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Bihar News: बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शी नीतियों और मजबूत राजनीतिक इच्छा शक्ति ने आधी आबादी के जीवन में एक ऐतिहासिक बदलाव की नींव रख दी है. कभी घर-परिवार और चौखट तक सीमित मानी जाने वाली महिलाएं अब न केवल घर की अर्थव्यवस्था का सहारा बन रही हैं, बल्कि उद्यमिता के क्षेत्र में भी नया इतिहास लिख रही हैं. 'महिला रोजगार योजना' ने इस बदलाव को रफ्तार दी है, जिसने आत्मनिर्भरता, सम्मान और सशक्तिकरण का ऐसा मार्ग प्रशस्त किया है, जो आने वाले वर्षों में बिहार की तस्वीर को पूरी तरह बदल सकता है. नालंदा के सिलाव प्रखंड के सारिलचक गांव की मंजुला देवी इसका जीता-जागता उदाहरण हैं.
व्यापार को विस्तार देने की दिशा में काम
जीविका समूह की मदद से मसालों का थोक कारोबार शुरू करने वाली मंजुला ने महिला रोजगार योजना से मिलने आर्थिक सहायता को अपने व्यवसाय को नई ऊंचाई देने का साधन बनाएंगी. वे अब अपने व्यापार को गांव से आगे बढ़ाकर प्रखंड और जिला स्तर पर विस्तार देने की दिशा में काम कर रही हैं. उनके शब्दों में, यह राशि हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं. अब हम मशीनें लगाकर बड़े पैमाने पर उत्पादन करेंगे. यह कहानी सिर्फ मंजुला की नहीं, बल्कि लाखों उन महिलाओं की भी है जिन्होंने अपने भीतर के उद्यमी को पहचानकर आत्मनिर्भरता का रास्ता चुना है.
महिलाएं करेंगी नया कीर्तिमान स्थापित
इसी तरह राजधानी पटना के फतुहा प्रखंड की मंजू देवी ने पशुपालन और कृषि क्षेत्र में कदम बढ़ाकर इस योजना की सफलता को और भी सार्थक बना दिया है. वे न केवल फूलों का व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रही हैं, बल्कि कोल्ड स्टोरेज के जरिए फलों और सब्जियों के व्यापार को भी विस्तार देना चाहती हैं. मंजू देवी ने कहा कि 2005 के बाद बिहार की महिलाओं ने नौकरी और सेवा क्षेत्र में राज्य का नाम रोशन किया. अब वही महिलाएं उद्यमिता के क्षेत्र में भी नया कीर्तिमान स्थापित करेंगी.
आर्थिक संबल से आत्मनिर्भरता तक
दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण आधारित योजनाओं से शिक्षा, स्वास्थ्य, आत्मरक्षा, रोजगार और अब उद्यमिता, हर क्षेत्र में महिलाओं के लिए अवसरों के द्वार खोले जा रहे हैं. महिला रोजगार योजना इसका सबसे सशक्त उदाहरण है, जिसने महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की पहल की है, बल्कि उन्हें अपने सपनों को साकार करने का साहस भी दिया है. यह योजना सिर्फ महिलाओं को आर्थिक संबल नहीं दे रही, बल्कि समाज की सोच को भी बदल रही है, जहां अब बेटी को ‘बोझ’ नहीं बल्कि ‘बिज़नेस लीडर’ के रूप में देखा जा रहा है. महिला सशक्तिकरण के इस नए युग में नीतीश सरकार की यह पहल ने साबित कर दिया है कि यह वही बिहार है, जहां महिलाएं अब चौखट नहीं, कारोबार की कमान संभाल रही हैं.
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