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Maner Assembly Seat Profile: बिहार की मनेर विधानसभा सीट पटना जिला और पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र में आती है. मुगलकाल में यह क्षेत्र इस्लामी शिक्षा का केंद्र हुआ करता था. सूफी संत मखदूम याह्या मनेरी के नाम पर ही इस जगह का नाम मनेर पड़ा. मनेर के लड्डू देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी प्रसिद्ध हैं. इस क्षेत्र में हल्दी छपरा संगम घाट है, जहां सोन नदी गंगा नदी से मिलती है. आईआईटी पटना , नीट पटना, ईएसआईसी हॉस्पिटल, बिहटा औद्योगिक पार्क, समेत प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के साथ-साथ कई संस्थान इस विधानसभा की खूबसूरती बढ़ा रहे हैं. यादव बाहुल्य यह विधानसभा सीट राजद का गढ़ माना जाती है.
सियासी इतिहास
1951 में मनेर विधानसभा सीट का गठन हुआ था और लगातार यादवों ने अपना प्रभाव बनाए रखा है. यहां अब तक 18 चुनाव हो चुके हैं, जिनमें दो उपचुनाव शामिल हैं. इनमें से कांग्रेस को सात बार जीत हासिल हुई है, जबकि राजद लगातार पांच बार विजयी रही है. दो बार निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं. तो वहीं सीपीआई, जनता पार्टी, जनता दल और समता पार्टी ने एक-एक बार जीत दर्ज की है. इस सीट पर लंबे समय तक राम नगिना यादव के परिवार का कब्जा रहा. राम नगिना यादव और उनकी पत्नी रजमति देवी 2-2 बार विधायक रहें, फिर इसके बाद उनके बेटे श्रीकांत निराला को 4 बार विधानसभा जाने का सौभाग्य हासिल हुआ. 2005 से लगातार राजद के भाई वीरेंद्र जीत रहे हैं. 2020 में उन्होंने बीजेपी के निखिल आनंद को हराया था. इस बार लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने भाई वीरेंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है.
जातीय समीकरण
मनेर विधानसभा क्षेत्र के कुल मतदाताओं की संख्या 3 लाख 49 हजार 516 है. जिसमें पुरुष मतदाता की संख्या 1 लाख 84 हजार 176 और महिला मतदाता की संख्या 1 लाख 65 हजार 331 है. जबकि थर्ड जेंडर की संख्या 9 है. मनेर विधानसभा में जातीय समीकरण यह विधानसभा यादव बाहुबल क्षेत्र कहा जाता है. इस विधानसभा क्षेत्र में लगभग यादव जाति की 1 लाख 40 हजार मतदाता है. तो वही वैश्य जाति के 50 हजार मतदाता हैं. कोरी और कुर्मी मतदाताओं की संख्या 35 हजार है. जबकि महादलित जाति के 45 हजार मतदाता हैं. अल्पसंख्यक समुदाय के भी 25 हजार मतदाता हैं. वहीं राजपूत समुदाय के 20 हजार और भूमिहार समुदाय के 30 हजार मतदाता हैं.
इलाके की समस्याएं
मनेर विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या आर्सेनिक पानी की है. मनेर विधानसभा में 12 पंचायत के 30 गांव आर्सेनिक पानी पीने पर मजबूर हैं. यहां 221 वार्ड में आर्सेनिक पानी से मुक्ति दिलाने के लिए 2017 में वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट बैठाया गया था, जोकि अब तक शुरू नहीं हो सका. दूसरी समस्या कटाव से है. मनेर के तकरीबन 6 पंचायत में तेजी से हो रहा कटाव लोगों का चिंता का विषय बना हुआ है. मनेर विधानसभा क्षेत्र में एक भी डिग्री कॉलेज ना होने के कारण अब तक यहां के छात्र और छात्राओं को दानापुर और पटना पढ़ने के लिए जाना पड़ता है, जिसके लेकर लोगों में नाराजगी रहती है.
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