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Bihar Chunav 2025: बिहार में राहुल गांधी की मेहनत पर कांग्रेस पार्टी के नेता और कार्यकर्ता पानी फेरते नजर आ रहे हैं. जो बची हुई कसर थी, वह इंडिया ब्लॉक में शामिल दल पूरी किए दे रहे हैं. दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा से कांग्रेस की मौजूदा स्थिति में सुधार हुआ था. इस यात्रा से कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में नए जोश का संचार हुआ. जनता में भी कांग्रेस को लेकर धारणा बदल रही थी, लेकिन तभी दरभंगा में मंच से पीएम मोदी की दिवंगत मां को गाली देने का कांड कर दिया गया. इस घटना को लेकर पीएम मोदी के भावुक भाषण ने पूरा गेम बदल दिया. प्रधानमंत्री के भाषण के बाद अब महिलाओं में इस घटना को लेकर खासी नाराजगी देखने को मिल रही है.
आधी आबादी को नाराज करने के बाद भी कांग्रेसी नेता नहीं सुधरे और कांग्रेस पार्टी की केरल इकाई के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने बीड़ी को बिहार से जोड़ दिया. सत्ताधारी एनडीए को बैठे बिठाए एक और हथियार मिल गया और एनडीए नेताओं ने इसे तुरंत बिहार के स्वाभिमान से जोड़कर महागठबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां का अपमान किया गया और अब बिहार का अपमान किया जा रहा है, जो कांग्रेस पार्टी के असली चरित्र को दिखाता है. विवाद बढ़ता देख राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी कांग्रेस से माफी मांगने की मांग कर दी. जिसके बाद कांग्रेस नेता ने ट्वीट डिलीट किया और माफी मांगी. हालांकि, तबतक बहुत देर हो चुकी थी. बिहारी अस्मिता से खिलवाड़ को लेकर सोशल मीडिया में कांग्रेस के प्रति नाराजगी साफ देखने को मिल रही है.
बात यहीं खत्म नहीं हुई. इसके बाद जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में स्थित हजरतबल मस्जिद के उद्घाटन पट्टिका में छपे अशोक चिह्न को अराजक तत्वों ने तोड़ दिया. खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मस्जिद में लगी पट्टिका पर राष्ट्रीय चिह्न लगाने पर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि मजहबी चीज में अशोक चिह्न लगाने की क्या मजबूरी बनी थी? उन्होंने साफ कहा कि मस्जिद में इस तरह का पत्थर लगाने की जरूरत ही नहीं थी. जम्मू-कश्मीर में भले ही उमर अब्दुल्ला की सरकार हो, लेकिन उसमें कांग्रेस सहयोगी है. राष्ट्रवाद की पिच पर बैटिंग कर रही बीजेपी को एक और मौका मिल गया और उसने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलने में जरा सी भी देर नहीं लगाई.
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने इसे भी बिहारी अस्मिता से जोड़ दिया. उन्होंने कहा कि अशोक चक्र, सम्राट अशोक और बिहार की गौरवशाली विरासत है. बिहार और भारत कभी इस अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगा. जेडीयू नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि अशोक चिह्न हमारे राष्ट्र का प्रतीक है. जो कोई भी इसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, उसे दंडित किया जाना चाहिए. अशोक चिह्न का अपमान तो कांग्रेस की सहयोगी राजद को भी बर्दास्त नहीं हुआ और तेजस्वी यादव ने भी इस मामले में दोषियो पर कार्रवाई की मांग की है. मामला तूल पकड़ने पर कश्मीर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर 26 लोगों की गिरफ्तार जरूर की, लेकिन कांग्रेस की चुप्पी को बिहारियों को निराश किया है. फिलहाल, इन घटनाओं का चुनाव पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा.
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