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Mahagathbandhan EBC Nyay Sankalp: बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Vidhan Sabha Chunav 2025) से पहले बिहार में 'अति पिछड़ा' की सियासत तेज हो गई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कोर वोटबैंक में सेंधमारी के लिए राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने मिलकर 'अति पिछड़ा न्याय संकल्प' लॉन्च किया है, जिसमें 10 बड़े वादे किए गए हैं. अति पिछड़ा न्याय संकल्प जारी करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि आज भी देश में अतिपिछड़ा, पिछड़ा, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक वर्गों को जितनी भागीदारी मिलनी चाहिए, वो नहीं मिलती है. राहुल और तेजस्वी ने वादा किया कि सत्ता में आने के बाद इन घोषणाओं को लागू किया जाएगा. आइये देखते हैं कि महागठबंधन के 'न्याय संकल्प' के वादे क्या हैं और उन्हें जमीनी हकीकत पर उतारना कितना आसान होगा.
वादा नंबर 1- 'अतिपिछड़ा अत्याचार निवारण अधिनियम' पारित किया जाएगा.
हकीकत- अगर ये कानून बन गया तो यादव सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. जाहिर सी बात यह कि तेजस्वी यादव अपने कोर वोटर को नाराज करना नहीं चाहेंगे.
वादा नंबर 2- अतिपिछड़ा वर्ग के लिए पंचायत तथा नगर निकाय में वर्तमान 20% आरक्षण को बढ़ाकर 30% किया जाएगा.
हकीकत- जातीय जनगणना के बाद यह संभव हो पाएगा, क्योंकि बिहार की जातीय गणना को राहुल गांधी खुद ही फर्जी ठहरा चुके हैं. तो उस जातीय जनगणना के आधार पर इसका निर्धारण कैसे हो सकता है.
वादा नंबर 3- आबादी के अनुपात में आरक्षण की 50% की सीमा को बढ़ाने हेतु, विधान मंडल पारित कानून को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा.
हकीकत- केंद्र सरकार की ओर से देशव्यापी जातीय जनगणना के बाद का विषय है.
वादा नंबर 4- नियुक्तियों की चयन प्रक्रिया में "Not Found Suitable" (NFS) जैसी अवधारणा को अवैध घोषित किया जाएगा.
हकीकत- अगर इस तरह के फैसले लिए गए तो कोर्ट में चुनौती मिल सकती है.
वादा नंबर 5- अतिपिछड़ा वर्ग की सूची में अल्प या अति समावेशन (under- or over-inclusion) से संबंधित सभी मामलों को एक कमेटी बनाकर निष्पादित किया जाएगा.
हकीकत- इससे अति पिछड़ा वर्ग में पहले से शामिल जातियां नाराज हो सकती हैं.
वादा नंबर 6- अतिपिछड़ा, अनुसूचित जाति, जनजाति तथा पिछड़ा वर्ग के सभी आवासीय भूमिहीनों को शहरी क्षेत्रों में 3 डेसिमल तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 5 डेसिमल आवासीय भूमि उपलब्ध कराई जाएगी.
हकीकत- बिहार में जबतक भूमि सुधार कानून पूरी तरह से लागू नहीं होगा, तब इसे अमलीजामा पहनाना संभव नहीं होगा.
वादा नंबर 7- UPA सरकार द्वारा पारित 'शिक्षा अधिकार अधिनियम' (2010) के तहत निजी विद्यालयों में नामांकन हेतु आरक्षित सीटों का आधा हिस्सा अतिपिछड़ा, पिछड़ी जाति, अनुसूचित जाति और जन-जाति के बच्चों हेतु निर्धारित किया जाएगा.
हकीकत- आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल यही वादा करके दिल्ली की सत्ता में आए थे, लेकिन 10 साल के शासन के बाद भी इसे लागू नहीं कर पाए और सत्ता से बाहर भी हो गए.
वादा नंबर 8- 25 करोड़ रुपयों तक के सरकारी ठेकों/आपूर्ति कार्यों में अतिपिछड़ा, अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जाति के लिए 50% आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा.
हकीकत- इस प्रावधान से राजद के कोर वोटर खास तौर पर यादव जाति के लोग नाराज हो सकते हैं, क्योंकि अभी ज्यादातर ठेकों में उनकी दावेदारी सबसे ज्यादा रहती है. लिहाजा इसे भी लागू कर पाना आसान नहीं होगा.
वादा नंबर 9- संविधान की धारा 15(5) के अंतर्गत राज्य के सभी निजी शिक्षण संस्थानों के नामांकन हेतु आरक्षण लागू किया जाएगा.
हकीकत- कांग्रेस-राजद की ओर से अरविंद केजरीवाल का वादा चुराने की कोशिश की गई है. हालांकि, जब दिल्ली जैसे और समृद्ध प्रदेश में यह नहीं हो सका तो बिहार जैसे जटिल राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले राज्य में इसे लागू कर पाना आसान नहीं होगा.
वादा नंबर 10- आरक्षण की देखरेख के लिए उच्च अधिकार प्राप्त आरक्षण नियामक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा और जातियों की आरक्षण सूची में कोई भी परिवर्तन केवल विधान मंडल की अनुमति से ही संभव होगा.
हकीकत- इसे बहुमत वाली कोई भी सरकार लागू कर सकती है.