Bihar Chunav 2025: पूरी लड़ाई मुस्लिम वोटों की है. आज की तारीख में बिहार में सीमांचल के कुछ इलाकों को छोड़ दें तो मुसलमान पूरी तरह राष्ट्रीय जनता दल के साथ हैं. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को यही बात खलती है, क्योंकि वे मुसलमानों की राजनीति करते हैं और चाहते हैं कि देश के सभी मुसलमान उनको अपना नेता मानें.
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नई दिल्ली: 'मैं किसी के दरवाजे खुलने या बंद होने का इंतजार नहीं कर रहा हूं. यह हमारी विचारधारा का मामला था, इसलिए अपनी ओर से लालू प्रसाद यादव को महागठबंधन में शामिल होने का प्रस्ताव भेजा था.' एआईएमआईएम के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को महागठबंधन में शामिल होने के लिए लिखे पत्र पर मंगलवार को अपनी सफाई देते हुए यह बात कही. राजद के आरोपों पर पलटवार करते हुए ईमान ने कहा, "भाजपा की बी-टीम कौन है, यह बात तो समय बता देगा.
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ईमान ने राजद को 2005 का वो किस्सा याद करने की नसीहत देते हुए कहा, जब राजद को 75 और रामविलास पासवान की पार्टी को 29 सीटें मिली थीं, तब रामविलास पासवान ने किसी मुसलमान को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की थी. राजद ने भाजपा के हाथों में सरकार जाने दी, लेकिन अल्पसंख्यक समाज के किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाना जरूरी नहीं समझा. अब उनलोगों को ऐसी भाषा शोभा नहीं देती."
अख्तरुल ईमान ने कहा, "यह सुनिश्चित करना था कि बिहार में धर्मनिरपेक्ष वोट विभाजित न हों. इसलिए हमने उनलोगों को भी प्रस्ताव दिया, जिन्होंने पहले हमें नुकसान पहुंचाया था. हमारे प्रस्ताव पर उन्होंने गंभीरता से विचार नहीं किया. हमलोग किसी की बैसाखी पर चलने वाले नहीं हैं और अकेले चलकर यहां तक पहुंचे हैं. आगे भी अकेले चलने को तैयार हैं."
ईमान ने आगे कहा, "मैं अल्पसंख्यक, दलित, पिछड़े और शोषित वर्ग से यही अपील करता हूं कि अगर उनके वोट से सरकार बन सकती है या गिर सकती है तो वे अपने वोट का इस्तेमाल खुद के लिए करें, ताकि उनकी तकदीर बदल पाए."
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उन्होंने कहा, "मेरा लक्ष्य बिहार के अल्पसंख्यक, दलित, पिछड़े और शोषित वर्ग को इंसाफ दिलाना है. मंदिर तोड़ने और मस्जिद बनाने के नाम पर राजनीति बहुत हो गई है. दलितों का उत्थान और शोषितों को सम्मान दिलाने के लिए मैं लड़ाई लड़ रहा हूं."
-आईएएनएस