIT, IIM और कई विश्वविद्यालय स्थापित किए.
उन्होंने कहा कि विपक्ष संविधान और आरक्षण खतरे में होने की बात कहकर जनता को गुमराह करता है. वोटर लिस्ट पर भी विपक्ष ने भ्रम पैदा किया कि नाम काटे जा रहे हैं. अशोक चौधरी ने कहा कि 98% लोग पहले ही मतदाता सूची में शामिल हैं, सिर्फ 2% नाम डुप्लीकेट या मृतकों के हैं जिन्हें हटाया जा रहा है. इसलिए "वोट चोरी" की बात पूरी तरह झूठ है.
अशोक चौधरी ने कहा कि दलित समाज की आवाज को मजबूत बनाने के लिए नीतीश कुमार ने सबसे पहले एकल पद पर आरक्षण दिया. अनुसूचित जाति और जनजाति को इससे बड़ा लाभ मिला. उन्होंने कहा कि यही कारण है कि बिहार की सामाजिक इंजीनियरिंग की मिसाल देशभर में दी जाती है.
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