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Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर इस बार कांग्रेस पार्टी बड़ी गंभीर नजर आ रही है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी काफी लंबे समय से बिहार में एक्टिव हैं. उन्होंने हाल ही में प्रदेश में वोटर अधिकार यात्रा निकाली थी. इस यात्रा को मिले अपार समर्थन से कांग्रेसी काफी उत्साहित हैं. कांग्रेसियों को आगामी विधानसभा चुनाव में उम्मीद की एक किरण नजर आ रही है और इसी से अपने सियासी जीवन का अंधेरा मिटाने की कोशिश में जुटी है. यही वजह है कि पार्टी ने आजादी के बाद पहली बार बिहार में CWC की बैठक कर रही है. तेलंगाना में पार्टी लंबे समय से सत्ता से बाहर थी और CWC मीटिंग के बाद ही उसने सत्ताधारी BRS को धूल चटा दी थी. पार्टी को उम्मीद है कि तेलंगाना वाला नुस्खा बिहार में भी काम कर जाएगा. हालांकि, कांग्रेस पार्टी को यह समझना होगा कि यह तेलंगाना नहीं बल्कि बिहार है.
तेलंगाना नहीं है बिहार
तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी का केसीआर की पार्टी BRS से सीधा मुकाबला था. 10 साल से सत्ता में काबिज BRS के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी हावी थी. बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को लेकर युवा वोटर केसीआर से काफी नाराज था. यही वजह थी कि BRS का वोट शेयर 10% गिरा, जबकि कांग्रेस का उतना ही बढ़ा. वहीं बिहार में कांग्रेस पार्टी बीते 35 साल अपना मुख्यमंत्री नहीं बना सकी है. 1090 से वह राजद के साथ गठबंधन में है और इस गठबंधन को राजद सुप्रीमो लालू यादव अपने हिसाब से चलाते रहे हैं. राजद के साथ गठबंधन में कांग्रेस लगातार कमजोर हुई है. गठबंधन में रहने बावजूद लालू यादव ने कांग्रेस से मुस्लिम वोटर्स को छीनने में कोई नरमी नहीं बरती. वहीं सवर्ण और दलित वोटर एनडीए की ओर चले गए.
बिहार में कांग्रेस की राह आसान नहीं
कांग्रेस के लिए बिहार और तेलंगाना में सबसे बड़ा अंतर यहां है कि यहां पार्टी को अपना खोया हुआ वोट बैंक वापस पाना है, जो राजद को कतई रास नहीं आएगा. सियासी जानकारों के मुताबिक, सिर्फ बैठकों से पार्टी का पुराना जनाधार लौटना भी बड़ा मुश्किल है. उनके हिसाब से कांग्रेस की ओर से यह पूरी कवायद सिर्फ और सिर्फ प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा है, ताकी उसे ज्यादा से ज्यादा सीटें मिल सकें. बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में बिहार की 243 सीटों में कांग्रेस पार्टी को 70 सीटें ही मिली थीं, जबकि राजद 144 पर लड़ी थी. 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के हिस्से में सिर्फ 9 सीटें आई थीं. वहीं इस बार लालू यादव कांग्रेस को सिर्फ 50 सीटें देना चाहते हैं, जबकि राजद 140 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ सकती है.
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