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Congress Working Committee: कांग्रेस वर्किंग कमेटी की इस बार की मीटिंग बिहार की राजधानी पटना में होने वाली है. यह मीटिंग 24 सितंबर को होगी, जिसमें कांग्रेस के सभी बड़े लीडर और जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है, वहां के मुख्यमंत्री भी आएंगे. इस मीटिंग का खास मकसद है कि बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की स्थिति को और मजबूत किया जाए और लोगों को पार्टी की ताकत का एहसास कराया जाए. मीटिंग के लिए पटना को इसलिए चुना गया है, ताकि बिहार के वोटरों तक कांग्रेस की सक्रियता और चुनाव से जुड़ा संदेश सीधे-सीधे पहुंचाया जा सके.
अहमदाबाद में (8, April, 2025) कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की विस्तारित बैठक की फोटो
क्या है कांग्रेस वर्किंग कमेटी?
कांग्रेस में "सीडब्ल्यूसी" यानी "कांग्रेस वर्किंग कमेटी" सबसे बड़ी कमेटी है. यह कमेटी पार्टी के लिए बड़े और जरूरी फैसले लेती है, जैसे चुनाव में क्या करना है, कैसे काम करना है, और पार्टी से जुड़े दूसरे अहम निर्णय भी लेती है. इस कमेटी में कुछ खास लोग होते हैं, जैसे पार्टी के अध्यक्ष, पुराने अध्यक्ष और जो भी प्रधानमंत्री रहे हों या अभी हैं. ये लोग तो हमेशा इस कमेटी का हिस्सा होते हैं. इनके अलावा कुछ परमानेंट और स्पेशल मेंबर भी होते हैं. जो नई सीडब्ल्यूसी बनी है, उसमें मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मनमोहन सिंह, ए.के. एंटनी, अंबिका सोनी, मीरा कुमार, दिग्विजय सिंह, पी. चिदंबरम, तारिक अनवर, मुकुल वासनिक, आनंद शर्मा, अशोक चव्हाण, अजय माकन, चरणजीत सिंह चन्नी, कुमारी शैलजा, शशि थरूर, सचिन पायलट, सलमान खुर्शीद, अभिषेक मनु सिंघवी, जयराम रमेश, जितेंद्र सिंह, रणदीप सिंह सुरजेवाला, भूपेश बघेल जैसे बहुत सारे सीनियर नेता हैं.
अहमदाबाद में (8, April, 2025) कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की विस्तारित बैठक की फोटो
यह कमेटी इतनी ताकतवर है कि यह पार्टी के अध्यक्ष को चुन भी सकती है और हटा भी सकती है. यह हार-जीत, चुनाव की प्लानिंग और पार्टी के बड़े-बड़े राजनीतिक फैसलों का सबसे अहम सेंटर मानी जाती है. कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) में इस बार कुल 39 सदस्य, 32 परमानेंट मेंबर (स्थायी आमंत्रित सदस्य) और 13 स्पेशल मेंबर (विशेष आमंत्रित सदस्य) हैं. यह कमेटी इतनी ताकतवर है कि पार्टी के सभी बड़े और आखिरी फैसले यही लेती है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) में भी इसी तरह की एक कमेटी है, जिसे 'संसदीय बोर्ड' कहते हैं, जो चुनाव से जुड़े सभी बड़े फैसले लेती है.
अहमदाबाद में (8, April, 2025) कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की विस्तारित बैठक की फोटो
बिहार में इस बार कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की मीटिंग होना कोई नई बात नहीं है. इससे पहले 16 सितंबर 2023 को हैदराबाद में भी ऐसी ही एक बैठक हुई थी. उस समय तेलंगाना, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने वाले थे. हैदराबाद की मीटिंग के बाद तेलंगाना में कांग्रेस बहुत मजबूत हो गई और उसकी सीटें 19 से बढ़कर 64 हो गईं. इतना ही नहीं, कांग्रेस का वोट शेयर भी करीब 10.5 प्रतिशत बढ़ गया. पटना की मीटिंग में पार्टी कुछ खास मुद्दों पर अपनी बात रखेगी. इनमें 'वोट की चोरी', 'संविधान बचाओ', बेरोजगारी और बिहार में पलायन जैसे मुद्दे शामिल हैं. लेकिन सबसे जरूरी बात जो होगी, वो है सीटों के बंटवारे पर चर्चा. कांग्रेस ने पिछली बार 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था. सीटों के बंटवारे पर फैसला होने के बाद ही महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे का ऐलान होने की भी उम्मीद है.
अहमदाबाद में (8, April, 2025) कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की विस्तारित बैठक की फोटो
बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और महागठबंधन के बीच सीटों का बंटवारा सबसे अहम मुद्दा है. कांग्रेस इस बार अकेले दम दिखाने की कोशिश कर रही है. बिहार में 1990 के बाद कांग्रेस का कोई मुख्यमंत्री नहीं बना है. इसलिए पार्टी अपनी पुरानी जमीन को तलाशते हुए नई रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतर रही है. सीट बंटवारे और मुख्यमंत्री चेहरे की घोषणा बैठक के बाद ही हो सकती है.
साल 2025 के बिहार चुनाव में कांग्रेस फिर से लोगों का भरोसा और विश्वास जीतने की कोशिश कर रही है. पार्टी एक तरफ तो अपनी पुरानी जगह वापस पाना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ वह अकेले चुनाव लड़ने का रास्ता भी खोज रही है. कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और एनएसयूआई के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की अगुवाई में 'नौकरी दो-पलायन रोको यात्रा' बहुत कामयाब रही. इस यात्रा के जरिए कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और आम लोगों को भी पार्टी से जोड़ा गया. राहुल गांधी ने बिहार में लगातार 15 दिन रहकर 1300 किलोमीटर की लंबी यात्रा की है. इस दौरान उन्होंने लोगों से सीधे बात करने के लिए 'वोटर अधिकार यात्रा' शुरू की. प्रियंका गांधी भी 26 सितंबर को मोतिहारी में एक बड़ी रैली करेंगी. इस रैली में महागठबंधन के दूसरे बड़े नेता शामिल नहीं होंगे. यह रैली भी बिहार में कांग्रेस की ताकत और उसकी मौजूदगी को दिखाने के लिए की जा रही है.
वहीं अब कांग्रेस ने बिहार में 'वोट चोर-गद्दी छोड़' अभियान शुरू किया है. यह अभियान 15 अक्टूबर तक चलेगा. इसके तहत पांच लाख हस्ताक्षर जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, जिन्हें बाद में राष्ट्रपति और चुनाव आयोग को सौंपा जाएगा. इस अभियान के जरिए कांग्रेस संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए जनजागरण करने की कोशिश कर रही है.
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