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Supreme Court On Bihar SIR: बिहार में वोटर लिस्ट में हुई एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज यानी सोमवार (08 सितंबर) को बड़ी अहम सुनवाई हुई. आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने आधार को लेकर चुनाव आयोग को बड़ा आदेश दिया. सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान आधार को मान्य दस्तावेजों में शामिल करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने आदेश दिया कि मतदाता सूची में किसी मतदाता को शामिल/बहिष्कृत करने के उद्देश्य से किसी व्यक्ति की पहचान स्थापित करने के लिए आधार कार्ड को भी ध्यान में रखा जाए. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हम साफ कर दे रहे हैं कि आधार सिर्फ PLACE OF RESIDENCE के प्रमाण के लिए है न कि नागरिकता तय करने के लिए.
कोर्ट के आदेश के मुताबिक, अब अकेले आधार कार्ड के आधार पर ही कोई वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए दावा कर सकता है. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग आधार का सत्यापन कर सकता है कि आधार सही या नहीं. कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अकेले आधार को भी 11 मान्य दस्तावेजों के बराबर माना जाए. सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी अवैध प्रवासियों को अनुमति देने के लिए नहीं कह रहा है. हम जानते हैं कि आधार पहचान का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं. मान लीजिए कि यह 12वां दस्तावेज है, तो इसमें क्या समस्या है?
इस पर चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि वे अवैध प्रवासियों के लिए ऐसा चाहते हैं. जिस पर जस्टिस सूर्यकांत ने उन्हें टोकते हुए कहा कि कोई नहीं चाहता कि अवैध प्रवासी मतदाता सूची में शामिल हों. जिसके बाद चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि बिहार के 99.6% नागरिकों ने पहले ही 11 सूचीबद्ध दस्तावेजों में से एक पेश किया है. चुनाव आयोग के अनुसार, 7.24 करोड़ में से 99.6 प्रतिशत ने पहले ही दस्तावेज जमा कर दिए हैं. फिलहाल, कोर्ट ने आधार को 12वें दस्तावेज के रूप में मान्यता देने का अंतरिम आदेश दिया है.
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