Election Commission Changed Vote Counting Rules: बिहार चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने वोटों की गिनती की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है. अब ईवीएम के अंतिम दो राउंड की गिनती तभी शुरू होगी, जब बैलेट पेपर की गिनती पूरी हो जाएगी. पहले की व्यवस्था में ईवीएम गिनती, डाक मतपत्रों की गिनती पूरी हुए बिना भी आगे बढ़ सकती थी.
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Bihar Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. इसे लेकर अब चुनाव आयोग में हलचल तेज हो गई है. जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयोग का डेलिगेशन अक्टूबर के पहले सप्ताह में बिहार का दौरा करेगा और चुनावी तैयारियों का जायजा लेगा. इलेक्शन कमीशन के डेलिगेशन के वापस लौटते ही किसी भी दिन बिहार चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया जाएगा. चुनाव आयोग ने बिहार चुनाव से पहले वोटों की गिनती की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव कर दिया है. अब ईवीएम के अंतिम दो राउंड की गिनती तभी शुरू होगी, जब बैलेट पेपर की गिनती पूरी हो जाएगी. चुनाव आयोग का कहना है कि इससे डाक मतपत्रों की गिनती की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित बनाया गया है.
निर्वाचन आयोग का कहना है कि पिछले 6 महीनों में 29 अहम सुधारात्मक कदम उठाए जा चुके हैं. वहीं 30वां कदम डाक मतपत्रों (Postal Ballots/ETPBs) की गिनती की प्रक्रिया को और सरल व स्पष्ट करना है. इस बार मतगणना की प्रक्रिया दो हिस्सों में होगी. पहली- डाक मतपत्र/ETPBs की गिनती होगी और दूसरी- ईवीएम के वोटों की गिनती. हमेशा की तरह पहले पोस्टल बैलेट पेपर के वोटों की गिनती की जाएगी और इसके बाद ईवीएम खुलेंगी. पहले की व्यवस्था में ईवीएम गिनती, डाक मतपत्रों की गिनती पूरी हुए बिना भी आगे बढ़ सकती थी. इस बार ऐसा नहीं होगा. अब ईवीएम/VVPAT की दूसरी आखिरी (penultimate) राउंड की गिनती तभी होगी जब डाक मतपत्रों की गिनती पूरी हो जाएगी.
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अक्टूबर के दूसरे सप्ताह के शुरुआत में ही बिहार चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है. इससे पहले निर्वाचन आयोग ने बिहार सरकार के मुख्य सचिव और बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर से अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के आदेश दिए हैं. निर्वाचन आयोग ने अपने पत्र में लिखा कि पिछले तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों के स्थानांतरण के आदेश दिए हैं और इस कार्रवाई की रिपोर्ट 6 अक्टूबर तक मांगी है. आयोग ने साफ कहा है कि चुनाव कार्य से जुड़ा कोई भी अधिकारी अपने गृह जिला में पदस्थापित नहीं रहेगा. इस आदेश के दायरे में डीएम, डीडीसी, बीडीओ, सीओ, जोनल आइजी, रेंज डीआइजी, राज्य सशस्त्र पुलिस के कमांडेंट और एसएसपी सहित अन्य रैंक के पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं.