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Lalu Yadav Family Political Drama: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजद अध्यक्ष लालू यादव के परिवार में भूचाल आया हुआ है. एक-एक करके परिवार के सदस्य दूर हो रहे हैं और इसका मुख्य कारण हैं- संजय यादव. वैसे तो संजय यादव सिर्फ राजद के राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन पार्टी में अब उनकी हैसियत नंबर दो के नेता की है. उनसे भिड़ने का खामियाजा लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और बेटी रोहिणी आचार्य को भुगतना पड़ गया है. तेज प्रताप यादव को पार्टी के साथ-साथ परिवार से भी बाहर कर दिया गया है. वहीं रोहिणी आचार्य भी नाराज होकर सिंगापुर लौट चुकी हैं. अब सवाल यह है कि संजय यादव को इतनी ताकत कहां से मिल रही है? लालू यादव के होते हुए कोई बाहरी नेता कैसे पार्टी पर कब्जा कर सकता है? क्या लालू परिवार में चल रही इस उठापटक का असर बिहार विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है?
कौन हैं संजय यादव?
हरियाणा के महेंद्रगढ़ ज़िले के नांगल सिरोही गांव में जन्मे संजय यादव की तेजस्वी यादव से मुलाकात क्रिकेट के मैदान में हुई और यहीं पर दोनों की दोस्ती परवान चढ़ी. तेजस्वी जब सियासत में आए तो संजय को अपना सलाहकार बना लिया. पार्टी में जैसे-जैसे तेजस्वी का कद बढ़ा, संजय यादव का रुतबा भी बढ़ता गया. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आज राजद पार्टी में संजय यादव की हैसियत नंबर दो के नेता की है. उनसे भिड़ने का खामियाजा लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और बेटी रोहिणी आचार्य को भुगतना पड़ गया है. राजद पार्टी के समर्थकों के अनुसार, पार्टी कार्यकर्ताओं से लालू यादव मिलने में ज्यादा दिक्कत नहीं होती थी. राजद अध्यक्ष हर शाम को अपने आवास पर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात करते थे, जबकि तेजस्वी से मिलने के लिए संजय यादव की परमिशन लेनी पड़ती है. इससे राजद का वोटर नाराज हो रहा है. सियासी गलियारों में चर्चा तो यह भी कि संजय यादव अब राजद के बिग बॉस बनना चाहते हैं और इसके लिए वो सारे परिवार वालों को एक-एक करके साइड कर रहे हैं.
राजद में संजय यादव की भूमिका?
आरजेडी को सोशल मीडिया पर लाने का श्रेय संजय यादव को जाता है. राजद सूत्रों के मुताबिक, अभी पार्टी की सोशल मीडिया को जो टीम ऑपरेट हो रही है, उसमें ज्यादातर लोग संजय यादव से ही जुड़े हुए हैं. इस टीम को पोलो रोड यानी तेजस्वी यादव के बंगले से निर्देशित किया जाता है. खास बात यह है कि लालू यादव खुद सोशल मीडिया के विरोधी हुआ करते थे. वह जनता से डायरेक्ट जुड़ने में भरोसा करते थे, लेकिन अब पार्टी को सोशल मीडिया पर प्रमोट करने पर भरोसा किया जा रहा है. सोशल मीडिया के सहारे तेजस्वी यादव को बड़ा नेता बनाने की कोशिश हो रही है. सियासी जानकारों के मुताबिक, राजद की असफलता की यह सबसे बड़ी वजह है. पार्टी नेता अब जनता के बीच में जाने से ज्यादा सोशल मीडिया पर अपना प्रचार-प्रसार करने में बिजी रहते हैं.
क्या विधानसभा चुनाव में असर पड़ेगा?
लालू परिवार में उठापटक का बिहार चुनाव पर भी असर देखने को मिल सकता है. लालू परिवार में इस अनबन को भुनाने में एनडीए कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. बीजेपी तो खुलकर तेज प्रताप और रोहिणी आचार्य का समर्थन कर रही है. बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि पहली बार देख रहा हूं कि एक पुत्री जिसने अपना गुर्दा दानकर पिता के जीवन की रक्षा की है, उसको माता-पिता पुत्र प्रेम में पड़कर बेटे के मित्र के कारण तिरस्कृत कर रहे हैं. बीजेपी सांसद ने आगे लिखा कि आज की बेटियां सशक्त भी हैं और सक्षम भी. वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि लालू जी की पार्टी में पहले दो बेटों में विवाद था. उन्होंने बड़े बेटे को पहले घर और फिर पार्टी से बाहर निकाल दिया. अब बेटा और बेटी में भी विवाद शुरू हो गया है. ये इनके परिवार का मामला है, इसको लेकर हमें कुछ ज्यादा नहीं कहना है.
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