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झारखंड में जानलेवा साबित हो रही हवा, लोगों की औसत उम्र में आई 4.5 साल की कमी

शिकागो विश्वविद्यालय, अमेरिका की शोध संस्था ‘एपिक’द्वारा तैयार ‘वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक’के नये विश्लेषण के अनुसार वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति के कारण झारखंड के नागरिकों की ‘जीवन प्रत्याशा’ (Life Expectancy) औसतन 4.4 वर्ष कम हो रही है.

झारखंड में जानलेवा साबित हो रही हवा, लोगों की औसत उम्र में आई 4.5 साल की कमी
वायु प्रदूषण से लोगों की औसत आयु में कमी दर्ज. (प्रतीकात्क तस्वीर)

रांची: देश के मेट्रो शहरों की तरह झारखंड (Jharkhand) की हवा भी जहरीली होती जा रही है. एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स के अनुसार रांची, गोड्डा और कोडरमा के लोग अपनी औसत जीवन से लगभग 5 वर्ष अधिक जीवन और जी सकते थे, अगर वायु की गुणवत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों के अनुरूप होती. हालांकि रांची (Ranchi) झारखंड राज्य में प्रदूषित जिलों की सूची में शीर्ष पर नहीं है, पर झारखंड के अन्य जिले और शहर के लोगों का जीवनकाल घट रहा है और वे बीमार जीवन जी रहे हैं.

उदाहरण के लिए गोड्डा के लोगों के जीवनकाल में 5 साल तक घट गया है. इसी तरह कोडरमा, साहेबगंज, बोकारो, पलामू और धनबाद भी इस सूची में पीछे नहीं हैं, जहां के लोगों की जीवन काल  क्रमशः 4.9 वर्ष, 4.8 वर्ष, 4.8 वर्ष, 4.7 वर्ष, और 4.7 वर्ष तक घट गया है. यहां के लोगों का जीवन काल इतना ही बढ़ जाता अलग लोग लोग स्वच्छ और सुरक्षित हवा में सांस लेते.  

झारखंड में वायु प्रदूषण गंभीर 
शिकागो विश्वविद्यालय, अमेरिका की शोध संस्था ‘एपिक’द्वारा तैयार ‘वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक’के नये विश्लेषण के अनुसार वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति के कारण झारखंड के नागरिकों की ‘जीवन प्रत्याशा’ (Life Expectancy) औसतन 4.4 वर्ष कम हो रही है. जीवन प्रत्याशा में उम्र बढ़ सकती है अगर यहां के वायुमंडल में प्रदूषित सूक्ष्म तत्वों एवं धूलकणों की सघनता 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक सीमित हो.  एक्यूएलआई के आंकड़ों के अनुसार राजाधानी रांची के लोग 4.1 वर्ष ज्यादा जी सकते थे, अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों को हासिल कर लिया जाता. 
 
देश के लिए बड़ी चुनौती बना वायु प्रदूषण  
दरअसल वायु प्रदूषण पूरे भारत में एक बड़ी चुनौती है. भारत की आबादी का 40 प्रतिशत से अधिक  (48 करोड़) लोग उत्तर भारत के गंगा के मैदानी इलाके में रहती है. जहां बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं.  एक्यूएलआई के अनुसार भारत के उत्तरी क्षेत्र यानी गंगा के मैदानी इलाके में रह रहे लोगों का जीवन काल करीब 7 वर्ष कम होने की आशंका है, क्योंकि इन इलाकों के वायुमंडल में ‘प्रदूषित सूक्ष्म तत्वों और धूलकणों से होने वाला वायु प्रदूषण’ यानी पार्टिकुलेट पॉल्यूशन  विश्व स्वास्थ्य संगठन के तय दिशानिर्देशों को हासिल करने में विफल रहा है. पार्टीकुलेट मैटर से संबंधित आंकड़े बताते है कि मानव गतिविधियों के कारण वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है. शोध अध्ययनों के अनुसार इसका कारण यह है कि वर्ष 1998 से 2016 में गंगा के मैदानी इलाके में वायु प्रदूषण 72 प्रतिशत बढ़ गया. 

नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम
वर्ष 2019 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम की शुरुआत की गयी. कार्यक्रम का लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर पार्टीकुलेट पॉल्युशन को 20 से 30 फीसदी तक कम करना है. अगर कार्यक्रम अपना लक्ष्य हासिल करने में सफल रहा और प्रदूषण स्तर में कमी हुई हुई तो एक औसत भारतीय की उम्र 1.3 फीसदी तक बढ़ जायेगी. गंगा के मैदानी इलाकों में रहने वालों लोगों का जीवन काल 2 वर्ष तक बढ़ जायेगा.