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Bihar Chunav 2025: बिहार की चुनावी राजनीति अब शबाब पर जाती दिख रही है. विपक्ष की ओर से राहुल गांधी 16 दिनों की वोटर अधिकार यात्रा निकालकर लौट चुके हैं. वोटर अधिकार यात्रा को लेकर इस बात की समीक्षा हो रही है कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और मुख्यमंत्री पद के दावेदार तेजस्वी यादव ने कहीं बड़ी चूक तो नहीं कर दी है, क्योंकि यात्रा में राहुल गांधी ही छाए रहे थे. अब चूक हो भी गई तो आगे की सोचनी है. पीछे मुड़कर क्या देखना. भाजपा और एनडीए से लड़ाई तो लड़नी ही है. वोटर अधिकार यात्रा जब दरभंगा पहुंची तो वहां अलग ही कहानी हो गई. कार्यक्रम में पीएम मोदी और उनकी मां को गालियां दी गईं और पीएम मोदी ने चीन से लौटने के बाद जीविका दीदियों को संबोधित करते हुए इस गाली को पूरे बिहार की मां बहनों की गाली बता दिया. लगे हाथ भाजपा ने बिहार बंद बुला लिया. पीएम मोदी और उनकी मां को दी गई गाली प्रकरण और तूल न ले ले, इसके लिए लालू प्रसाद यादव बीच में कूद पड़े और बिहार के चुनावी रण को बिहारी बनाम गुजराती वाला रंग देने में जुट गए.
देखें लालू और तेजस्वी यादव के बिहारी बनाम गुजराती पोस्ट्स
लालू प्रसाद यादव ने एक्स पर पोस्ट किया, 'क्या प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपाइयों को आदेश दिया है कि आज पूरे बिहार और बिहारियों की माताओं-बहनों और बेटियों को गाली दो? गुजराती लोग बिहारियों को इतने हल्के में ना लें? यह बिहार है. बीजेपी के गुंडे-मव्वाली सम्मानित शिक्षिकाओं, राह चलती महिलाओं, छात्राओं, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पत्रकारों को गालियां दे रहे है. उनके साथ हाथापाई कर दुर्व्यवहार कर रहे है? क्या यह उचित है? शर्मनाक!'
इससे पहले कई मौकों पर लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव अलग अलग कार्यक्रमों में इस बात को दोहरा चुके हैं कि यह बिहार है और यहां उड़ती चिड़िया को हल्दी लगाने का काम किया जाता है. दरअसल, वोटर अधिकार यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सामने
फीका पड़ने के बाद लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव बिहार की लड़ाई को बिहारी अस्मिता से जोड़ रहे हैं.
कुछ दिनों पहले तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया था कि गुजरात भाजपा के नेता अब बिहार में वोटर बन रहे हैं. तेजस्वी का आरोप था कि भाजपा नेता भीखूभाई दलसानिया ने लोकसभा चुनाव में गुजरात में रहकर मतदान किया था. अब उनका नाम पटना के वोटर लिस्ट में जोड़ दिया गया है और गुजरात के वोटर लिस्ट से उनका नाम कट गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपाई घूम घूमकर अपना नाम जुड़वा रहे हैं और वोट दे रहे हैं. जबकि यह प्रक्रिया 5 साल की होती है.
जब चुनाव आयोग ने 25 जून को बिहार में वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर शुरू किया था, तब लालू प्रसाद यादव ने कहा था, दो गुजराती मिलकर 8 करोड़ बिहारियों के वोट छीनने की कोशिश कर रहे हैं. इन दोनों गुजरातियों को बिहार, संविधान और लोकतंत्र से सख्त नफरत है. जाओ और आवाज उठाओ. संविधान और लोकतंत्र बचाओ.
वोटर अधिकार यात्रा जब गोपालगंज पहुंची थी, तब तेजस्वी यादव ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था, बिहार को कोई बिहारिये चलाएगा, कोई गुजरात से आकर बिहार चलाएगा? हम बिहार के लिए नहीं करेंगे तो किसके लिए करेंगे. देश को बिहारी बनाता है और बिहार को भी आगे बढ़ाएगा. इससे पहले एसआईआर पर बोलते हुए तेजस्वी यादव ने कहा था, दो गुजराती लोग हैं, उन्हीं के कहने पर वोटर लिस्ट में नाम आएगा या कटेगा.
देश को चला रहे दो गुजराती और दो पूंजीपति
केवल बिहार ही नहीं, पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से भी दो गुजरातियों के खिलाफ आवाज उठ रही है. सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने आरोप लगाया है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बेईमानी कर 45 सीटें जीती हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश को दो गुजराती और दो पूंजीपति चला रहे हैं और सरकार केवल उन्हीं दोनों के लिए काम कर रही है. आम लोगों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है.
राहुल गांधी ने जातीय जनगणना की मेरिट पर उठाए थे सवाल
इससे पहले विपक्षी दलों के नेता लोकसभा चुनाव के पहले से पूरे देश में जातीय जनगणना कराने की मांग कर रहे थे. इसके साथ ही ये दल देश के संसाधनों पर आबादी के हिसाब से हिस्सेदारी भी मांग रहे थे. इनका नारा भी था, जिसकी जितनी भागीदारी उसकी उतनी हिस्सेदारी. ये विपक्षी दल राजनीति को धर्म के बजाय जाति आधारित बनाना चाहते थे और बहुत हद तक सफल भी हुए. तभी तो भाजपा बहुमत से दूर रह गई और लोकसभा की 240 सीटों पर आकर अटक गई.
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव ने जातीय जनगणना को भुनाने का प्लान बना लिया था, लेकिन ऐन मौके पर राहुल गांधी ने इस प्लान को पंचर कर दिया था. राहुल गांधी ने बिहार की जातीय जनगणना को फर्जी करार देते हुए तेलंगाना की जातीय जनगणना को असली करार दिया था. इस तरह तेजस्वी यादव जिस बात का श्रेय ले रहे थे, राहुल गांधी ने उसे फुस्स कर दिया था.
जाति वाली राजनीति भाजपा तो धर्म वाला पॉलिटिक्स विपक्ष के लिए भारी
भारतीय जनता पार्टी की स्थापना काल से ही उस पर धर्म की राजनीति करने के आरोप लगते रहे हैं. हालांकि भाजपा भी इससे पीछे नहीं हटती और वह भी बहुसंख्यकवाद की राजनीति करने के दावे करती रहती है. सभी जानते हैं कि धर्म वाली राजनीति भाजपा को फायदा देती है और जाति आधारित राजनीति उसे नुकसान पहुंचाती है. कई मौकों पर यह साबित भी हो चुका है. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भाजपा हिन्दुत्व हितैषी के रूप में उभरी है और पूरे देश में उसे इस बात का फायदा मिला है. बहुसंख्यक लोग एकमुश्त वोट भाजपा को करते हैं और विरोधी दल चित हो जाते हैं.
इसलिए विपक्ष की कोशिश चुनावों को जाति आधारित कराने की होती है. इसलिए राम मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम का सभी विपक्षी दलों ने यह कहकर विरोध किया था कि यह भाजपा का कार्यक्रम है और नरेंद्र मोदी ने इस इवेंट को हाईजैक कर लिया है. विपक्षी दलों की जातिगत जनगणना की मांग इसी कोशिश की एक कड़ी है. विपक्षी दल इसलिए दलितों, पिछड़ों, अतिपिछड़ों की राजनीति के पक्षधर हैं तो भाजपा इसे समग्रता में लेते हुए हिंदू हित की बात करती है.
...तो इसलिए हो रहा 'बिहारी बनाम गुजराती'
विपक्ष की यह कोशिश लोकसभा चुनाव में तो सफल हुई, लेकिन हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में यह कोशिश फेल हो गई. यहां भाजपा की रणनीति कामयाब हो गई थी. इसलिए अब बिहार की लड़ाई को बिहारी बनाम गुजराती बनाने की कोशिश की जा रही है.
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