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Bihar Politics: राहुल गांधी वोटर अधिकार यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न कराकर दिल्ली लौट चुके हैं. जब वे यात्रा के दौरान बिहार में रहे, तेजस्वी यादव साइड हीरो के रूप में नजर आए. तेजस्वी यादव आगे बढ़कर राहुल गांधी को बड़ा भाई और प्रधानमंत्री पद के दावेदार बताते रहे और बदले में राहुल गांधी से ऐसा ही आशीर्वाद खुद के लिए उम्मीद कर रहे थे, लेकिन कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष उतने उदार नहीं निकले. राहुल गांधी की एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें मुख्यमंत्री पद के चेहरे के बारे में पूछने पर वह मुंह पर उंगली रखकर चुप्पी का संदेश देते दिख रहे हैं. अब तेजस्वी यादव एक नई यात्रा पर निकल रहे हैं. यह उनकी खुद की यात्रा होगी. यात्रा का नाम होगा- बिहार अधिकार यात्रा. कहने को तो यह यात्रा उन जिलों में जाएगी, जो वोटर अधिकार यात्रा के दौरान कवर नहीं हो पाए थे, लेकिन इस यात्रा के दौरान तेजस्वी यादव साइड हीरो के रूप में नहीं, बल्कि खुद को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर स्थापित करने की कोशिश करेंगे. शायद इसलिए मुजफ्फरपुर के पिछले दौरे में उन्होंने कहा था कि बिहार की सभी 243 सीटों पर तेजस्वी यादव चुनाव लड़ेगा.
तेजस्वी यादव ने ये बातें मुजफ्फरपुर में कीं, जहां से कांग्रेस के सीटिंग विधायक हैं. अब जाहिर सी बात है. अगर मुजफ्फरपुर में यह बात होगी तो कांग्रेस को मिर्ची जरूर लगी होगी. तेजस्वी यादव यह बात पटना में बोल सकते थे. इस बयान से साफ जाहिर होता है कि महागठबंधन के घटक दलों के बीच जो सीट शेयरिंग की बातचीत चल रही है, उसमें नूराकुश्ती भी हो रही है. हालांकि देखा जाए तो तेजस्वी यादव ने जो भी कुछ बोला है, उसमें गलत कुछ भी नहीं है. महागठबंधन के नेता और मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में तेजस्वी यादव ने बस खुद को आगे रखने की कोशिश की है, लेकिन इस कोशिश को कांग्रेस की मान्यता मिलनी अभी बाकी है.
तेजस्वी यादव जब जी मीडिया के कान्क्लेव 'अबकी बार किसकी सरकार' में आए थे तो उनसे इस बाबत सवाल पूछे गए थे. तब उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में राहुल गांधी ने रणनीतिक रूप से चुप्पी साधी थी और मेरे कहने पर ही उन्होंने ऐसा किया था. तेजस्वी यादव ने तब कहा था, अभी मेरे नाम का ऐलान मत कीजिए. बाद में सोच समझकर इसका ऐलान किया जाएगा. लेकिन अचानक से मुजफ्फरपुर में उनका यह कहना कि बिहार की सभी 243 सीटों पर तेजस्वी यादव ही चुनाव लड़ेगा, ऐसा लगता है कि राहुल गांधी की चुप्पी से उपजी खीझ को वे मिटाने की कोशिश कर रहे हैं. खासतौ से मुजफ्फरपुर में जाकर, जहां पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी.
ऐसा पहली बार नहीं है, जब किसी बड़े नेता ने इस तरह का दावा किया हो. तेजस्वी यादव से पहले दिल्ली में अरविंद केजरीवाल, चिराग पासवान ने भी इस तरह के दावे किए थे. और तो और, पीएम मोदी ने भी 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में खुद के लिए ऐसा ही दावा किया था. तेजस्वी यादव इस रणनीति के जरिए खुद को नीतीश कुमार के बरक्श पेश करने की भी कोशिश कर रहे हैं. 'अबकी बार किसकी सरकार' कार्यक्रम में आए प्रशांत किशोर से जब सवाल पूछा गया था कि अगर आपको नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव में से किसी एक को चुनना हो तो किसे चुनेंगे तो उनका जवाब था- कभी भी नीतीश कुमार. प्रशांत किशोर का कहना था कि नीतीश कुमार बुजुर्ग हो चुके हैं. उनका स्वास्थ्य अच्छा नहीं चल रहा है. इसका मतलब यह थोड़े है कि तेजस्वी यादव उनके विकल्प बन जाएं. उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार ने सादगी की राजनीति की है और पूरे राजनीतिक जीवन में आज तक कोई उन पर दाग नहीं लगा पाया है.
प्रशांत किशोर ही नहीं, बिहार में नीतीश कुमार को लेकर अधिकांश लोगों की सोच प्रशांत किशोर की सोच से मिलती जुलती है. तेजस्वी यादव उसी को काउंटर करने में लगे हुए हैं. इसलिए उनके राज को राक्षस राज बताते हैं. रोजाना अपराध की बुलेटिन जारी करते हैं. अस्पतालों में रात को छापा मारते हैं और कमियां गिनाते हैं. तेजस्वी यह भी कहते हैं कि नीतीश कुमार भ्रष्टाचार के भीष्म पितामह बन गए हैं. ऐसा करके तेजस्वी यादव नीतीश कुमार से नहीं, सार्वजनिक जीवन में अब बनी उनकी छवि से लड़ाई लड़ते प्रतीत होते हैं. तेजस्वी यादव और उनके पिता पूर्व मुख्यमंत्री और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव भी मानते हैं कि नीतीश कुमार की छवि को तोड़ना इतना आसान नहीं है, लेकिन कोशिश करने में क्या जाता है? इसलिए तेजस्वी यादव खुद को सभी 243 सीटों पर खुद के लड़ने की बात कर रहे हैं.
खैर, अब बात कर लेते हैं तेजस्वी यादव की 16 सितंबर से 20 सितंबर तक चलने वाली बिहार अधिकार यात्रा की. यह वोटर अधिकार यात्रा की तरह बहुत लंबी चलने वाली यात्रा नहीं है. 5 दिनों की यह यात्रा जहानाबाद से शुरू होगी और वैशाली में खत्म होगी. जहानाबाद से शुरू होकर यात्रा नालंदा, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, समस्तीपुर से गुजरेगी और वैशाली में इसका समापन होगा. जिन इलाकों से यात्रा गुजरेगी, वहां जनसंवाद कार्यक्रम भी होंगे. एक नजर में तो ऐसा लगता है कि तेजस्वी यादव उन इलाकों को कवर करने की कोशिश करेंगे, जहां वोटर अधिकार यात्रा न गुजरी हो, लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि वोटर अधिकार यात्रा शुरू होने के बाद महागठबंधन पर कमजोर हुई पकड़ को तेजस्वी यादव मजबूत करना चाहते हैं. वोटर अधिकार यात्रा में तो तेजस्वी यादव बढ़ चढ़कर शामिल हुए थे, लेकिन देखना यह है कि बिहार अधिकार यात्रा को कांग्रेस नेता उतना ही तवज्जो देंगे, जितना राजद नेता ने उनकी यात्रा को दिया था.
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