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I love Mohammad Row: उत्तर प्रदेश के बरेली में शुक्रवार को "आई लव मोहम्मद" विवाद को लेकर जमकर हंगामा हुआ, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें और पथराव हुआ. इस घटना ने अब बिहार की राजनीति को भी हिलाकर रख दिया है, जहां अलग-अलग राजनीतिक दलों - एआईएमआईएम, कांग्रेस, राजद और जदयू के नेताओं ने इस मुद्दे पर बयानबाजी कर इसे चुनावी रंग दे दिया है. आईये जानते हैं क्या है "आई लव मोहम्मद" विवाद और कसने क्या कहा?
उत्तर प्रदेश के बरेली में शुक्रवार को "आई लव मोहम्मद" को लेकर भारी बवाल हो गया. जुमे की नमाज के बाद मस्जिद के पास बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और नारेबाजी करने लगे. यह प्रदर्शन इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा के आह्वान पर हुआ था. शुरुआत में यह शांतिपूर्ण नजर आया लेकिन धीरे-धीरे स्थिति बेकाबू हो गई. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, पथराव शुरू हो गया और हालात हिंसक हो गए.
पुलिस की मानें तो भीड़ ने अचानक पत्थरबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद हालात काबू करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा. इस घटना में 10 पुलिसकर्मी घायल हुए और कई गाड़ियां तोड़फोड़ का शिकार हुईं. पुलिस ने मौके से करीब 50 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है. झड़पों के चलते आसपास के इलाकों में अफरातफरी मच गई, खासकर शैक्षणिक संस्थानों जैसे खलील हायर सेकेंडरी स्कूल के पास वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया.
विवाद कहां से शुरू हुआ?
"आई लव मोहम्मद" नारा सबसे पहले 4 सितंबर को कानपुर में एक जुलूस के दौरान सामने आया था. जुलूस में लोगों ने पैगंबर मोहम्मद के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करने के लिए पोस्टर और स्लोगन का इस्तेमाल किया. समर्थकों का कहना था कि यह उनके लिए धार्मिक आस्था दिखाने का शांतिपूर्ण तरीका है. लेकिन जल्द ही यह मुद्दा राजनीतिक और धार्मिक बहस का केंद्र बन गया.
शंकराचार्य का बयान
इस मामले पर सासाराम से शंकराचार्य ज्योतिपीठेश्वर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि वास्तविक प्यार दिखावे की चीज नहीं होती. अगर कोई किसी से सच्चा प्रेम करता है तो उसका ढिंढोरा पीटने की जरूरत नहीं है. उनका कहना है कि आस्था और प्रेम को सार्वजनिक प्रदर्शन के रूप में बदलना उचित नहीं है.
ओवैसी का बयान
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने "आई लव मोहम्मद" विवाद पर भाजपा पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी मोहब्बत की विरोधी है. कोई पैगंबर से मोहब्बत करे या कोई महादेव से, यही भारत की असली खूबसूरती है. ओवैसी का कहना है कि बीजेपी इस मोहब्बत को भी राजनीति का मुद्दा बना रही है.
कांग्रेस का रुख
कांग्रेस के एमएलसी प्रेमचंद मिश्रा ने कहा कि पूरा विवाद अनावश्यक रूप से खड़ा किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब बिहार विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए जानबूझकर प्लांट किया गया है. प्रेमचंद मिश्रा ने कहा कि सभी धर्मों के लोगों को अपनी-अपनी आस्था के अनुसार पूजा करने की स्वतंत्रता है. सबसे अच्छा होगा कि लोग "आई लव माई इंडिया" का नारा दें, जिससे सभी को संतोष मिलेगा.
राजद का हमला
राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि संविधान सभी धर्मों को धार्मिक स्वतंत्रता देता है, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार का रवैया इस स्वतंत्रता को छीनने जैसा है. उन्होंने कहा कि "आई लव मोहम्मद" कहने पर जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है, उससे लगता है कि वहां संवैधानिक मूल्यों का पालन नहीं हो रहा है.
जदयू की प्रतिक्रिया
जदयू एमएलसी नीरज कुमार ने कहा कि "आई लव मोहम्मद" या "आई लव गॉड्स" हमारी परंपरा का हिस्सा है. इसमें नफरत नहीं, बल्कि सद्भाव देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि ईश्वर- अल्लाह तेरो नाम, सबको सहमत दे भगवान- यही भारतीय संस्कृति है. उन्होंने ओवैसी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे राजनीति में शोर मचाते रहते हैं, लेकिन जनता इन बातों को गंभीरता से नहीं लेती.
"आई लव मोहम्मद" नारे को लेकर चल रहा विवाद अब सिर्फ धार्मिक आस्था का विषय नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बयानबाजी का भी केंद्र बन गया है. यूपी से शुरू हुआ यह मामला बिहार की राजनीति तक पहुंच गया है. सभी दल इसे अपने-अपने तरीके से भुना रहे हैं, जिससे साफ है कि चुनावी मौसम में ऐसे मुद्दे और गरमाएंगे.
इनपुट- सुन्दरम
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