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INDIA Alliance Seat Sharing Politics: बिहार की राजनीति में गठबंधन की गांठें कसने और ढीली होने का दौर जारी है. इसी गहमागहमी के बीच, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के राष्ट्रीय संरक्षक मुकेश साहनी ने ज़ी मीडिया के साथ एक विशेष बातचीत में बड़ा राजनीतिक दांव खेला है. उन्होंने दो टूक शब्दों में यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी ‘इंडिया’ ब्लॉक का हिस्सा तो है, लेकिन किसी भी सूरत में मजबूरी में नहीं.मुकेश साहनी ने अपने इस बयान से न केवल अपने वोट बैंक को एक स्पष्ट संदेश दिया है, बल्कि तेजस्वी यादव के सामने भी एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.
50+ का लक्ष्य
मुकेश साहनी ने गठबंधन के भीतर अपनी पार्टी की स्थिति को स्पष्ट करते हुए सीटों की संख्या पर अपनी मांग को मजबूती से रखा है. उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों में उनकी पार्टी को 50 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना है. उनकी यह मांग गठबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है. हालांकि, इस मांग के साथ ही मुकेश साहनी ने एक नरम रुख भी दिखाया. उन्होंने आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को अपना 'छोटा भाई' कहते हुए कहा कि उनके मुख्यमंत्री बनने के लिए सीटों की संख्या पर कुछ समझौता किया जा सकता है, लेकिन यह समझौता 50 सीटों से कम पर नहीं होगा. मुकेश साहनी यह जता रहे हैं कि यह मांग किसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के कारण नहीं, बल्कि तेजस्वी के मुख्यमंत्री बनने के सपने को पूरा करने के लिए जरूरी है. इस तरह, उन्होंने तेजस्वी और उनकी पार्टी पर परोक्ष रूप से दबाव बनाया है कि अगर वे सचमुच मुकेश साहनी के साथ हैं, तो उन्हें इस मांग को स्वीकार करना होगा.
तय हो चुका है 'सरकार का फॉर्मूला': मुख्यमंत्री तेजस्वी, उपमुख्यमंत्री ‘मल्लाह का बेटा’
मुकेश साहनी ने बातचीत में एक और बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया कि ‘इंडिया’ गठबंधन के अंदर भविष्य की सरकार का खाका लगभग तय हो चुका है. उनके अनुसार, यह पूरी तरह से तय है कि अगर गठबंधन सत्ता में आता है, तो तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे और उपमुख्यमंत्री के तौर पर ‘अति पिछड़ा और मल्लाह का बेटा’ ही काम करेगा.
विकासशील इंसान पार्टी=सरकार बनाने की 'गारंटी'
मुकेश साहनी ने कहा कि बिहार में विकासशील इंसान पार्टी को 'सरकार बनाने की गारंटी' के रूप में देखा जाता है. मुकेश साहनी का मानना है कि उनकी पार्टी के पास एक समर्पित और मजबूत वोट बैंक है, जो इस बार 'इंडिया' ब्लॉक के साथ मजबूती से खड़ा है. इस दावे का सीधा मकसद है कि गठबंधन के बड़े साझेदार उनकी मांगों को गंभीरता से लें. उनका तर्क है कि अगर वीआईपी के वोट गठबंधन के पक्ष में नहीं आते हैं, तो जीत सुनिश्चित नहीं की जा सकती. इस तरह, मुकेश साहनी खुद को 'किंगमेकर' की भूमिका में स्थापित कर रहे हैं.
मुकेश साहनी की सीटों की मांग और उपमुख्यमंत्री पद की शर्त को स्वीकार करना आरजेडी और कांग्रेस जैसे बड़े दलों के लिए आसान नहीं होगा. अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता है, तो ‘गठबंधन जरूरी, मजबूरी नहीं’ वाला बयान सच साबित हो सकता है और वीआईपी गठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ सकती है. इसलिए, यह बयान न केवल वीआईपी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को दर्शाता है, बल्कि ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेतृत्व के लिए भी एक बड़ी परीक्षा है कि वे अपने सभी साझेदारों को संतुष्ट करते हुए गठबंधन की एकता को कैसे बनाए रखते हैं.
इनपुट - स्वप्निल सोनल
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