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मैं बीड़ी हूं. आमलोग तो मेरे दीवाने हैं लेकिन खासलोगों की नजर में मेरी इमेज अच्छी नहीं है. इसमें कोई दोराय नहीं कि मैं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हूं. लेकिन कौन से तंबाकू स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं. फिर भी मेरे साथ भेदभाव किया जाता है. तंबाकुओं में मैं 'दलित' हूं, इसलिए मुझे हेय दृष्टि से देखा जाता है. हालांकि मेरी सारी शिकायत उस समय दूर हो गई, जब फिल्म 'ओंकारा' में मेरे नाम से गाना लांच किया गया था- 'बीड़ी जलइले जिगर से पिया...' मेरे लिए यह प्राइड मोमेंट था. गुलजार साहब ने अपनी कलम से मुझे लेकर गाना लिखा. विशाल भारद्वाज जी ने संगीत दिया था तो सुखबिंदर सिंह और सुनिधि चौहान ने अपने मधुर आवाज से इस गाने को जबर्दस्त लोकप्रिय बनाया था. हालांकि एक बार फिर मेरी बेइज्जती की जा रही है. सभी तंबाकू प्रोडक्ट्स पर जीएसटी रेट बढ़ाए जा रहे हैं और मैं 18 प्रतिशत पर ठिठका हुआ हूं. ये तो मेरी घोर बेइज्जती है. अरे भाई, जो काम बाकी तंबाकू से होता है, वहीं काम मैं भी करता हूं तो फिर मेरे से इतना भेदभाव क्यों? ये ऐसी ही बात है, जैसे दलितों तक विकास की रोशनी लेट से पहुंचती है. बाकी तंबाकू मेरे से आगे निकल गए और मैं जहां पर था, वहीं पर अटक गया. मैं तंबाकुओं में दलित हूं, इसलिए मेरी जगहंसाई वाले पोस्ट भी किए जा रहे हैं. पोस्ट करने वाला पोस्ट करते समय क्या सोच रहा होगा, यह उसके पोस्ट को देखकर समझा जा सकता है. ऐसा मेरे साथ इसलिए होता है, क्योंकि मैं गरीबों की तंबाकू की जरूरत को पूरा करता हूं. मैं तो इस उम्मीद में हूं कि कभी तो मेरे दिन आएंगे, लेकिन अब लगता है कि एक आस रह गई है, वो भी न टूट जाए...
अब मेरे बारे में भी जान लीजिए
मैं यानी बीड़ी तेंदु के पत्ते से बनता हूं, जिसका वैज्ञानिक नाम डायोस्पायरोस मेलानोक्सिलीन या फिर पिलियोस्टिग्मा रेसमोसम है. मेरी उत्पत्ति इंडियन सब कांटिनेंट में हुई है. बीड़ा शब्द से मेरी उत्पत्ति हुई है, जिसका अर्थ सुपारी और मसालों का मिश्रण, जो पत्तों में लिपटा होता है. मेरा उत्पादन और मेरी खपत तंबाकू के बाकी उत्पादों से कहीं ज्यादा है, लेकिन मेरा स्टैंडर्ड नहीं है, इसलिए इस पूंजीवादी दुनिया में भी मुझे उतना महत्व नहीं मिलता. एक अनुमान के मुताबिक, भारत में कुल तंबाकू खपत में से 48 प्रतिशत हिस्सा मेरा है.
स्वदेशी के प्रचार ने मुझे आगे बढ़ाया
मेरा आविष्कार 17वीं शताब्दी के अंत में भारत में तंबाकू की खेती से शुरू हुआ था. तब मजदूरों ने तंबाकू को तेंदु के पत्तों में लपेटकर बीड़ी बनाई थी और सुलगाई भी थी. 1930 आते आते मैं बड़े उद्योग के रूप में तब्दील हो चुका था. आजादी की लड़ाई के दौरान स्वदेशी के प्रचार प्रसार के चलते भी मेरे फैलाव में काफी मदद मिली. मुझे लोग अपना मानते थे, इसलिए मेरे से ही तंबाकू की जरूरतें पूरी करने लगे. 20वीं सदी तक तो मैं लाभ वाले धंधे में शामिल हो चुका था और मेरी लोकप्रियता चरम पर पहुंच गई थी. कई नई कंपनियां शुरू हुईं और नए ब्रांड भी मार्केट में आ गए थे.
आजादी के बाद बीड़ी उद्योग कुटीर उद्योग में बदल गया. इसके बाद महिलाएं घरों में बीड़ी बनातीं और पुरुषों की जिम्मेदारी थी कि वे बाजार में मुझे सप्लाई करें. मैं सर्वसुलभ था, इसलिए मेरा रेट कम था और हर आदमी मेरा सेवन कर सकता था. हालांकि सर्वसुलभ होना मेरे लिए नुकसानदायक साबित हो गया. अमीर लोग लोग मुझे हेय दृष्टि से देखने लगे अपने से लोक स्टैंडर्ड मानने लगे. मेरी तुलना में सिगरेट की पहुंच सुलभ नहीं थी, इसलिए वह डिमांडेबल हो गया और मैं अधिक लोगों की पसंद के बाद भी अपनी रेटिंग गंवाता चला गया.
कैसे होता है मेरा निर्माण
कैंची, धातु के स्टेंसिल गाइड की मदद से तेंदु के पत्तों को काटा जाता है. इसके बाद एक मजदूर कम से कम रोजाना 1,000 बीड़ी बनाते हैं. आज के समय में 30 लाख से ज्यादा मजदूर मेरे निर्माण में लगे हुए हैं. हालांकि एक उद्योग के रूप में लगातार बढ़त हासिल करने के बाद भी मुझे बनाने वाले मजदूरों की मजदूरी में लगातार गिरावट देखी जा रही है. इसका एक कारण मजदूरों का सर्वसुलभ होना भी है. मुझे बनाने में 8 से 15 ग्राम तक तंबाकू का उपयोग होता है.
दरअसल, तंबाकू की फसल पकने के तुरंत बाद ये बीड़ी निर्माण के लिए तैयार हो जाते हैं. गर्मी के दिनों में इन्हें जमा कर बंडल बनाया जाता है और रैपर के रूप में इस्तेमाल करने से पहले पत्तियों को तीन से लेकर 6 दिनों तक धूप में सुखाया जाता है.
मेरा सेवन करना सिगरेट जितना आसान नहीं है. मुझमें आग बनी रहे, इसके लिए बार बार कश खींचना पड़ता है.
अमेरिका और ब्रिटेन में मेरे 'दीवाने'
भारत से अलग अमेरिका की बात करें तो वहां मुझे सिगरेट की तरह ही ट्रीट किया जाता है और सिगरेट की तरह ही टैक्स लगाया जाता है. वहां मेरे साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाता है. मेरे रैपर पर वहां टैक्स स्टाम्प और सर्जन जनरल की चेतावनी भी अंकित होना जरूरी है. भारत में तो सब बीड़ी एक तरह की ही होती है, लेकिन अमेरिका में फ्लेवर्ड बीड़ी भी चलन में आ गया था. हालांकि बाद में उसे बैन कर दिया गया था. ब्रिटेन में नियम है कि मुझे खरीदने के लिए यूजर को 18 साल का होना अनिवार्य है.
अंत में सबसे जरूरी बात
मेरा सेवन करने वालों, मैं आपको बता दूं कि मैं बहुत अच्छी चीज नहीं हूं. मुझमें ज्यादा निकोटिन, कार्बन मोनोआक्साइड और टार छोड़ता हूं और इससे मुंह के कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. मेरा सेवन करने से कैंसर, हार्ट अटैक और फेंफड़ों की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए मुझसे बचकर रहें.
(Disclaimer: जीएसटी में बीड़ी पर कम टैक्स और बिहार से इसकी तुलना किए जाने के संदर्भ में यह आर्टिकल परिहास के रूप में लिखा गया है. इसमें कोई दोराय नहीं कि कोई भी तंबाकू स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. इसलिए जी न्यूज किसी भी प्रकार के तंबाकू को प्रोमोट नहीं करता.)
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